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डॉक्टरी बना कारोबार, इंटर पास कर रहे उपचार
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गोंडा के जिला अस्पताल में दवा वितरण काउंटर पर लाइन में लगे लोग। -संवाद
- फोटो : GONDA
गोंडा। स्वास्थ्य विभाग की अनदेखी से जिले में बड़ी संख्या में झोलाछाप पनप रहे हैं। गांवों से लेकर शहरों तक करीब दो हजार से अधिक ऐसे डॉक्टर क्लीनिक खोलकर मरीजों का इलाज कर रहे हैं, जिनके पास मेडिकल की डिग्री तक नहीं है। अधिकांश डॉक्टर तो इंटरमीडिएट या स्नातक पास होते हैं। मरीजों की हालत बिगड़ने पर शहर के किसी निजी अस्पताल में रेफर कर देते हैं। इसका इनको कमीशन भी मिल जाता है। इन अवैध कारोबारियों पर स्वास्थ्य महकमे के आला अधिकारियों की अनदेखी से इनके गोरखधंधे पर कोई आंच नहीं आती।
जिला अस्पताल, महिला अस्पताल समेत जिले में 16 सामुदायिक तथा 52 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र संचालित हैं। इसके बावजूद झोलाछाप क्लीनिक के नाम पर मरीजों को लूटा जा रहा है। इन क्लीनिकों पर बैठने वाले इंटर या स्नातक पास डॉक्टर बुखार, पेट दर्द आदि आम बीमारियों की दवा अपने पास से देते हैं। मरीज की हालत बिगड़ने पर मरीज को निजी अस्पताल में भेजकर वहां से कमीशन प्राप्त करते हैं। इस कमीशन का भार भी मरीज पर पड़ता है। एक स्वास्थ्य कर्मी की माने तो इन झोलाछाप का धंधा स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की मेहरबानी से चल रहा है।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से कई वर्षों से इनके खिलाफ कोई अभियान नहीं चलाया गया। गुरुवार को 20 साल से झोलाछाप के रूप में काम करने वाले एक चिकित्सक की ओर से दुष्कर्म की घटना सामने आई, तो स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी संबंधित क्लीनिक सीज कर दवाओं को जब्त कर लिया, लेकिन अन्य झोलाछापों पर कार्रवाई की कोई रणनीति नहीं बन सके।
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बिना डिग्री वाले बंगाली डॉक्टरों की भरमार
- गांवों में बिना जरूरी डिग्री वाले बंगाली डॉक्टरों की भरमार है। कोई तीन-चार साल तक मेडिकल स्टोर पर काम करने के बाद डॉक्टर बन जा रहा है, तो किसी के पूर्वज इलाज करते आ रहे हैं। ये लोग मरीजों को दर्द निवारक दवाएं व इंजेक्शन की बदौलत तुरंत आराम तो दिला देते लेकिन इसका दुष्प्रभाव मरीजों को भुगतना पड़ रहा है।
सरकारी अस्पतालों में नहीं मिलते डॉक्टर
झोलाछाप का धंधा फलने फूलने के पीछे स्वास्थ्य केंद्रों पर तैनात डॉक्टरों की लापरवाही है। सामुदायिक व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर मरीजों को समय से डॉक्टर नहीं मिलते। जानकीनगर निवासी रामबरन का कहना है कि सरकारी अस्पतालों में पूरे दिन लाइन में लगने के बावजूद कभी कभार डॉक्टर नहीं मिल पाते हैं, जिससे मरीज सुलभता के कारण स्थानीय डॉक्टरों से इलाज करवा लेता है।
छापामार अभियान चलाकर होगी कार्रवाई
बिना पंजीकरण चल रहे क्लीनिकों के खिलाफ समय-समय पर अभियान चलाया जा रहा है। अप्रशिक्षित डॉक्टरों को क्लीनिक बंद करने संबंधी नोटिस दिए जाते हैं। जल्द ही टीम गठित कर छापामार अभियान चलाकर कार्रवाई की जाएगी। डॉ. रश्मि वर्मा, सीएमओ
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जिला अस्पताल, महिला अस्पताल समेत जिले में 16 सामुदायिक तथा 52 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र संचालित हैं। इसके बावजूद झोलाछाप क्लीनिक के नाम पर मरीजों को लूटा जा रहा है। इन क्लीनिकों पर बैठने वाले इंटर या स्नातक पास डॉक्टर बुखार, पेट दर्द आदि आम बीमारियों की दवा अपने पास से देते हैं। मरीज की हालत बिगड़ने पर मरीज को निजी अस्पताल में भेजकर वहां से कमीशन प्राप्त करते हैं। इस कमीशन का भार भी मरीज पर पड़ता है। एक स्वास्थ्य कर्मी की माने तो इन झोलाछाप का धंधा स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की मेहरबानी से चल रहा है।
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स्वास्थ्य विभाग की ओर से कई वर्षों से इनके खिलाफ कोई अभियान नहीं चलाया गया। गुरुवार को 20 साल से झोलाछाप के रूप में काम करने वाले एक चिकित्सक की ओर से दुष्कर्म की घटना सामने आई, तो स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी संबंधित क्लीनिक सीज कर दवाओं को जब्त कर लिया, लेकिन अन्य झोलाछापों पर कार्रवाई की कोई रणनीति नहीं बन सके।
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बिना डिग्री वाले बंगाली डॉक्टरों की भरमार
- गांवों में बिना जरूरी डिग्री वाले बंगाली डॉक्टरों की भरमार है। कोई तीन-चार साल तक मेडिकल स्टोर पर काम करने के बाद डॉक्टर बन जा रहा है, तो किसी के पूर्वज इलाज करते आ रहे हैं। ये लोग मरीजों को दर्द निवारक दवाएं व इंजेक्शन की बदौलत तुरंत आराम तो दिला देते लेकिन इसका दुष्प्रभाव मरीजों को भुगतना पड़ रहा है।
सरकारी अस्पतालों में नहीं मिलते डॉक्टर
झोलाछाप का धंधा फलने फूलने के पीछे स्वास्थ्य केंद्रों पर तैनात डॉक्टरों की लापरवाही है। सामुदायिक व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर मरीजों को समय से डॉक्टर नहीं मिलते। जानकीनगर निवासी रामबरन का कहना है कि सरकारी अस्पतालों में पूरे दिन लाइन में लगने के बावजूद कभी कभार डॉक्टर नहीं मिल पाते हैं, जिससे मरीज सुलभता के कारण स्थानीय डॉक्टरों से इलाज करवा लेता है।
छापामार अभियान चलाकर होगी कार्रवाई
बिना पंजीकरण चल रहे क्लीनिकों के खिलाफ समय-समय पर अभियान चलाया जा रहा है। अप्रशिक्षित डॉक्टरों को क्लीनिक बंद करने संबंधी नोटिस दिए जाते हैं। जल्द ही टीम गठित कर छापामार अभियान चलाकर कार्रवाई की जाएगी। डॉ. रश्मि वर्मा, सीएमओ