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प्रदेश के एक लाख स्कूलों में हमने सीखा एप से जगेगी शिक्षा की अलख
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गोंडा। बेसिक शिक्षा के जिले के शिक्षक राखाराम गुप्त ने हमने सीखा मोबाइल एप तैयार किया है। पहले उन्होंने व्हाट्सएप के माध्यम से स्कूल के शिक्षकों को जोड़कर मुहिम शुरू की थी। इसके बाद प्रदेश के कई जिलों में मुहिम की शुरूआत हो गई। इसे संचालित करने के लिए हमने सीखा एप तैयार किया, जिसे शुक्रवार को निदेशक बेसिक शिक्षा सर्वेन्द्र विक्रम सिंह की ओर से जारी किया गया।
बीएसए डा. इंद्रजीत प्रजापति का कहना है कि हमने सीखा मोबाइल एप जारी होने के बाद अब आसानी से शिक्षकों के काम आएगा। लखनऊ के अधिकारियों ने शिक्षक राखाराम गुप्त के प्रयोग को सराहा है और प्रदेश के सभी स्कूलों में लागू करने पर जोर दिया है। इस एप पर शिक्षक लर्निंग कंटेंट भी लोड कर सकेंगे और बच्चों को अभ्यास से सीखने में मदद मिलेगी।
जिले के बेसिक शिक्षा के प्राइमरी व जूनियर हाईस्कूलों में ‘हमने सीखा’ कार्यक्रम का प्रयोग प्रदेश स्तर तक सराहा गया है। बिना किसी अतिरिक्त सरकारी बजट के ही स्कूलों में शैक्षिक वातावरण सृजन करने में हमने सीखा कार्यक्रम एक मिसाल बनकर उभरा है। अब इसे पूरे प्रदेश के एक लाख से अधिक स्कूलों में लागू करने के लिए निदेशक ने मोबाइल एप जारी किया है।
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बेलसर के बकौलीपुरवा प्राइमरी स्कूल के शिक्षक राखाराम गुप्त ने सितंबर 2018 में अपना प्रयोग शुरू किया तो जिले के कई स्कूलों ने भी इसे अपनाना शुरू किया। जिले के 40 से अधिक स्कूलों के शिक्षकों ने राखाराम के ‘हमने सीखा’ कार्यक्रम को अपने यहां भी लागू कर दिया। हर दिन चार्ट पेपर पर जहां बच्चे अपने ज्ञान को प्रस्तुत करते हैं, वहीं स्कूल के ही एक कमरे में दीवार पर हमने सीखा चार्ट सहेजा जा रहा है।
अब ये स्कूलों में चार्ट गैलरी के रूप में विकसित किया जा चुका था, अब एप बनाने से और अधिक उपयोगी हो गया है। कार्यक्रम को बीएसए डॉ. इन्द्रजीत प्रजापति ने पहल को सराहा और ग्रुप तैयार कर शिक्षकों के बीच गतिविधियों को प्रस्तुत किया। इस पर 156 से अधिक स्कूलों के शिक्षकों ने कार्यक्रम को सराहा। बीते साल जिलाधिकारी डॉ. नितिन बसंल को ‘हमने सीखा’ कार्यक्रम की जानकारी हुई तो उन्होंने छावनी सरकार विद्यालय की शिक्षिका अंकिता द्विवेदी की ओर से तैयार की गई हमने सीखा दीवार और पूर्व माध्यमिक स्कूल कटरा बाजार की अंकिता मिश्रा की चार्ट गैलरी का अवलोकन कर सराहना की।
सरकारी स्कूल बनेंगे स्मार्ट, बच्चें होंगे कुशल
हमने सीखा कार्यक्रम से अधिगम क्षमता के विकास के साथ ही बच्चों की उपस्थिति में भी बदलाव आ रहा है। जटिल नहीं होने से ये कार्यक्रम शिक्षक आसानी से संचालित कर लेते हैं और फिर बच्चों में भी उत्साह है। मोबाइल एप होने से अब आसानी से कार्यक्रम की जानकारी हो सकेगी।
हर दिन नियमित पढ़ाई के साथ ही बच्चों के साथ उनको क्या जानकारी हुई? उसे विषयवार चार्ट पर लिखवाना है। अब आनलाइन ही घर बैठे ही बच्चों को इस मुहिम से जोड़ सकेंगे।
लखनऊ में हमने सीखा एप को निदेशक सर्वेन्द्र विक्रम सिंह के साथ निदेशक राज्य शैक्षिक तकनीकी संस्थान ललिता प्रदीप, अपर शिक्षा निदेशक सुत्ता सिंह, उप शिक्षा निदेशक अमरेन्द्र सिंह, अशोक कुमार, बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव प्रताप सिंह बघेल, संयुक्त शिक्षा निदेशक गणेश कुमार, बीएसए डॉ. इन्द्रजीत प्रजापति ने किया। सभी ने शिक्षक राखाराम गुप्त की पहल को सराहा और उनको सराहा। इसे प्रदेश के सभी शिक्षकों को प्रयोग में लाने पर अधिकारियों ने जोर दिया।
वर्जन
