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सेना ने संभाला मोर्चा
अमर उजाला/गोंडा
Updated Tue, 09 Aug 2016 10:55 PM IST
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नाव से जाते बाढ़ पीड़ित
- फोटो : अमर उजाला
एल्गिन-चरसड़ी बांध कटने के बाद करनैलगंज क्षेत्र में बाढ़ का कहर शुरू हो गया है। मंगलवार को घाघरा का पानी आठ ग्राम पंचायतों के करीब 80 मजरों में घुस गया। लगातार बढ़ रहे पानी से प्रशासन ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए प्रयास कर रहा है, वहीं बाढ़ का प्रकोप बढ़ने की आशंका से सेना, एनडीआरएफ व जल पीएसी ने मोर्चा संभाल लिया है।
उधर, मंगलवार को एसडीएम मनकापुर वीके सिंह व करनैलगंज एसडीएम अनिल कुमार मिश्रा के साथ सेना व एनडीआरएफ के जवानों ने ग्राम गौरासिंहपुर, नकहरा, घरकुंइया, प्रतापपुर, रायपुर, भटपुरवा, पाल्हापुर, रेक्सड़िया, नकार, चन्द्रभानपुर, दिवली, शाहपुर, अतरसुइया, गुमदहा का निरीक्षण किया तथा मार्ग का खाका तैयार किया। मंगलवार की शाम तक बाढ़ से करीब 30 हजार की आबादी प्रभावित हुई है। जिनके लिए प्रशासन स्तर पर कोई भी राहत कार्य नहीं कराया गया था।
यहां तक ग्रामीणों को गांव छोड़ने की चेतावनी देने के बाद प्रशासन ने उन्हें सुरक्षित स्थानों पर ले जाने की कोई व्यवस्था नहीं की। मंगलवार को बाढ़ क्षेत्र में आयुक्त सुधीर कुमार दीक्षित, डीएम आशुतोष निरंजन, एडीएम त्रिलोकी सिंह सहित जिले के तमाम आला अधिकारी जमे रहे।
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करनैलगंज क्षेत्र की ग्राम पंचायत काशीपुर, घरकुंइया, नकहरा, प्रतापपुर, रायपुर, गुमदहा, बैद्यपुरवा, अतरसुइया के पांच दर्जन मजरे अब तक बाढ़ से प्रभावित हुए हैं, जहां लगातार पानी बढ़ रहा है। पानी आसपास के गांवों को भी अपनी चपेट में तेजी से ले रहा है।
डीएम ने बांध कटने की मजिस्ट्रेटी जांच के आदेश दे दिए हैं। साथ ही लापरवाही बरतने के कारण सिंचाई विभाग व बाढ़ खंड के अधिकारियों के खिलाफ शासन को रिपोर्ट भेज दी है। स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है। किसी भी प्रकार की जन-धन हानि नहीं हुई है। इस समय घाघरा में कुल दो लाख सैंतालीस हजार क्यूसेक पानी का डिस्चार्ज हो रहा है।
एल्गिन चरसडी बांध कटने के कारण करनैलगंज तहसील की पांच ग्राम पंचायतें प्रभावित हुई हैं, जिनमे गौरा सिंघनापुर, नकहरा, काशीपुर, घरकुइयां एवं प्रतापपुर शामिल हैं। नदी में पानी का डिस्चार्ज बढ़ने के कारण नकार, अतरसूइया, चंदहरीया, नैनूआ, जगन्नाथपुर व वैदपुर सहित पांच और गांवों में पानी घुसने की आशंका बढ़ गई है।
मंगलवार को राहत कार्य में बाढ़ प्रभावित 70 परिवारों को नि:शुल्क तिरपाल, लंच पैकेट, लइया-चना, मोमबत्ती, माचिस, दवाइयां वितरित कर दी गई हैं। डीएम आशुतोष निरंजन ने बाढ़ प्रभावित लोगों से अपील की है कि वे सब बाढ़ शरणालयों में चले जाएं। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए एनडीआरएफ , पीएसी की टीम सहित सेना भी मुस्तैद कर दी गई है।
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उधर, मंगलवार को एसडीएम मनकापुर वीके सिंह व करनैलगंज एसडीएम अनिल कुमार मिश्रा के साथ सेना व एनडीआरएफ के जवानों ने ग्राम गौरासिंहपुर, नकहरा, घरकुंइया, प्रतापपुर, रायपुर, भटपुरवा, पाल्हापुर, रेक्सड़िया, नकार, चन्द्रभानपुर, दिवली, शाहपुर, अतरसुइया, गुमदहा का निरीक्षण किया तथा मार्ग का खाका तैयार किया। मंगलवार की शाम तक बाढ़ से करीब 30 हजार की आबादी प्रभावित हुई है। जिनके लिए प्रशासन स्तर पर कोई भी राहत कार्य नहीं कराया गया था।
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यहां तक ग्रामीणों को गांव छोड़ने की चेतावनी देने के बाद प्रशासन ने उन्हें सुरक्षित स्थानों पर ले जाने की कोई व्यवस्था नहीं की। मंगलवार को बाढ़ क्षेत्र में आयुक्त सुधीर कुमार दीक्षित, डीएम आशुतोष निरंजन, एडीएम त्रिलोकी सिंह सहित जिले के तमाम आला अधिकारी जमे रहे।
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करनैलगंज क्षेत्र की ग्राम पंचायत काशीपुर, घरकुंइया, नकहरा, प्रतापपुर, रायपुर, गुमदहा, बैद्यपुरवा, अतरसुइया के पांच दर्जन मजरे अब तक बाढ़ से प्रभावित हुए हैं, जहां लगातार पानी बढ़ रहा है। पानी आसपास के गांवों को भी अपनी चपेट में तेजी से ले रहा है।
डीएम ने बांध कटने की मजिस्ट्रेटी जांच के आदेश दे दिए हैं। साथ ही लापरवाही बरतने के कारण सिंचाई विभाग व बाढ़ खंड के अधिकारियों के खिलाफ शासन को रिपोर्ट भेज दी है। स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है। किसी भी प्रकार की जन-धन हानि नहीं हुई है। इस समय घाघरा में कुल दो लाख सैंतालीस हजार क्यूसेक पानी का डिस्चार्ज हो रहा है।
एल्गिन चरसडी बांध कटने के कारण करनैलगंज तहसील की पांच ग्राम पंचायतें प्रभावित हुई हैं, जिनमे गौरा सिंघनापुर, नकहरा, काशीपुर, घरकुइयां एवं प्रतापपुर शामिल हैं। नदी में पानी का डिस्चार्ज बढ़ने के कारण नकार, अतरसूइया, चंदहरीया, नैनूआ, जगन्नाथपुर व वैदपुर सहित पांच और गांवों में पानी घुसने की आशंका बढ़ गई है।
मंगलवार को राहत कार्य में बाढ़ प्रभावित 70 परिवारों को नि:शुल्क तिरपाल, लंच पैकेट, लइया-चना, मोमबत्ती, माचिस, दवाइयां वितरित कर दी गई हैं। डीएम आशुतोष निरंजन ने बाढ़ प्रभावित लोगों से अपील की है कि वे सब बाढ़ शरणालयों में चले जाएं। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए एनडीआरएफ , पीएसी की टीम सहित सेना भी मुस्तैद कर दी गई है।