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पांच अरब की देनदारी, नए सत्र से चीनी मिल चलाने की तैयारी
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गोंडा के एक गांव में लगी गन्ने की नर्सरी।
- फोटो : GONDA
गोंडा। पूर्वांचल में चीनी उत्पादन के लिहाज से देवीपाटन मंडल अव्वल रहा है। चीनी उत्पादन में मैजापुर चीनी मिल हो यह गौरव प्रदेश में मिल चुका है लेकिन भुगतान के मामले में चीनी मिलों का रवैया अब किसानों के लिए पीड़ादायक साबित हो रहा है। देवीपाटन मंडल की दस चीनी मिलों पर किसानों का 513 करोड़ रुपए बकाया है, इसमें तीन चीनी मिलें सबसे अधिक डिफाल्टर हैं। इन न शासन का न किसानों का दबाव है। इनकी लापरवाही से किसान परेशान हैं। ऐसे में किसानों की आय दोगुनी कैसे होगी जब किसानों की मेहनत की कमाई का समय से भुगतान ही नहीं हो रहा है।
मंडल के गोंडा जिले में बजाज हिंदुस्थान कुंदुरखी, मनकापुर, मैजापुर व बभनान चीनी मिलें संचालित हैं। बलरामपुर में इटईमैदा, बलरामपुर व तुलसीपुर तथा बहराइच में सहकारी चीनी मिल नानपारा, चिल्हवरिया तथा परसेंडी चीनी मिलें चल रही हैं। पेराई सत्र 2019-20 में मंडल के करीब ढाई लाख किसानों ने 778 लाख क्विंटल गन्ने की आपूर्ति की थी। इसके एवज में 2498 करोड़ मूल्य में से चीनी मिलों ने 1985 करोड़ रुपए का भुगतान कर दिया है। लेकिन किसानों का 513 करोड़ रुपए अभी बकाया है।
यह तब है जब नए पेराई सत्र का आरंभ इसी माह के 20 नवंबर से शुरू हो रहा है। बकाएदारों की फेहरिस्त में तीन चीनी मिलें किसानों के लिए मुसीबत बनी हैं। केवल किसानों की उपज बेंचने के लिए मिलों को चलाने की छूट दी जा रही है लेकिन बाद में ये पैसा फंसा लेती हैं। कुंदुरखी चीनी मिल पर किसानों का आधा पैसा अभी बकाया है। इसी तरह इटईमैदा पर 47 प्रतिशत तथा चिल्हवरिया पर 75 फीसदी बकाएदारी है। अन्य चीनी मिलों ने 90 प्रतिशत से अधिक भुगतान कर दिया है। दस चीनी मिलों में बजाज की दो चीनी मिलों व चिल्हवरिया पर ही 359 करोड़ रुपए की बकाएदारी है, जबकि अन्य सात मिलों पर 154 करोड़ की देनदारी है।
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अभी तक नहीं हुआ क्षेत्र सुरक्षण
चीनी मिलों के संचालन की डेट तय हो गई है लेकिन चीनी मिलों के लिए क्षेत्र सुरक्षण नहीं किया जा सका है। किस चीनी मिल के गेट एरिया व उसके क्षेत्र का आरक्षण होना है यह शासन स्तर से किया जाता है। लेकिन इस बार अभी तक क्षेत्र आरक्षण नहीं किया जा सका है। बीते सत्र में भी भुगतान में फिसड्डी रही बजाज की दो व चिल्हवरिया के क्षेत्र में कटौती की गई थी। लेकिन इस बार अभी तक क्षेत्र सुरक्षण न होने के कारण किसान अपनी उपज किस मिल को बेचेंगे तय नहीं हो सका है।
अब घाटे का सौदा बन रहा गन्ने की खेती
इंदिरापुर गांव के गन्ना किसान रामनरेश ने बताया कि बीते सत्र में गन्ने की आपूर्ति बजाज चीनी मिल को किया था लेकिन अभी पैसा नहीं मिला है। किसान सुधांशु ने बताया कि अब गन्ने की खेती घाटे का सौदा साबित हो रही है। पूरे साल फसल तैयार कर चीनी मिलों को दिया जाता है लेकिन भुगतान समय से न मिलने के कारण अब खेती से मन ऊब गया है। किसान दुर्गाप्रसाद व दिनेश शुक्ल ने कहा कि गन्ना नकदी फसल है। इसकी खेती का मतलब है कि उन लोगों को समय से पैसा मिल जाएगा और घर में पढ़ाई, शादी ब्याह व अन्य कार्य पूरे हो जाएंगे लेकिन अब तो यह संभव नहीं हो पा रहा है।
चीनी मिलें नहीं देती ब्याज
न्यायालय व शासन का स्पष्ट निर्देश है कि किसानों के गन्ना आपूर्ति के 14 दिन के अंदर भुगतान हो जाए। यदि 14 दिन बाद भुगतान किया जाए तो उसके एवज में ब्याज भी दिया जाए। लेकिन गोंडा में एक-एक साल तक चीनी मिलें भुगतान नहीं करती हैं और ब्याज भी नहीं देती हैं। प्रशासन की ओर से कार्रवाई के बाद भी चीनी मिलें भुगतान नहीं करती हैं।
