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डॉक्टरों के जान का दुश्मन बन फार्राटा भर रहीं 25 अनफिट गाड़ियां
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फोटो-2 गोंडा के स्वास्थ्य विभाग में संचालित हो रही बिना इंश्योरेंस व फिटनेस के प्राइवेट स्कार्पि?
- फोटो : GONDA
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गोंडा। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत सीएचसी पर आवंटित 25 अनफिट गाड़ियां डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों के जान का दुश्मन बन फर्राटे भर रही हैं। सीएमओ कार्यालय के लिपिकों व ठेकेदारों की मिलीभगत से हर माह साढ़े छह लाख रुपये डाकरने का खेल खुला तो जिम्मेदारों के हाथ पांव कांपने लगें। गाड़ियों की व्यवस्था तो कर डाली, लेकिन उनमें से अधिकांश अनफिट निकली। रातोरात विभाग को सौंपी गई गाड़ियों में 25 गाड़ियों का न तो इंश्योरेंस है न फिटनेस। पांच प्राइवेट गाड़ियां ऐसी हैं जिनको भी टैक्सी बताकर आवंटित कर दिया गया। ऐसे में अनफिट गाड़ियों से चलना डॉक्टरों के लिए खतरे से खाली नहीं है।
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत जिले के 16 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर 32 गाड़ियों का आवंटन किया गया है। जिसमें 20 गाड़ियां विभागीय मिलीभगत के चलते सिर्फ कागजों में दौड़ रही थी, तथा उसका 6.5 लाख रुपये का बंदरबांट कर लिया जाता था। 24 मार्च के अंक में अमर उजाला ने कागजों पर दौड़ रही 20 गाड़ियां, हर माह 6.5 लाख की चपत की खबर छपने से घोटालेबाजों की नींद हराम हो गई। आनन-फानन में गाड़ियों की उपलब्धता करने में जुट गए, लेकिन फिटनेस व इंश्योरेंस चेक करना भूल गए। पांच प्राइवेट गाड़ियां भी रातोरात टैक्सी बनाकर विभाग को सौंप दिया गया। इन गाड़ियों से निरीक्षण व अन्य कार्यक्रमों में जाने वाले डॉक्टरों व स्वास्थ्यकर्मियों को जान का खतरा बना रहता है।
आरबीएसके में लगी ये गाड़ियां मिली अनफिट
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत डॉक्टरों व स्वास्थ्य कर्मचारियों के लिए आवंटित गाड़ियों में अधिकांश गाड़ियां अनफिट है। जिसमें गाड़ी पंजीकरण संख्या यूपी 32 एमएन 8182 स्कार्पियो का फिटनेस तीन जनवरी 2022 को तथा इंश्योरंस 20 अक्टूबर 2020 को खत्म हो गया। गाड़ी संख्या यूपी 43 एटी 0453 बोलेरो का इंश्योरेंस 11 नवंबर 2021 को खत्म हो गया। गाड़ी पंजीकरण संख्या यूपी 32 एएएन 2890 स्वीफ्ट कार का इंश्यारेंस तीन मार्च को खत्म हो गया। गाड़ी पंजीकरण संख्या यूपी 43 टी 8845 बोलेरो का फिटनेस छह दिसंबर 2019 से नहीं हुआ। गाड़ी संख्या यूपी 43 एटी 2673 बोलेरो का इंश्योरेंस 18 फरवरी 2022 तक ही रहा। ऐसे ही 25 गाड़ियों का या तो इंश्योरेंस नहीं है या फिटनेस या परमिट नहीं है।
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टैक्सी बताकर लगा दी प्राइवेट गाड़ी
आरबीएसके के तहत गाड़ियों के संचालन का ठेका विभागीय बाबुओं की मिलीभगत से एक फर्म को दिया गया है। जिसमें खेल कर लाखों रुपये का बंदरबांट किया जाता। विभाग के लोग आवंटित गाड़ियों का डिटेल देने से कतरा रहे हैं। कारण इनमें अधिकांश गाड़ियां प्राइवेट तथा अनफिट हैं। टैक्सी बताकर विभाग में ज्यादातर प्राइवेट गाड़ियों का संचालन किया जा रहा है। इसके जरिए विभाग को लाखों रुपये का चूना लगाया गया। सूत्रों ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग ने सीएचसी पर पांच गाड़ियां टैक्सी बताकर प्राइवेट लगाया गया है। गाड़ियों की पड़ताल करने पर गाड़ी पंजीकरण संख्या यूपी 32 एमएन 8182 स्कार्पियो प्राइवेट गाड़ी में दर्ज मिली। यहीं नहीं इसका न तो इंश्योरेंस है न ही फिटनेस। ऐसी ही चार और गाड़ियां चल रही हैं जो टैक्सी बताकर प्राइवेट गाड़ी आवंटित कर दी गई है।
ये है शासन का मानक, हो रही अनदेखी
-राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत सिर्फ टैक्सी गाड़ी आवंटित की जाएगी इंश्योरेंस, फिटनेस व प्रदूषण दुरुस्त हो।
-राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत जितनी भी गाड़ियां चलेंगी, सभी में जीपीएस सिस्टम होना चाहिए।
-गाड़ियां कब, कितनी दूर चलीं, कौन सी टीम गई, इसका रोजाना का रिकार्ड रखा जाएगा।
