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Gonda News: प्रधान का जाति प्रमाण पत्र निरस्त, अब प्रधान पद से भी हटेेंगे
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ोटो-16-गोंडा में वंदना गुप्ता। -संवाद
- फोटो : GONDA
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गोंडा। पंडरीकृपाल के निगवाबोध के प्रधान योगेश कुमार का जाति प्रमाण पत्र डीएम की अध्यक्षता में गठित कमेटी ने निरस्त कर दिया है। अब प्रधान को पद प्रधान पद से भी हटना पड़ेगा। जाति प्रमाण पत्र के मामलों की जांच शुरू हुई है।
सदर तहसील के निगवाबोध पंचायत में अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र बनवाकर योगेश कुमार प्रधान चुने गए थे। बीते दिनों शिकायत के बाद डीएम की अध्यक्षता में गठित कमेटी ने जांच किया। जांच में प्रधान योगेश कुमार स्पष्ट नहीं कर सके कि वह किस जाति के हैं। अभिलेखों के साक्ष्य में पूर्व प्रधान राम नेवास तिवारी के परिवार में दर्ज पाए गए थे।
राशन कार्ड भी पूर्व प्रधान के परिवार में ही एक साथ बना था। बाद में राशन कार्ड को निरस्त कराकर अलग राशन कार्ड बनाया गया है। जबकि मनरेगा से बना जॉब कार्ड में भी सामान्य वर्ग ही दर्ज है। जांच के बाद डीएम ने योगेश कुमार का जाति प्रमाण पत्र निरस्त कर दिया है। अब जाति प्रमाण पत्र निरस्त होने के बाद प्रधान पद से भी हटना तय हो गया है।
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भाजपा नेत्री ने जारी कराया था जाति प्रमाण पत्र
नगर पालिका परिषद के पटेल नगर की सभासद और भाजपा महिला मोर्चा की क्षेत्रीय मंत्री वंदना गुप्ता गलत ढंग से जाति प्रमाण पत्र जारी कराने में फंस गईं हैं। उनका पिछड़े वर्ग का जाति प्रमाण पत्र चार माह पहले जारी हुआ था। कसौंधन जाति दिखाकर प्रमाण पत्र दिया गया था, जिसे निरस्त कर दिया गया है। गोंडा गिर्द के लेखपाल संतोष श्रीवास्तव ने पहले तो कसौंधन जाति के प्रमाण पत्र जारी करने की संस्तुति की। मामले ने तूल पकड़ा तो उन्होंने तहसीलदार को रिपोर्ट भेजी कि उनसे साक्ष्य छुपाकर वंदना गुप्ता ने रिपोर्ट लगवाई थी। इसके बाद तहसीलदार परशुराम ने सभासद वंदना गुप्ता का जाति प्रमाण पत्र निरस्त कर दिया।
एनआईसी के प्रभारी गिरजेश कुमार ने बताया कि तहसीलदार के आदेश पर ऑनलाइन डेटा निरस्त करने की संस्तुति की गई है। विभाग के पोर्टल से वंदना गुप्ता का जाति प्रमाण पत्र हटा दिया गया है। भाजपा नेत्री वंदना गुप्ता ने कहा कि उनका जाति प्रमाण पत्र गलत ढंग से निरस्त किया गया है। उन्होने पर्याप्त साक्ष्य प्रस्तुत कर पिछड़े वर्ग का जाति प्रमाण पत्र बनाने का आवेदन किया था। डीएम से मांग किया है कि उनका जाति प्रमाण पत्र निरस्त न किया जाए।
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सदर तहसील के निगवाबोध पंचायत में अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र बनवाकर योगेश कुमार प्रधान चुने गए थे। बीते दिनों शिकायत के बाद डीएम की अध्यक्षता में गठित कमेटी ने जांच किया। जांच में प्रधान योगेश कुमार स्पष्ट नहीं कर सके कि वह किस जाति के हैं। अभिलेखों के साक्ष्य में पूर्व प्रधान राम नेवास तिवारी के परिवार में दर्ज पाए गए थे।
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राशन कार्ड भी पूर्व प्रधान के परिवार में ही एक साथ बना था। बाद में राशन कार्ड को निरस्त कराकर अलग राशन कार्ड बनाया गया है। जबकि मनरेगा से बना जॉब कार्ड में भी सामान्य वर्ग ही दर्ज है। जांच के बाद डीएम ने योगेश कुमार का जाति प्रमाण पत्र निरस्त कर दिया है। अब जाति प्रमाण पत्र निरस्त होने के बाद प्रधान पद से भी हटना तय हो गया है।
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भाजपा नेत्री ने जारी कराया था जाति प्रमाण पत्र
नगर पालिका परिषद के पटेल नगर की सभासद और भाजपा महिला मोर्चा की क्षेत्रीय मंत्री वंदना गुप्ता गलत ढंग से जाति प्रमाण पत्र जारी कराने में फंस गईं हैं। उनका पिछड़े वर्ग का जाति प्रमाण पत्र चार माह पहले जारी हुआ था। कसौंधन जाति दिखाकर प्रमाण पत्र दिया गया था, जिसे निरस्त कर दिया गया है। गोंडा गिर्द के लेखपाल संतोष श्रीवास्तव ने पहले तो कसौंधन जाति के प्रमाण पत्र जारी करने की संस्तुति की। मामले ने तूल पकड़ा तो उन्होंने तहसीलदार को रिपोर्ट भेजी कि उनसे साक्ष्य छुपाकर वंदना गुप्ता ने रिपोर्ट लगवाई थी। इसके बाद तहसीलदार परशुराम ने सभासद वंदना गुप्ता का जाति प्रमाण पत्र निरस्त कर दिया।
एनआईसी के प्रभारी गिरजेश कुमार ने बताया कि तहसीलदार के आदेश पर ऑनलाइन डेटा निरस्त करने की संस्तुति की गई है। विभाग के पोर्टल से वंदना गुप्ता का जाति प्रमाण पत्र हटा दिया गया है। भाजपा नेत्री वंदना गुप्ता ने कहा कि उनका जाति प्रमाण पत्र गलत ढंग से निरस्त किया गया है। उन्होने पर्याप्त साक्ष्य प्रस्तुत कर पिछड़े वर्ग का जाति प्रमाण पत्र बनाने का आवेदन किया था। डीएम से मांग किया है कि उनका जाति प्रमाण पत्र निरस्त न किया जाए।