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Gonda News: संवेदनशील देवीपाटन मंडल में विदेशी नौकरी का जाल, सुरक्षा एजेंसियां खामोश

Fri, 27 Feb 2026 11:33 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा Updated Fri, 27 Feb 2026 11:33 PM IST
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Foreign job network in sensitive Devipatan division, security agencies silent
गोंडा। रूस में नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी रैकेट ने नेपाल सीमा से सटे देवीपाटन मंडल में सक्रिय फर्जी प्लेसमेंट नेटवर्क की परतें खोल दी हैं। सीमावर्ती भूगोल, बेरोजगारी और विदेश जाने की चाह, इन तीन कारकों का फायदा उठाकर युवाओं को निशाना बनाया जाता रहा, लेकिन रोकथाम के सवाल पर सुरक्षा व प्रवर्तन एजेंसियां इस बार भी निष्क्रिय ही दिखीं।
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देवीपाटन मंडल के बलरामपुर, श्रावस्ती और बहराइच जिले नेपाल सीमा से जुड़े हैं। खुली सीमा, छोटे कस्बों में तेजी से खुलते ‘इमीग्रेशन काउंसिलिंग’ कार्यालय और सोशल मीडिया विज्ञापनों के जरिए युवाओं को खाड़ी देशों, रूस व यूरोप में नौकरी का झांसा दिया जाता है। हालिया प्रकरण में भी आरोप है कि बिना पर्याप्त वैध अनुमतियों के कार्यालय संचालित कर युवाओं से बड़ी रकम वसूली गई।
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देवीपाटन रेंज के पुलिस महानिरीक्षक अमित पाठक से बात की गई तो उन्होंने कहा कि जिले की पुलिस इसमें कुछ बता सकती है। एएसपी पूर्वी मनोज रावत का कहना है कि टीम काम तो कर रही है, लेकिन बंद कमरे में कोई कहां क्या कर रहा है, यह एक चुनौती है। फिलहाल, पुलिस जांच में जुटी है। हमें जल्द ही सफलता मिलेगी।
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देवीपाटन मंडल क्यों बनता है आसान निशाना?
नेपाल से सटे क्षेत्रों में आवागमन आसान होने से संदिग्धों की आवाजाही और ट्रैकिंग चुनौतीपूर्ण रहती है। सीमावर्ती जिलों में रोजगार के सीमित अवसर युवाओं को विदेश जाने के सपने की ओर धकेलते हैं। छोटे शहरों में खुलने वाले प्लेसमेंट/इमीग्रेशन कार्यालयों की लाइसेंसिंग, वेरिफिकेशन और समय-समय पर ऑडिट की व्यवस्था कमजोर बताई जाती है।

पहले भी उठे सवाल
स्थानीय स्तर पर पहले भी युवाओं से पासपोर्ट, दस्तावेज और लाखों रुपये लेने के आरोप सामने आते रहे हैं। शिकायतें होने के बावजूद कई मामलों में जांच लंबी खिंचती है या पीड़ित समझौते के दबाव में पीछे हट जाते हैं। नतीजतन नेटवर्क का मनोबल बढ़ता है और नए नामों से दफ्तर खुलते रहते हैं।


एजेंसियों की भूमिका पर प्रश्न
विशेषज्ञों का मानना है कि सीमावर्ती मंडल में प्लेसमेंट/इमीग्रेशन गतिविधियों की प्रोएक्टिव मॉनिटरिंग जरूरी है। स्थानीय पुलिस, श्रम/प्रवासन विभाग और खुफिया इकाइयों के बीच बेहतर समन्वय की कमी भी सामने आती रही है।
यह हो ठोस कदम?

-लाइसेंस सत्यापन अभियान :
सभी इमीग्रेशन/कंसल्टेंसी कार्यालयों की अनिवार्य पंजीकरण व सत्यापन।
-जागरूकता अभियान : ग्राम/कस्बा स्तर पर शिविर लगाकर वैध व अवैध एजेंसियों की पहचान बताना।
-डिजिटल अलर्ट सिस्टम:
संदिग्ध ट्रांजेक्शन व सामूहिक नकद वसूली पर बैंक-पुलिस समन्वय।
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