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Gonda News: होलाष्टक आज से, नहीं होंगे मांगलिक कार्य
Thu, 06 Mar 2025 11:35 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Thu, 06 Mar 2025 11:35 PM IST
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गोंडा। होली के आठ दिन पहले शुक्रवार से होलाष्टक की शुरुआत हो रही है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अब आठ दिन तक कोई भी मांगलिक व धार्मिक कार्य नहीं होंगे। इस दौरान पूजापाठ करने से मनोकामना की पूर्ति होगी।
काजीदेवर निवासी पंडित राकेशदत्त शास्त्री के अनुसार होलाष्टक शब्द का अर्थ होली के आठ दिन पूर्व तक है। इसी समय में भक्त प्रह्लाद को कठिन यातनाएं दी गई थीं, इसके कारण आठ दिन तक ग्रह उग्र स्वभाव में रहते हैं। जिससे शुभ कार्यों का अच्छा फल नहीं मिल पाता। पंडित राकेशदत्त बताते हैं कि हिरण्यकश्यप खुद को भगवान समझता था, लेकिन उसका पुत्र प्रह्लाद भगवान विष्णु का भक्त था। जिससे क्रोधित होकर हिरण्यकश्यप ने अपने पुत्र को यातनाएं देना शुरू कर दिया। आठवें दिन हिरण्यकश्यप की बहन होलिका ने प्रह्लाद को जलाना चाहा लेकिन वह खुद जल गई। इसलिए ये आठ दिन पीड़ा, संघर्ष व नकारात्मक ऊर्जा वाले माने जाते हैं। इस दौरान भगवान की पूजा, जप-तप व दान-धर्म करना शुभ माना जाता है। होलाष्टक में मुंडन, नामकरण, अन्नप्रासन, गृह प्रवेश, विवाह व यज्ञोपवीत नहीं किया जाता है। इस दौरान 10 मार्च को रंगभरी एकादशी मनाई जाएगी, जिसमें साधु-संतों की ओर से विशेष पूजा-अर्चना की जाती है।
13 को जलेगी होलिका, 14 को उड़ेगा अबीर-गुलाल
पंडित राकेशदत्त के अनुसार होली का त्योहार फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। पूर्णिमा की शुरुआत 13 मार्च सुबह 10:35 बजे से होगी। अगले दिन 14 मार्च को अपराह्न 12:23 बजे तक पूर्णिमा रहेगी। हिंदू धर्म के अनुसार प्रत्येक त्योहार उदया तिथि में मनाने की परंपरा है। जिसके कारण होलिका दहन 13 मार्च को किया जाएगा। 14 मार्च को रंगों व अबीर-गुलाल से होली खेली जाएगी।
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काजीदेवर निवासी पंडित राकेशदत्त शास्त्री के अनुसार होलाष्टक शब्द का अर्थ होली के आठ दिन पूर्व तक है। इसी समय में भक्त प्रह्लाद को कठिन यातनाएं दी गई थीं, इसके कारण आठ दिन तक ग्रह उग्र स्वभाव में रहते हैं। जिससे शुभ कार्यों का अच्छा फल नहीं मिल पाता। पंडित राकेशदत्त बताते हैं कि हिरण्यकश्यप खुद को भगवान समझता था, लेकिन उसका पुत्र प्रह्लाद भगवान विष्णु का भक्त था। जिससे क्रोधित होकर हिरण्यकश्यप ने अपने पुत्र को यातनाएं देना शुरू कर दिया। आठवें दिन हिरण्यकश्यप की बहन होलिका ने प्रह्लाद को जलाना चाहा लेकिन वह खुद जल गई। इसलिए ये आठ दिन पीड़ा, संघर्ष व नकारात्मक ऊर्जा वाले माने जाते हैं। इस दौरान भगवान की पूजा, जप-तप व दान-धर्म करना शुभ माना जाता है। होलाष्टक में मुंडन, नामकरण, अन्नप्रासन, गृह प्रवेश, विवाह व यज्ञोपवीत नहीं किया जाता है। इस दौरान 10 मार्च को रंगभरी एकादशी मनाई जाएगी, जिसमें साधु-संतों की ओर से विशेष पूजा-अर्चना की जाती है।
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13 को जलेगी होलिका, 14 को उड़ेगा अबीर-गुलाल
पंडित राकेशदत्त के अनुसार होली का त्योहार फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। पूर्णिमा की शुरुआत 13 मार्च सुबह 10:35 बजे से होगी। अगले दिन 14 मार्च को अपराह्न 12:23 बजे तक पूर्णिमा रहेगी। हिंदू धर्म के अनुसार प्रत्येक त्योहार उदया तिथि में मनाने की परंपरा है। जिसके कारण होलिका दहन 13 मार्च को किया जाएगा। 14 मार्च को रंगों व अबीर-गुलाल से होली खेली जाएगी।
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