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नहाय-खाय के साथ आज से शुरू होगा सूर्य उपासना का महापर्व
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गोंडा में छठ पूजा को लेकर स्टेशन रोड पर टोकरी खरीदती महिला। -संवाद
- फोटो : GONDA
गोंडा। नहाय-खाय के साथ चार दिवसीय सूर्य उपासना का महापर्व छठ शुक्रवार को शुरू हो जाएगा। शनिवार को खरना रहेगा। छठ पूजा पर छठव्रती 30 अक्तूबर की शाम को अस्ताचल सूर्य को अर्घ्य देंगे। अगले दिन 31 अक्तूबर को उगते समय भगवान सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। पर्व को डाला छठ भी कहा जाता है। पूजा की तैयारी में जुटे लोगों ने गुरुवार को पूजा सामग्री की खरीदारी की।
पूर्वांचल से शुरू होते हुए अवध क्षेत्रों में भी हजारों की संख्या में लोग अब छठ पर्व मनाने लगे हैं। शुक्रवार को नहाय-खाय के साथ चार दिवसीय छठ पर्व शुरू हो जाएगा। दिन भर निर्जला व्रत रखने के बाद रात को घर में मिट्टी के बने चूल्हे में लकड़ी जलाकर लौकी और चना की सब्जी तथा देसी घी में पूड़ी बनाकर भोजन किया जाएगा। शनिवार को खरना रहेगा। व्रत रखने वाली महिलाएं पूरे दिन निर्जला व्रत रखकर रात को उसी मिट्टी के चूल्हे पर बने गुड़युक्त चावल की खीर और रोटी खाएंगी। फिर 30 अक्तूबर को महिलाएं पूड़ी, ठेकुआ (मीठा पुआ) बनाएंगी।
उसे एक दौरा (बांस की बनी टोकरी) में फल, मेवा आदि के साथ कपड़े में रखकर शाम होने से पूर्व ही अपने सिर पर रखकर नंगे पांव घाट व पोखरे के पास पूजा करने पहुंचेंगी। भगवान सूर्य के अस्त होते ही दूध से अर्घ्य देकर पुन: अपने-अपने घर वापस आएंगी। छठी मैया का गीत गाएंगी। घर के आंगन में दौरे को गन्ने के बीच में रखकर दीप प्रज्जवलित करेंगी तथा छठी मैया का पूजन करेंगी। फिर देर रात व्रत रखने वाली महिलाएं जमीन पर ही विश्राम करेंगी।
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व्रत के दूसरे दिन 31 अक्तूबर की भोर में ही नंगे पैर हाथ में दीपक लेकर गाजे बाजे के साथ घाट पर पहुंचेंगी और सूर्योदय के समय दूध का अर्घ्य देकर अनुष्ठान का समापन करेंगी। छठ पर्व को लेकर रेलवे ओवरब्रिज के नीचे दुकानें सजाई गईं हैं। शहर के पीएसी लाइन स्थित सरोवर व खैरा भवानी मंदिर पोखरा समेत अन्य छठ घाटों पर साफ-सफाई के साथ प्रकाश की भी व्यवस्था की जा रही है।
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पूर्वांचल से शुरू होते हुए अवध क्षेत्रों में भी हजारों की संख्या में लोग अब छठ पर्व मनाने लगे हैं। शुक्रवार को नहाय-खाय के साथ चार दिवसीय छठ पर्व शुरू हो जाएगा। दिन भर निर्जला व्रत रखने के बाद रात को घर में मिट्टी के बने चूल्हे में लकड़ी जलाकर लौकी और चना की सब्जी तथा देसी घी में पूड़ी बनाकर भोजन किया जाएगा। शनिवार को खरना रहेगा। व्रत रखने वाली महिलाएं पूरे दिन निर्जला व्रत रखकर रात को उसी मिट्टी के चूल्हे पर बने गुड़युक्त चावल की खीर और रोटी खाएंगी। फिर 30 अक्तूबर को महिलाएं पूड़ी, ठेकुआ (मीठा पुआ) बनाएंगी।
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उसे एक दौरा (बांस की बनी टोकरी) में फल, मेवा आदि के साथ कपड़े में रखकर शाम होने से पूर्व ही अपने सिर पर रखकर नंगे पांव घाट व पोखरे के पास पूजा करने पहुंचेंगी। भगवान सूर्य के अस्त होते ही दूध से अर्घ्य देकर पुन: अपने-अपने घर वापस आएंगी। छठी मैया का गीत गाएंगी। घर के आंगन में दौरे को गन्ने के बीच में रखकर दीप प्रज्जवलित करेंगी तथा छठी मैया का पूजन करेंगी। फिर देर रात व्रत रखने वाली महिलाएं जमीन पर ही विश्राम करेंगी।
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व्रत के दूसरे दिन 31 अक्तूबर की भोर में ही नंगे पैर हाथ में दीपक लेकर गाजे बाजे के साथ घाट पर पहुंचेंगी और सूर्योदय के समय दूध का अर्घ्य देकर अनुष्ठान का समापन करेंगी। छठ पर्व को लेकर रेलवे ओवरब्रिज के नीचे दुकानें सजाई गईं हैं। शहर के पीएसी लाइन स्थित सरोवर व खैरा भवानी मंदिर पोखरा समेत अन्य छठ घाटों पर साफ-सफाई के साथ प्रकाश की भी व्यवस्था की जा रही है।