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आधारकार्ड से वंचित चार लाख विद्यार्थी
अमर उजाला/गोंडा
Updated Sun, 18 Sep 2016 12:06 AM IST
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आधार कार्ड
- फोटो : demo pic
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परिषदीय विद्यालयों में कैंप लगाकर बच्चों का आधारकार्ड बनाए जाने के बेसिक शिक्षा निदेशालय के फरमान को बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने कूड़े में डाल दिया। इस लापरवाही से जिले के सरकारी व मान्यता प्राप्त विद्यालयों में पढ़ने वाले करीब चार लाख छात्र-छात्राएं आधारकार्ड से वंचित रह गए।
अब जब केंद्र सरकार ने स्कूलों में फर्जी नामांकन को रोकने के लिए छात्रों का शैक्षिक डाटा आधारकार्ड से लिंक कराने की योजना लागू करने का निर्देश दिया है तो बेसिक शिक्षा निदेशालय ने बच्चों के आधारकार्ड को लेकर बीएसए से रिपोर्ट मांगी है। निदेशालय के हरकत में आने के बाद अब बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों को यह आदेश ढूंढे नहीं मिल रहा है।
जिले के परिषदीय, मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों व मदरसों में करीब चार लाख छात्र-छात्राएं पढ़ाई कर रहे हैं। आधारकार्ड की बढ़ती अनिवार्यता को देखते हुए पिछले वर्ष बेसिक शिक्षा निदेशालय ने बीएसए को सभी सरकारी स्कूलों में कैंप लगाकर बच्चों का आधारकार्ड बनाने का निर्देश दिया था।
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जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने इसकी जिम्मेदारी जिला समन्वयक प्रशिक्षण को सौंपी थी, लेकिन डीसी प्रशिक्षण ने इस आदेश को कूड़े में डाल दिया और कैंप लगवाने का निर्देश भूल गए। इस लापरवाही से विद्यालयों में कैंप का आयोजन नहीं हो सका, जिससे जिले के करीब चार लाख छात्र-छात्राएं आधारकार्ड पाने से वंचित रह गए।
उधर, हाल ही में केंद्र सरकार ने सरकारी व मान्यता प्राप्त स्कूलों तथा मदरसों में छात्रों के नामांकन में होने वाले फर्जीवाड़े को रोकने के लिए सभी छात्रों का शैक्षिक रिकार्ड ऑनलाइन किए जाने के लिए चाइल्ड ट्रैकिंग सिस्टम का प्लान तैयार किया है।
इस सिस्टम के अंतर्गत एकीकृत सूचना प्रणाली यू डायस पर इन बच्चों के समस्त शैक्षिक रिकॉर्डों की फीडिंग कर उन्हें आधारकार्ड से लिंकअप कराया जाना है। यह सारी कार्रवाई 30 सितंबर तक पूरी की जानी है।
इस कार्यक्रम के आने के बाद सर्व शिक्षा अभियान के राज्य परियोजना निदेशक ने जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी से तीन दिन पहले आधारकार्ड बनाए जाने की प्रगति रिपोर्ट मांगी तो अब बेसिक शिक्षा विभाग को बच्चों का आधारकार्ड बनाए जाने के इस आदेश की याद आई है, लेकिन अब यह आदेश विभाग में ढूंढे नहीं मिल रहा है। ऐसे में शिक्षा विभाग के अफसरों की लापरवाही का खामियाजा इन चार लाख नौनिहालों को भुगतना पड़ रहा है।
जिले में आधारकार्ड बनाने का ठेका 11 संस्थाओं को मिला हुआ है, लेकिन वर्तमान समय में जिले में कितनी संस्थाएं आधारकार्ड बनाने का काम कर रही हैं, इसकी जानकारी किसी के पास नही है। जिला स्तर पर इन स्ंास्थाओं की मॉनिटरिंग भी नहीं हो पा रही है। ऐसे में इन संस्थाओं का पता लगाकर स्कूलों में कैंप लगवाना भी टेढ़ी खीर साबित हो सकता है।
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अब जब केंद्र सरकार ने स्कूलों में फर्जी नामांकन को रोकने के लिए छात्रों का शैक्षिक डाटा आधारकार्ड से लिंक कराने की योजना लागू करने का निर्देश दिया है तो बेसिक शिक्षा निदेशालय ने बच्चों के आधारकार्ड को लेकर बीएसए से रिपोर्ट मांगी है। निदेशालय के हरकत में आने के बाद अब बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों को यह आदेश ढूंढे नहीं मिल रहा है।
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जिले के परिषदीय, मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों व मदरसों में करीब चार लाख छात्र-छात्राएं पढ़ाई कर रहे हैं। आधारकार्ड की बढ़ती अनिवार्यता को देखते हुए पिछले वर्ष बेसिक शिक्षा निदेशालय ने बीएसए को सभी सरकारी स्कूलों में कैंप लगाकर बच्चों का आधारकार्ड बनाने का निर्देश दिया था।
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जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने इसकी जिम्मेदारी जिला समन्वयक प्रशिक्षण को सौंपी थी, लेकिन डीसी प्रशिक्षण ने इस आदेश को कूड़े में डाल दिया और कैंप लगवाने का निर्देश भूल गए। इस लापरवाही से विद्यालयों में कैंप का आयोजन नहीं हो सका, जिससे जिले के करीब चार लाख छात्र-छात्राएं आधारकार्ड पाने से वंचित रह गए।
उधर, हाल ही में केंद्र सरकार ने सरकारी व मान्यता प्राप्त स्कूलों तथा मदरसों में छात्रों के नामांकन में होने वाले फर्जीवाड़े को रोकने के लिए सभी छात्रों का शैक्षिक रिकार्ड ऑनलाइन किए जाने के लिए चाइल्ड ट्रैकिंग सिस्टम का प्लान तैयार किया है।
इस सिस्टम के अंतर्गत एकीकृत सूचना प्रणाली यू डायस पर इन बच्चों के समस्त शैक्षिक रिकॉर्डों की फीडिंग कर उन्हें आधारकार्ड से लिंकअप कराया जाना है। यह सारी कार्रवाई 30 सितंबर तक पूरी की जानी है।
इस कार्यक्रम के आने के बाद सर्व शिक्षा अभियान के राज्य परियोजना निदेशक ने जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी से तीन दिन पहले आधारकार्ड बनाए जाने की प्रगति रिपोर्ट मांगी तो अब बेसिक शिक्षा विभाग को बच्चों का आधारकार्ड बनाए जाने के इस आदेश की याद आई है, लेकिन अब यह आदेश विभाग में ढूंढे नहीं मिल रहा है। ऐसे में शिक्षा विभाग के अफसरों की लापरवाही का खामियाजा इन चार लाख नौनिहालों को भुगतना पड़ रहा है।
जिले में आधारकार्ड बनाने का ठेका 11 संस्थाओं को मिला हुआ है, लेकिन वर्तमान समय में जिले में कितनी संस्थाएं आधारकार्ड बनाने का काम कर रही हैं, इसकी जानकारी किसी के पास नही है। जिला स्तर पर इन स्ंास्थाओं की मॉनिटरिंग भी नहीं हो पा रही है। ऐसे में इन संस्थाओं का पता लगाकर स्कूलों में कैंप लगवाना भी टेढ़ी खीर साबित हो सकता है।