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आपदा में अवसर, डेंगू टेस्ट के नाम पर वसूली
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गोंडा में जिला अस्पताल के डेंगू वार्ड में भर्ती मरीज। -संवाद
- फोटो : GONDA
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गोंडा। डेंगू के बढ़ते मामलों के साथ ही इसकी जांच के नाम पर निजी पैथालॉजी संचालक अपनी तिजोरी भरने में जुट गए हैं। जिम्मेदारों की उदासीनता से डेंगू की जांच के एवज में मरीजों से 1500 से 2000 रुपये तक की राशि वसूली जा रही है। मरीजों की जेब में डाका डालने के साथ ही निजी संचालक न्यूनतम छह घंटे में तैयार होने वाली एलाइजा रिपोर्ट भी मात्र दो घंटे में तैयार कर दे रहे हैं। डेंगू की जांच के साथ ही प्लेटलेट्स की जांच के नाम पर भी पूरी तरह मनमानी हो रही है। दूसरी तरफ इसकी रोकथाम के लिए जिम्मेदार स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी निजी पैथालॉजी संचालकों की मनमानी को रोकने में पूरी तरह उदासीन बने हैं। बता दें कि सामान्य तौर पर एलाइजा की जांच एक हजार से 12 सौ व प्लेटलेट्स के लिए सौ रुपये है।
बदलते मौसम के मच्छर जनित वायरल बुखार, मलेरिया व डेंगू के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। बुखार आशंकित मरीज बड़ी संख्या में डेंगू के डर से सरकारी व निजी पैथालॉजी में खून की जांच कराने पहुंच रहे हैं। सरकारी अस्पतालों की पैथालॉजी में जांच के लिए जुटी भीड़ का फायदा अब निजी पैथालॉजी सेंटर संचालक डेंगू की जांच के नाम पर मनमानी वसूली कर उठा रहे हैं। एक ही प्रकार की जांच के एवज में संचालक अलग-अलग शुल्क राशि वसूल रहे हैं। जिला अस्पताल के सामने संचालित एक निजी पैथालॉजी सेंटर पर डेंगू की पुष्टि के लिए एलाइजा की जांच के एवज में जहां 1500 रुपया फीस ली जा रही है तो वही बगल में ही संचालित दूसरे जांच केंद्र पर इसी जांच के लिए 1800 से 2000 हजार रुपया तक वसूला जा रहा है। ज्यादा पैसा देने वाले मरीजों को यह संचालक मात्र दो घंटे में ही एलाइजा की जांच रिपोर्ट भी सौंप देने का भरोसा दिलाते हैं। जबकि चिकित्सकों की माने तो एलाइजा जांच से डेंगू की पुष्टि में न्यूनतम 6 घंटे का समय लगता है। इसके साथ ही प्लेटलेट्स का स्तर जांचने के लिए भी पांच सौ रुपया फीस ली जा रही है।
एलाइजा जांच के नाम पर कर रहे गुमराह
डेंगू की प्रमाणिक जांच के लिए डॉक्टरों की ओर से एलाइजा (एंजाइम लिंक्ड इम्यूनो सारवेंट एस्से) जांच कराने की सलाह दी जाती है। जिला अस्पताल में यह जांच निशुल्क है। जिला अस्पताल में तैनात फिजिशियन डॉ. शोएब इकबाल ने बताया कि एलाइजा जांच में खून का नमूना लेकर इसका परीक्षण एक विशेष तरह की मशीन से किया जाता है।
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मशीन की रीडिंग की गणतीय फार्मूले से गणना कर डेंगू की पुष्टि की जाती है। इसके लिए एनएस-1,आईजीएम और आईजीजी तीन प्रकार की जांचें की जाती हैं, इस पूरी प्रकिया में करीब पांच से छह घंटे लगते हैं, जबकि निजी पैथालॉजी संचालक दो घंटों में ही एलाइजा की जांच रिपोर्ट मरीज को देने की बात कह रहे हैं।
80 हजार तक प्लेटलेट्स होने पर घबराए नहीं मरीज
- सामान्य तौर पर किसी भी तरह के बुखार में प्लेटलेट्स कम होने लगती हैं। इस लिए सिर्फ प्लेटलेट्स कम होने को ही डेंगू का लक्षण मानकर घबराना नहीं चाहिए। डॉ. अखिलेश त्रिपाठी ने बताया कि सिर्फ डेंगू के मरीजों में ही नहीं बल्कि टायफाइड, वायरल सहित अन्य बीमारियों में भी प्लेटलेट्स घटती है। प्लेटलेट्स का स्तर गिरकर 80 हजार तक आ जाने पर खून या प्लेटलेट्स चढ़ाने की जरूरत नहीं होती। पपीता, कीवी फल आदि खाने से प्लेटलेट्स की कमी को तेजी से पूरा किया जा सकता है। इस लिए सिर्फ प्लेटलेट्स कम होने पर ही एलाइजा जांच नहीं करानी चाहिए।
ब्लड बैंक में उपलब्ध है प्लेटलेट्स
जिला अस्पताल में सभी ब्लड ग्रुपों का प्लेटलेट्स निशुल्क उपलब्ध है। ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. चेतन पारासर ने बताया कि उनके पास 24 यूनिट प्लेटलेट्स रखने की क्षमता है, हर समय लगभग सभी ब्लड ग्रुपों के प्लेटलेट्स उपलब्ध होते हैं। बताया कि कोई भी व्यक्ति एक यूनिट खून देकर प्लेटलेट्स ले सकता है। पिछले सप्ताह प्लेटलेट्स की मांग अधिक थी लेकिन तीन-चार दिनों से इसमें कुछ कमी आने लगी हैं।
