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Gonda News: एफएसडीए टीम ने की जांच, चार नमूने जांच को भेजे

Thu, 06 Mar 2025 11:40 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा Updated Thu, 06 Mar 2025 11:40 PM IST
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FSDA team investigated and sent four samples for testing
रानीबाजार में रंगीन कचरी का नमूना लेते मुख्य खाद्य सुरक्षा अ​धिकारी। -स्रोत: विभाग
गोंडा। होली पर मिलावटी खाद्य सामग्री की बिक्री रोकने के लिए खाद्य सुरक्षा विभाग (एफएसडीए) की टीम ने बृहस्पतिवार को कई दुकानों का निरीक्षण किया। इस दौरान टीम ने दुकान संचालकों को साफ सफाई रखने के लिए निर्देशित करते हुए रंगीन कचरी, टॉफी व छेना मिठाई के नमूने लेकर उन्हें लैब जांच के लिए भेजने की कार्रवाई भी की।
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मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी संजय सिंह ने बताया कि टीम ने रानी बाजार में दो दुकानों से रंगीन कचरी के, नूरामल मंदिर के सामने एक दुकान से रंगीन टॉफी तथा तिवारी बाजार से छेना मिठाई का नमूना जांच के लिए लैब भेजा है। आगे की कार्रवाई लैब रिपोर्ट के आधार पर तय होगी। बताया कि इस दौरान दुकान संचालकों के साथ ही ग्राहकों को भी त्योहार मिलावटी सामग्री की खरीद फरोख्त से बचने के लिए जागरूक किया गया। मौजूद उपभोक्ताओं को बताया गया कि मिलावटी सामग्री का संदेह होने पर इसकी सूचना तत्काल खाद्य सुरक्षा विभाग में दर्ज कराए।
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अब तक जांच में 104 नमूने फेल
अप्रैल 2024 से फरवरी 2025 तक जिले में खाद्य सुरक्षा विभाग ने 350 नमूने जन विश्लेषण प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजे हैं, इसमें से 104 के नमूने जांच में फेल हो गए है। इस मामले में न्यायालय में मुकदमा दाखिल कराया गया है। वैसे, होली नजदीक आते ही मुनाफाखोरों की ओर से मिलावट की मंडी एक बार सजा दी गई है। रंगीन कचरी, सस्ता मावा व चिप्स पापड़ से बाजार पटे हुए हैं। लेकिन इन रंग बिरंगे खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। सहायक आयुक्त खाद्य सुरक्षा अजीत मिश्र ने बताया कि बीते एक साल में करीब 350 नमूने लेकर जांच के लिए भेजा गया है। जिसमें 104 की गुणवत्ता फेल मिली है।
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सेहत पर भारी मिलावटी खाद्य सामग्री
मेडिकल कॉलेज के फिजीशियन डॉ. एके त्रिपाठी के अनुसार मिलावटी खाद्य सामग्री का सेवन करने से फूड प्वाइजनिंग की समस्या बढ़ जाती है। इससे गेस्ट्रो डायरिया के साथ ही पेट दर्द व धमनियों में रक्त का थक्का जमने से हार्ट संबंधी परेशानी बढ़ने का खतरा भी कई गुना बढ़ जाता है। कचरी व पापड़ में इस्तेमाल होने वाले सेंथेटिक कलर शरीर में जाकर लिवर व किडनी संबंधी समस्या भी बढ़ा देते हैं।
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