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Gonda News: महज कुछ घंटे में मिली 11 माह की भागदौड़ से निजात
Tue, 11 Feb 2025 11:05 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Tue, 11 Feb 2025 11:05 PM IST
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गोंडा। जनता दर्शन में पिछले 11 महीने से पति की मृत्यु के बाद प्रमाणपत्र व परिवार रजिस्टर की नकल न मिलने की समस्या को लेकर डीएम नेहा शर्मा के समक्ष पेश हुई रेतवागाड़ा की रिमझिम की समस्या महज कुछ ही घंटे में हल हो गई। यही नहीं, लापरवाही बरतने वाले पंचायत सचिव को परिनिंदा भी जारी की गई।
मुजेहना के ग्राम रेतवागाड़ा निवासी रिमझिम के पति स्व. श्रवण कुमार का निधन 26 मार्च 2024 को हो गया था। पति की मृत्यु के बाद उन्होंने कई बार पंचायत सचिव विनय कुमार भारती से मृत्यु प्रमाणपत्र और परिवार रजिस्टर की नकल के लिए अनुरोध किया, लेकिन हर बार उन्हें टालमटोल कर वापस भेज दिया गया। पंचायत सचिव की लापरवाही का आलम यह था कि विकासखंड स्तर से भी मामले में भ्रामक रिपोर्ट भेजकर शिकायत को झूठा साबित करने की कोशिश की गई।
सोमवार को उन्होंने जिलाधिकारी के जनता दर्शन में अपनी शिकायत दर्ज कराई। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी ने तत्काल जांच के आदेश दिए। मुख्य राजस्व अधिकारी की जांच में पाया गया कि विकासखंड स्तर से भेजी गई रिपोर्ट तथ्यहीन और झूठी थी। डीएम ने उसी दिन सुनवाई कर मामले का निस्तारण किया। सुनवाई के दौरान खंड विकास अधिकारी ने स्वीकार किया कि पंचायत सचिव की लापरवाही के कारण पीड़िता को 11 महीने तक परेशान होना पड़ा। सुनवाई के तुरंत बाद पीड़िता को परिवार रजिस्टर की नकल उपलब्ध कराई गई और उसी दिन शाम तक मृत्यु प्रमाणपत्र भी सौंपा गया।
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जब पंचायत सचिव विनय कुमार भारती से देरी का कारण पूछा गया, तो वह कोई संतोषजनक उत्तर नहीं दे सके। डीएम ने उनके गैर-जिम्मेदाराना रवैये पर नाराजगी जताते हुए उनकी परिनिंदा जारी की है।
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मुजेहना के ग्राम रेतवागाड़ा निवासी रिमझिम के पति स्व. श्रवण कुमार का निधन 26 मार्च 2024 को हो गया था। पति की मृत्यु के बाद उन्होंने कई बार पंचायत सचिव विनय कुमार भारती से मृत्यु प्रमाणपत्र और परिवार रजिस्टर की नकल के लिए अनुरोध किया, लेकिन हर बार उन्हें टालमटोल कर वापस भेज दिया गया। पंचायत सचिव की लापरवाही का आलम यह था कि विकासखंड स्तर से भी मामले में भ्रामक रिपोर्ट भेजकर शिकायत को झूठा साबित करने की कोशिश की गई।
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सोमवार को उन्होंने जिलाधिकारी के जनता दर्शन में अपनी शिकायत दर्ज कराई। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी ने तत्काल जांच के आदेश दिए। मुख्य राजस्व अधिकारी की जांच में पाया गया कि विकासखंड स्तर से भेजी गई रिपोर्ट तथ्यहीन और झूठी थी। डीएम ने उसी दिन सुनवाई कर मामले का निस्तारण किया। सुनवाई के दौरान खंड विकास अधिकारी ने स्वीकार किया कि पंचायत सचिव की लापरवाही के कारण पीड़िता को 11 महीने तक परेशान होना पड़ा। सुनवाई के तुरंत बाद पीड़िता को परिवार रजिस्टर की नकल उपलब्ध कराई गई और उसी दिन शाम तक मृत्यु प्रमाणपत्र भी सौंपा गया।
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जब पंचायत सचिव विनय कुमार भारती से देरी का कारण पूछा गया, तो वह कोई संतोषजनक उत्तर नहीं दे सके। डीएम ने उनके गैर-जिम्मेदाराना रवैये पर नाराजगी जताते हुए उनकी परिनिंदा जारी की है।