-कोई भी गाड़ी 2 साल से अधिक पुरानी नहीं होगी। साथ ही गाड़ियां कंडम हालत में न हों, इसका ध्यान रखा जाएगा।
-ठेकेदार किराये पर गाड़ी लेकर एनएचएम में नहीं देगा, बल्कि करीब 75 फीसदी गाड़ियां उसकी होनी चाहिए।
सभी गाड़ियों का टेंडर टैक्सी परमिट पर ही होता है, जिसमें विभाग के मानक को पूरा करने वाली गाड़ियां ही लगाई जाती है। कोई गाड़ी खराब हो जाती है तो ठेकेदार दूसरी गाड़ियां भेज देता है, लेकिन मामले की जांच कराकर कार्यवाई की जाएगी। डॉ. एपी सिंह, एसीएमओ
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राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत जिले के 16 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर 32 गाड़ियों का आवंटन किया गया है। जिसमें 20 गाड़ियां विभागीय मिलीभगत के चलते सिर्फ कागजों में दौड़ रही थी, तथा उसका 6.5 लाख रुपये का बंदरबांट कर लिया जाता था। 24 मार्च के अंक में अमर उजाला ने कागजों पर दौड़ रही 20 गाड़ियां, हर माह 6.5 लाख की चपत की खबर छपने से घोटालेबाजों की नींद हराम हो गई। आनन-फानन में गाड़ियों की उपलब्धता करने में जुट गए, लेकिन फिटनेस व इंश्योरेंस चेक करना भूल गए। पांच प्राइवेट गाड़ियां भी रातोरात टैक्सी बनाकर विभाग को सौंप दिया गया। इन गाड़ियों से निरीक्षण व अन्य कार्यक्रमों में जाने वाले डॉक्टरों व स्वास्थ्यकर्मियों को जान का खतरा बना रहता है।
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आरबीएसके में लगी ये गाड़ियां मिली अनफिट
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत डॉक्टरों व स्वास्थ्य कर्मचारियों के लिए आवंटित गाड़ियों में अधिकांश गाड़ियां अनफिट है। जिसमें गाड़ी पंजीकरण संख्या यूपी 32 एमएन 8182 स्कार्पियो का फिटनेस तीन जनवरी 2022 को तथा इंश्योरंस 20 अक्टूबर 2020 को खत्म हो गया। गाड़ी संख्या यूपी 43 एटी 0453 बोलेरो का इंश्योरेंस 11 नवंबर 2021 को खत्म हो गया। गाड़ी पंजीकरण संख्या यूपी 32 एएएन 2890 स्वीफ्ट कार का इंश्यारेंस तीन मार्च को खत्म हो गया। गाड़ी पंजीकरण संख्या यूपी 43 टी 8845 बोलेरो का फिटनेस छह दिसंबर 2019 से नहीं हुआ। गाड़ी संख्या यूपी 43 एटी 2673 बोलेरो का इंश्योरेंस 18 फरवरी 2022 तक ही रहा। ऐसे ही 25 गाड़ियों का या तो इंश्योरेंस नहीं है या फिटनेस या परमिट नहीं है।
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टैक्सी बताकर लगा दी प्राइवेट गाड़ी
आरबीएसके के तहत गाड़ियों के संचालन का ठेका विभागीय बाबुओं की मिलीभगत से एक फर्म को दिया गया है। जिसमें खेल कर लाखों रुपये का बंदरबांट किया जाता। विभाग के लोग आवंटित गाड़ियों का डिटेल देने से कतरा रहे हैं। कारण इनमें अधिकांश गाड़ियां प्राइवेट तथा अनफिट हैं। टैक्सी बताकर विभाग में ज्यादातर प्राइवेट गाड़ियों का संचालन किया जा रहा है। इसके जरिए विभाग को लाखों रुपये का चूना लगाया गया। सूत्रों ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग ने सीएचसी पर पांच गाड़ियां टैक्सी बताकर प्राइवेट लगाया गया है। गाड़ियों की पड़ताल करने पर गाड़ी पंजीकरण संख्या यूपी 32 एमएन 8182 स्कार्पियो प्राइवेट गाड़ी में दर्ज मिली। यहीं नहीं इसका न तो इंश्योरेंस है न ही फिटनेस। ऐसी ही चार और गाड़ियां चल रही हैं जो टैक्सी बताकर प्राइवेट गाड़ी आवंटित कर दी गई है।
ये है शासन का मानक, हो रही अनदेखी
-राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत सिर्फ टैक्सी गाड़ी आवंटित की जाएगी इंश्योरेंस, फिटनेस व प्रदूषण दुरुस्त हो।
-राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत जितनी भी गाड़ियां चलेंगी, सभी में जीपीएस सिस्टम होना चाहिए।
-गाड़ियां कब, कितनी दूर चलीं, कौन सी टीम गई, इसका रोजाना का रिकार्ड रखा जाएगा।
-कोई भी गाड़ी 2 साल से अधिक पुरानी नहीं होगी। साथ ही गाड़ियां कंडम हालत में न हों, इसका ध्यान रखा जाएगा।
-ठेकेदार किराये पर गाड़ी लेकर एनएचएम में नहीं देगा, बल्कि करीब 75 फीसदी गाड़ियां उसकी होनी चाहिए।
सभी गाड़ियों का टेंडर टैक्सी परमिट पर ही होता है, जिसमें विभाग के मानक को पूरा करने वाली गाड़ियां ही लगाई जाती है। कोई गाड़ी खराब हो जाती है तो ठेकेदार दूसरी गाड़ियां भेज देता है, लेकिन मामले की जांच कराकर कार्यवाई की जाएगी। डॉ. एपी सिंह, एसीएमओ