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Gonda News: बिजली बनकर शहर को रोशन करेगा कचरा
Tue, 17 Mar 2026 11:20 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Tue, 17 Mar 2026 11:20 PM IST
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गोंडा। करनैलगंज में सरयू नदी को प्रदूषण से बचाने और घाटों पर कूड़ा निस्तारण की व्यवस्था मजबूत करने के लिए प्रशासन ने नई पहल शुरू की है। जिलाधिकारी प्रियंका निरंजन ने सरयू घाट पर इन-सीटू वेस्ट मैनेजमेंट यूनिट स्थापित कराने की योजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं, ताकि नदी और उसके तट को स्वच्छ रखा जा सके। इससे बिजली उत्पादन के साथ ही किसानों को सस्ते दामों में खाद देने की भी तैयारी चल रही है। हालांकि बिजली व खाद बनाने की अभी आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
करनैलगंज से होकर गुजरने वाली सरयू नदी पर बने पुल से गुजरने वाले लोग अक्सर ऊपर से ही कूड़ा नदी में फेंक देते हैं। घाट पर भी जगह-जगह कचरा जमा होने से गंदगी फैल रही है। हाल ही में डीएम ने सरयू घाट का निरीक्षण किया था, जिसमें यह समस्या सामने आई। इसके बाद पर्यावरण समिति की बैठक में लोक निर्माण विभाग को डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार कर ईओ करनैलगंज को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
क्या है इन-सीटू वेस्ट मैनेजमेंट यूनिट
इन-सीटू वेस्ट मैनेजमेंट यूनिट ऐसी व्यवस्था है, जिसमें कचरे का निस्तारण उसी स्थान पर किया जाता है जहां वह उत्पन्न होता है। इससे कूड़ा ढोने की जरूरत कम होती है और प्रदूषण भी घटता है। इस प्रणाली को विकेंद्रीकृत अपशिष्ट प्रबंधन का हिस्सा माना जाता है। इस कचरे को बिजली बनाने के साथ ही किसानों को सस्ते दामों में खाद के रूप में प्रयोग किया जा सकता है।
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कछुआ संरक्षण के लिए भी अहम है सरयू नदी
करनैलगंज में रेलवे लाइन से लेकर अंत्येष्टि स्थल तक करीब दो किलोमीटर के दायरे में सरयू नदी में कछुओं की नौ दुर्लभ प्रजातियां पाई जाती हैं। इनकी संख्या करीब पांच हजार बताई जाती है। प्रशासन के अनुसार कालीढोर, कटहवा, मोरपंखी, सुंदरी, श्वेतर मांसाहारी, पचेड़ा, भूतकाठा, हल्दीकाठा और कोरी पचेड़ा प्रजाति के कछुए यहां मौजूद हैं। इनमें कालीढोर प्रजाति भारत में केवल सरयू नदी में ही पाई जाती है। टर्टल सर्वाइवल अलायंस इंडिया फाउंडेशन के निदेशक भास्कर मणि दीक्षित ने बताया कि सरयू का यह हिस्सा कछुआ संरक्षण के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है। उन्होंने कहा कि घाटों पर कूड़ा निस्तारण की व्यवस्था होने से नदी स्वच्छ रहेगी और जलीय जीवों का संरक्षण बेहतर ढंग से हो सकेगा।
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करनैलगंज से होकर गुजरने वाली सरयू नदी पर बने पुल से गुजरने वाले लोग अक्सर ऊपर से ही कूड़ा नदी में फेंक देते हैं। घाट पर भी जगह-जगह कचरा जमा होने से गंदगी फैल रही है। हाल ही में डीएम ने सरयू घाट का निरीक्षण किया था, जिसमें यह समस्या सामने आई। इसके बाद पर्यावरण समिति की बैठक में लोक निर्माण विभाग को डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार कर ईओ करनैलगंज को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
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क्या है इन-सीटू वेस्ट मैनेजमेंट यूनिट
इन-सीटू वेस्ट मैनेजमेंट यूनिट ऐसी व्यवस्था है, जिसमें कचरे का निस्तारण उसी स्थान पर किया जाता है जहां वह उत्पन्न होता है। इससे कूड़ा ढोने की जरूरत कम होती है और प्रदूषण भी घटता है। इस प्रणाली को विकेंद्रीकृत अपशिष्ट प्रबंधन का हिस्सा माना जाता है। इस कचरे को बिजली बनाने के साथ ही किसानों को सस्ते दामों में खाद के रूप में प्रयोग किया जा सकता है।
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कछुआ संरक्षण के लिए भी अहम है सरयू नदी
करनैलगंज में रेलवे लाइन से लेकर अंत्येष्टि स्थल तक करीब दो किलोमीटर के दायरे में सरयू नदी में कछुओं की नौ दुर्लभ प्रजातियां पाई जाती हैं। इनकी संख्या करीब पांच हजार बताई जाती है। प्रशासन के अनुसार कालीढोर, कटहवा, मोरपंखी, सुंदरी, श्वेतर मांसाहारी, पचेड़ा, भूतकाठा, हल्दीकाठा और कोरी पचेड़ा प्रजाति के कछुए यहां मौजूद हैं। इनमें कालीढोर प्रजाति भारत में केवल सरयू नदी में ही पाई जाती है। टर्टल सर्वाइवल अलायंस इंडिया फाउंडेशन के निदेशक भास्कर मणि दीक्षित ने बताया कि सरयू का यह हिस्सा कछुआ संरक्षण के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है। उन्होंने कहा कि घाटों पर कूड़ा निस्तारण की व्यवस्था होने से नदी स्वच्छ रहेगी और जलीय जीवों का संरक्षण बेहतर ढंग से हो सकेगा।