निजी पैथालॉजी में रेट निर्धारित करने के लिए शासन की ओर से कोई नियम नहीं है। डेंगू की एलाइजा जांच में चार से पांच घंटे लग जाते हैं, दो घंटे में रिपोर्ट देने की बात गंभीर है। शिकायत मिलने पर जांच करवाकर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. एपी सिंह, एसीएमओ
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बदलते मौसम के मच्छर जनित वायरल बुखार, मलेरिया व डेंगू के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। बुखार आशंकित मरीज बड़ी संख्या में डेंगू के डर से सरकारी व निजी पैथालॉजी में खून की जांच कराने पहुंच रहे हैं। सरकारी अस्पतालों की पैथालॉजी में जांच के लिए जुटी भीड़ का फायदा अब निजी पैथालॉजी सेंटर संचालक डेंगू की जांच के नाम पर मनमानी वसूली कर उठा रहे हैं। एक ही प्रकार की जांच के एवज में संचालक अलग-अलग शुल्क राशि वसूल रहे हैं। जिला अस्पताल के सामने संचालित एक निजी पैथालॉजी सेंटर पर डेंगू की पुष्टि के लिए एलाइजा की जांच के एवज में जहां 1500 रुपया फीस ली जा रही है तो वही बगल में ही संचालित दूसरे जांच केंद्र पर इसी जांच के लिए 1800 से 2000 हजार रुपया तक वसूला जा रहा है। ज्यादा पैसा देने वाले मरीजों को यह संचालक मात्र दो घंटे में ही एलाइजा की जांच रिपोर्ट भी सौंप देने का भरोसा दिलाते हैं। जबकि चिकित्सकों की माने तो एलाइजा जांच से डेंगू की पुष्टि में न्यूनतम 6 घंटे का समय लगता है। इसके साथ ही प्लेटलेट्स का स्तर जांचने के लिए भी पांच सौ रुपया फीस ली जा रही है।
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एलाइजा जांच के नाम पर कर रहे गुमराह
डेंगू की प्रमाणिक जांच के लिए डॉक्टरों की ओर से एलाइजा (एंजाइम लिंक्ड इम्यूनो सारवेंट एस्से) जांच कराने की सलाह दी जाती है। जिला अस्पताल में यह जांच निशुल्क है। जिला अस्पताल में तैनात फिजिशियन डॉ. शोएब इकबाल ने बताया कि एलाइजा जांच में खून का नमूना लेकर इसका परीक्षण एक विशेष तरह की मशीन से किया जाता है।
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मशीन की रीडिंग की गणतीय फार्मूले से गणना कर डेंगू की पुष्टि की जाती है। इसके लिए एनएस-1,आईजीएम और आईजीजी तीन प्रकार की जांचें की जाती हैं, इस पूरी प्रकिया में करीब पांच से छह घंटे लगते हैं, जबकि निजी पैथालॉजी संचालक दो घंटों में ही एलाइजा की जांच रिपोर्ट मरीज को देने की बात कह रहे हैं।
80 हजार तक प्लेटलेट्स होने पर घबराए नहीं मरीज
- सामान्य तौर पर किसी भी तरह के बुखार में प्लेटलेट्स कम होने लगती हैं। इस लिए सिर्फ प्लेटलेट्स कम होने को ही डेंगू का लक्षण मानकर घबराना नहीं चाहिए। डॉ. अखिलेश त्रिपाठी ने बताया कि सिर्फ डेंगू के मरीजों में ही नहीं बल्कि टायफाइड, वायरल सहित अन्य बीमारियों में भी प्लेटलेट्स घटती है। प्लेटलेट्स का स्तर गिरकर 80 हजार तक आ जाने पर खून या प्लेटलेट्स चढ़ाने की जरूरत नहीं होती। पपीता, कीवी फल आदि खाने से प्लेटलेट्स की कमी को तेजी से पूरा किया जा सकता है। इस लिए सिर्फ प्लेटलेट्स कम होने पर ही एलाइजा जांच नहीं करानी चाहिए।
ब्लड बैंक में उपलब्ध है प्लेटलेट्स
जिला अस्पताल में सभी ब्लड ग्रुपों का प्लेटलेट्स निशुल्क उपलब्ध है। ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. चेतन पारासर ने बताया कि उनके पास 24 यूनिट प्लेटलेट्स रखने की क्षमता है, हर समय लगभग सभी ब्लड ग्रुपों के प्लेटलेट्स उपलब्ध होते हैं। बताया कि कोई भी व्यक्ति एक यूनिट खून देकर प्लेटलेट्स ले सकता है। पिछले सप्ताह प्लेटलेट्स की मांग अधिक थी लेकिन तीन-चार दिनों से इसमें कुछ कमी आने लगी हैं।
निजी पैथालॉजी में रेट निर्धारित करने के लिए शासन की ओर से कोई नियम नहीं है। डेंगू की एलाइजा जांच में चार से पांच घंटे लग जाते हैं, दो घंटे में रिपोर्ट देने की बात गंभीर है। शिकायत मिलने पर जांच करवाकर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. एपी सिंह, एसीएमओ