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बाढ़ का खतरा मंडरा, सरयू में समाए दो घर, कई निशाने पर
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गोंडा। बारिश और नदी में पानी छोड़े से जाने सरयू के तेवर तीखे हो गए हैं। तरबगंज तहसील के ऐली परसौली में सरयू नदी से लगातार कटान होने से बांध के किनारे बसे लोगों की बेचैनी बढ़ गई हैं।
सरयू की कटान से दो लोगों का घर नदी में समा गया है। इससे पहले एक स्कूल बह चुका है। नदी गांवों को निशाना बना रही है। ऐली माझा के करीब सौ लोग बाढ़ के दायरे में आ गए हैं।
ग्रामीणों ने गांव से पलायन की तैयारी शुरू कर दी है। इनकी निगाहें नदी की रफ्तार पर टिकी हुई है। माना जा रहा है कि नदी की रफ्तार ऐसे ही रही तो करनैलगंज व तरबगंज के डेढ़ सौ के करीब गांव बाढ़ के चपेट में आ जाएंगे।
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नदी से हो रही कटान की जद में आए लोग सुरक्षित स्थान की ओर पलायन शुरू कर दिए हैं। ऐली विद्यालय में लगे पीपल के पेड़ के चारो ओर घाघरा नदी कटान कर रही हैं। ऐली परसौली के लकड़हन पुरवा के संतबक्श यादव व दीनदयाल का घर नदी के कटान में बह गया।
यहां के ननके का घर पर कटान हो रही हैं। लेखपाल अंकित वर्मा ने बताया कि लकड़हन पुरवा में घर कटने के बाद यह लोग ऐली परसौली के गोड़ियाना में रहने लगे हैं। तीनदिन पहले नदी के कटान से केवटाही के फूल चंद, साहब व गुरु प्रसाद का पक्का मकान बह गया था।
इन लोगों को तिरपाल दी गई हैं। तहसीलदार पैगाम हैदर ने बताया कि लेखपाल के रिपोर्ट के आधार पर बाढ़ पीड़ितों की मदद की जा रही हैं। घरों में कटान होने से लोगों को दूसरे स्थानों पर शरण लेनी पड़ रही है। बिना पानी कम हुए लोग पुराने से स्थान पर घर नहीं बना सकते हैं।
गांवों को बाढ़ से बचाने के लिए तटबंध के मरम्मत का कार्य तो हो रहा है। कई स्थानों पर काम हो भी चुका है। बीते दिनों जिलाधिकारी मार्कंडेय शाही ने निरीक्षण कर निर्माण कार्य को और तेज करने के निर्देश दिए हैं।
नदी के तेवर से लोगों के पसीने छूट रहे हैं। बारिश से कार्य प्रभावित हो रहा है, माना जा रहा है कि इससे काफी नुकसान लोगों को उठाना पड़ सकता है। लोगों के लिए सुरक्षित स्थान भी तैयार नही हो सका है। इससे लोगों के सामने कई तरह की समस्याएं हैं।
तरबगंज के ऐली में कटान होने से अभी तो आधा दर्जन लोग ही प्रभावित हैं। लेकिन जिस रफ्तार से नदी लगातार कटान कर रही है, उसे देखते हुए सौ लोगों के बेघर होने का संकेत मिल रहा है। प्रशासन को इन लोगों को राहत देने के साथ शरण देने की व्यवस्था करनी होगी। बेघर हो रहे लोगों के पास खाने-पीने का भी संकट है। एसडीएम रजेश कुमार ने स्थानीय अधिकारियों को तैयार रहने का निर्देश दिया है। जिससे फौरी तौर पर लोगों की मदद की जा सके।
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सरयू की कटान से दो लोगों का घर नदी में समा गया है। इससे पहले एक स्कूल बह चुका है। नदी गांवों को निशाना बना रही है। ऐली माझा के करीब सौ लोग बाढ़ के दायरे में आ गए हैं।
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ग्रामीणों ने गांव से पलायन की तैयारी शुरू कर दी है। इनकी निगाहें नदी की रफ्तार पर टिकी हुई है। माना जा रहा है कि नदी की रफ्तार ऐसे ही रही तो करनैलगंज व तरबगंज के डेढ़ सौ के करीब गांव बाढ़ के चपेट में आ जाएंगे।
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नदी से हो रही कटान की जद में आए लोग सुरक्षित स्थान की ओर पलायन शुरू कर दिए हैं। ऐली विद्यालय में लगे पीपल के पेड़ के चारो ओर घाघरा नदी कटान कर रही हैं। ऐली परसौली के लकड़हन पुरवा के संतबक्श यादव व दीनदयाल का घर नदी के कटान में बह गया।
यहां के ननके का घर पर कटान हो रही हैं। लेखपाल अंकित वर्मा ने बताया कि लकड़हन पुरवा में घर कटने के बाद यह लोग ऐली परसौली के गोड़ियाना में रहने लगे हैं। तीनदिन पहले नदी के कटान से केवटाही के फूल चंद, साहब व गुरु प्रसाद का पक्का मकान बह गया था।
इन लोगों को तिरपाल दी गई हैं। तहसीलदार पैगाम हैदर ने बताया कि लेखपाल के रिपोर्ट के आधार पर बाढ़ पीड़ितों की मदद की जा रही हैं। घरों में कटान होने से लोगों को दूसरे स्थानों पर शरण लेनी पड़ रही है। बिना पानी कम हुए लोग पुराने से स्थान पर घर नहीं बना सकते हैं।
गांवों को बाढ़ से बचाने के लिए तटबंध के मरम्मत का कार्य तो हो रहा है। कई स्थानों पर काम हो भी चुका है। बीते दिनों जिलाधिकारी मार्कंडेय शाही ने निरीक्षण कर निर्माण कार्य को और तेज करने के निर्देश दिए हैं।
नदी के तेवर से लोगों के पसीने छूट रहे हैं। बारिश से कार्य प्रभावित हो रहा है, माना जा रहा है कि इससे काफी नुकसान लोगों को उठाना पड़ सकता है। लोगों के लिए सुरक्षित स्थान भी तैयार नही हो सका है। इससे लोगों के सामने कई तरह की समस्याएं हैं।
तरबगंज के ऐली में कटान होने से अभी तो आधा दर्जन लोग ही प्रभावित हैं। लेकिन जिस रफ्तार से नदी लगातार कटान कर रही है, उसे देखते हुए सौ लोगों के बेघर होने का संकेत मिल रहा है। प्रशासन को इन लोगों को राहत देने के साथ शरण देने की व्यवस्था करनी होगी। बेघर हो रहे लोगों के पास खाने-पीने का भी संकट है। एसडीएम रजेश कुमार ने स्थानीय अधिकारियों को तैयार रहने का निर्देश दिया है। जिससे फौरी तौर पर लोगों की मदद की जा सके।