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Gonda News: 11 परिषदीय विद्यालयों के संचालन की चुनौती
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कटरा बाजार (गोंडा)। शिक्षा को बेहतर बनाने के लिए सरकार ने कई कदम उठाए हैं। जिससे ग्राम पंचायतों में बच्चों को शहरी स्कूलों जैसी व्यवस्था दी जा रही है। मगर नगर पंचायत के विस्तार के बाद अब कटरा बाजार क्षेत्र के 11 विद्यालयों को बेहतर सुविधा के लिए तरसना पड़ेगा।
शिक्षा क्षेत्र कटरा के 11 विद्यालय जोकि ग्राम पंचायतों से संचालित हो रहे थे। नगर पंचायत विस्तार के बाद अब नगर पंचायत से संचालित होंगे। उनकी देखरेख की जिम्मेदारी नगर पंचायत की होगी। बता दें कि नगर पंचायत व नगर पालिका के पास विद्यालयों का कायाकल्प कराने के बजट का अभाव होता है। ऐसे में वीरपुर में स्थित चार प्राथमिक, एक उच्च प्राथमिक, एक कंपोजिट विद्यालय, मझौवा गांव में दो प्राथमिक विद्यालय, चरेरा गांव में एक प्राथमिक, एक उच्च प्राथमिक विद्यालय, बाबूपुर गांव में एक प्राथमिक विद्यालय इन सभी को मिलाकर 11 विद्यालयों का कायाकल्प नगर पंचायत से होना होगा। उनका संचालन व्यवस्थित ढंग से नगर पंचायत को कराना होगा।
शहर जैसी सुविधाएं देने का किया प्रयास
वीरपुर गांव की प्रधान लाजवंती देवी ने बताया कि यहां जो विद्यालय थे, उनकी देखभाल व रखरखाव में कोई कमी नहीं आने दिया जाएगा। शहर जैसी शिक्षा व व्यवस्था देने के लिए सभी प्रयास किया था, लेकिन अब नगर में चला गया। अधिशासी अधिकारी प्रियंका मिश्रा ने बताया कि नगर पंचायत में जितनी निधि मिलती है वह पेंशन और वेतन के लिए ही होती है। जब तक राजस्व नहीं बढ़ेगा, तब तक कोई और कार्य नगर पंचायत से नहीं हो सकता है।
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शिक्षा क्षेत्र कटरा के 11 विद्यालय जोकि ग्राम पंचायतों से संचालित हो रहे थे। नगर पंचायत विस्तार के बाद अब नगर पंचायत से संचालित होंगे। उनकी देखरेख की जिम्मेदारी नगर पंचायत की होगी। बता दें कि नगर पंचायत व नगर पालिका के पास विद्यालयों का कायाकल्प कराने के बजट का अभाव होता है। ऐसे में वीरपुर में स्थित चार प्राथमिक, एक उच्च प्राथमिक, एक कंपोजिट विद्यालय, मझौवा गांव में दो प्राथमिक विद्यालय, चरेरा गांव में एक प्राथमिक, एक उच्च प्राथमिक विद्यालय, बाबूपुर गांव में एक प्राथमिक विद्यालय इन सभी को मिलाकर 11 विद्यालयों का कायाकल्प नगर पंचायत से होना होगा। उनका संचालन व्यवस्थित ढंग से नगर पंचायत को कराना होगा।
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शहर जैसी सुविधाएं देने का किया प्रयास
वीरपुर गांव की प्रधान लाजवंती देवी ने बताया कि यहां जो विद्यालय थे, उनकी देखभाल व रखरखाव में कोई कमी नहीं आने दिया जाएगा। शहर जैसी शिक्षा व व्यवस्था देने के लिए सभी प्रयास किया था, लेकिन अब नगर में चला गया। अधिशासी अधिकारी प्रियंका मिश्रा ने बताया कि नगर पंचायत में जितनी निधि मिलती है वह पेंशन और वेतन के लिए ही होती है। जब तक राजस्व नहीं बढ़ेगा, तब तक कोई और कार्य नगर पंचायत से नहीं हो सकता है।
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