हमने सीखा कार्यक्रम बच्चों में सीखने की प्रवृत्ति का विकास करेगी। कोविड काल में मोबाइल एप से ही कार्यक्रम को लागू किया जाना संभव है। एप को विभाग की ओर से जारी किया है, मेरा सपना पूरा हुआ है। उम्मीद है कि हमारे शिक्षक साथी गुगल प्ले स्टोर से हमने सीखा डाट इन से अपलोड करके शिक्षा कार्य में प्रयोग कर सकेंगे।
-राखाराम गुप्ता, शिक्षक
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बीएसए डा. इंद्रजीत प्रजापति का कहना है कि हमने सीखा मोबाइल एप जारी होने के बाद अब आसानी से शिक्षकों के काम आएगा। लखनऊ के अधिकारियों ने शिक्षक राखाराम गुप्त के प्रयोग को सराहा है और प्रदेश के सभी स्कूलों में लागू करने पर जोर दिया है। इस एप पर शिक्षक लर्निंग कंटेंट भी लोड कर सकेंगे और बच्चों को अभ्यास से सीखने में मदद मिलेगी।
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जिले के बेसिक शिक्षा के प्राइमरी व जूनियर हाईस्कूलों में ‘हमने सीखा’ कार्यक्रम का प्रयोग प्रदेश स्तर तक सराहा गया है। बिना किसी अतिरिक्त सरकारी बजट के ही स्कूलों में शैक्षिक वातावरण सृजन करने में हमने सीखा कार्यक्रम एक मिसाल बनकर उभरा है। अब इसे पूरे प्रदेश के एक लाख से अधिक स्कूलों में लागू करने के लिए निदेशक ने मोबाइल एप जारी किया है।
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बेलसर के बकौलीपुरवा प्राइमरी स्कूल के शिक्षक राखाराम गुप्त ने सितंबर 2018 में अपना प्रयोग शुरू किया तो जिले के कई स्कूलों ने भी इसे अपनाना शुरू किया। जिले के 40 से अधिक स्कूलों के शिक्षकों ने राखाराम के ‘हमने सीखा’ कार्यक्रम को अपने यहां भी लागू कर दिया। हर दिन चार्ट पेपर पर जहां बच्चे अपने ज्ञान को प्रस्तुत करते हैं, वहीं स्कूल के ही एक कमरे में दीवार पर हमने सीखा चार्ट सहेजा जा रहा है।
अब ये स्कूलों में चार्ट गैलरी के रूप में विकसित किया जा चुका था, अब एप बनाने से और अधिक उपयोगी हो गया है। कार्यक्रम को बीएसए डॉ. इन्द्रजीत प्रजापति ने पहल को सराहा और ग्रुप तैयार कर शिक्षकों के बीच गतिविधियों को प्रस्तुत किया। इस पर 156 से अधिक स्कूलों के शिक्षकों ने कार्यक्रम को सराहा। बीते साल जिलाधिकारी डॉ. नितिन बसंल को ‘हमने सीखा’ कार्यक्रम की जानकारी हुई तो उन्होंने छावनी सरकार विद्यालय की शिक्षिका अंकिता द्विवेदी की ओर से तैयार की गई हमने सीखा दीवार और पूर्व माध्यमिक स्कूल कटरा बाजार की अंकिता मिश्रा की चार्ट गैलरी का अवलोकन कर सराहना की।
सरकारी स्कूल बनेंगे स्मार्ट, बच्चें होंगे कुशल
हमने सीखा कार्यक्रम से अधिगम क्षमता के विकास के साथ ही बच्चों की उपस्थिति में भी बदलाव आ रहा है। जटिल नहीं होने से ये कार्यक्रम शिक्षक आसानी से संचालित कर लेते हैं और फिर बच्चों में भी उत्साह है। मोबाइल एप होने से अब आसानी से कार्यक्रम की जानकारी हो सकेगी।
हर दिन नियमित पढ़ाई के साथ ही बच्चों के साथ उनको क्या जानकारी हुई? उसे विषयवार चार्ट पर लिखवाना है। अब आनलाइन ही घर बैठे ही बच्चों को इस मुहिम से जोड़ सकेंगे।
लखनऊ में हमने सीखा एप को निदेशक सर्वेन्द्र विक्रम सिंह के साथ निदेशक राज्य शैक्षिक तकनीकी संस्थान ललिता प्रदीप, अपर शिक्षा निदेशक सुत्ता सिंह, उप शिक्षा निदेशक अमरेन्द्र सिंह, अशोक कुमार, बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव प्रताप सिंह बघेल, संयुक्त शिक्षा निदेशक गणेश कुमार, बीएसए डॉ. इन्द्रजीत प्रजापति ने किया। सभी ने शिक्षक राखाराम गुप्त की पहल को सराहा और उनको सराहा। इसे प्रदेश के सभी शिक्षकों को प्रयोग में लाने पर अधिकारियों ने जोर दिया।
वर्जन
हमने सीखा कार्यक्रम बच्चों में सीखने की प्रवृत्ति का विकास करेगी। कोविड काल में मोबाइल एप से ही कार्यक्रम को लागू किया जाना संभव है। एप को विभाग की ओर से जारी किया है, मेरा सपना पूरा हुआ है। उम्मीद है कि हमारे शिक्षक साथी गुगल प्ले स्टोर से हमने सीखा डाट इन से अपलोड करके शिक्षा कार्य में प्रयोग कर सकेंगे।
-राखाराम गुप्ता, शिक्षक