फैक्ट फाइल
गन्ने का कुल रकबा- 2.5 लाख हेक्टेयर
गन्ना किसान-2.5 लाख
अनुमानित उत्पादन-775 लाख क्विंटल
बजाज हिंदुस्थान कुंदरखी-158 करोड़ बकाएदारी
बजाज हिंदुस्थान इटईमैदा-94 करोड़ बकाएदारी
चिल्हवरिया बहराइच-107 करोड़ बकाएदारी।
20 नवंबर से चलेंगी सभी चीनी मिलें
किसानों का गन्ना समय से बिक जाए इसलिए शासन के निर्देश पर 15 नवंबर की डेट निर्धारित किया गया है। लेकिन दीपावली के कारण लेबर आदि की समस्या हो सकती है इसलिए 20 नवंबर की डेट फाइनल की गई है। 20 नवंबर को सभी चीनी मिलों का संचालन कराया जाएगा। पिछले सत्र का 1985 करोड़ का भुगतान हुआ है और 513 करोड़ अभी बकाया है। इसके लिए चीनी मिलों को नोटिस दिया गया है। -अमर सिंह, उप गन्ना आयुक्त देवीपाटन मंडल गोंडा
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मंडल के गोंडा जिले में बजाज हिंदुस्थान कुंदुरखी, मनकापुर, मैजापुर व बभनान चीनी मिलें संचालित हैं। बलरामपुर में इटईमैदा, बलरामपुर व तुलसीपुर तथा बहराइच में सहकारी चीनी मिल नानपारा, चिल्हवरिया तथा परसेंडी चीनी मिलें चल रही हैं। पेराई सत्र 2019-20 में मंडल के करीब ढाई लाख किसानों ने 778 लाख क्विंटल गन्ने की आपूर्ति की थी। इसके एवज में 2498 करोड़ मूल्य में से चीनी मिलों ने 1985 करोड़ रुपए का भुगतान कर दिया है। लेकिन किसानों का 513 करोड़ रुपए अभी बकाया है।
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यह तब है जब नए पेराई सत्र का आरंभ इसी माह के 20 नवंबर से शुरू हो रहा है। बकाएदारों की फेहरिस्त में तीन चीनी मिलें किसानों के लिए मुसीबत बनी हैं। केवल किसानों की उपज बेंचने के लिए मिलों को चलाने की छूट दी जा रही है लेकिन बाद में ये पैसा फंसा लेती हैं। कुंदुरखी चीनी मिल पर किसानों का आधा पैसा अभी बकाया है। इसी तरह इटईमैदा पर 47 प्रतिशत तथा चिल्हवरिया पर 75 फीसदी बकाएदारी है। अन्य चीनी मिलों ने 90 प्रतिशत से अधिक भुगतान कर दिया है। दस चीनी मिलों में बजाज की दो चीनी मिलों व चिल्हवरिया पर ही 359 करोड़ रुपए की बकाएदारी है, जबकि अन्य सात मिलों पर 154 करोड़ की देनदारी है।
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अभी तक नहीं हुआ क्षेत्र सुरक्षण
चीनी मिलों के संचालन की डेट तय हो गई है लेकिन चीनी मिलों के लिए क्षेत्र सुरक्षण नहीं किया जा सका है। किस चीनी मिल के गेट एरिया व उसके क्षेत्र का आरक्षण होना है यह शासन स्तर से किया जाता है। लेकिन इस बार अभी तक क्षेत्र आरक्षण नहीं किया जा सका है। बीते सत्र में भी भुगतान में फिसड्डी रही बजाज की दो व चिल्हवरिया के क्षेत्र में कटौती की गई थी। लेकिन इस बार अभी तक क्षेत्र सुरक्षण न होने के कारण किसान अपनी उपज किस मिल को बेचेंगे तय नहीं हो सका है।
अब घाटे का सौदा बन रहा गन्ने की खेती
इंदिरापुर गांव के गन्ना किसान रामनरेश ने बताया कि बीते सत्र में गन्ने की आपूर्ति बजाज चीनी मिल को किया था लेकिन अभी पैसा नहीं मिला है। किसान सुधांशु ने बताया कि अब गन्ने की खेती घाटे का सौदा साबित हो रही है। पूरे साल फसल तैयार कर चीनी मिलों को दिया जाता है लेकिन भुगतान समय से न मिलने के कारण अब खेती से मन ऊब गया है। किसान दुर्गाप्रसाद व दिनेश शुक्ल ने कहा कि गन्ना नकदी फसल है। इसकी खेती का मतलब है कि उन लोगों को समय से पैसा मिल जाएगा और घर में पढ़ाई, शादी ब्याह व अन्य कार्य पूरे हो जाएंगे लेकिन अब तो यह संभव नहीं हो पा रहा है।
चीनी मिलें नहीं देती ब्याज
न्यायालय व शासन का स्पष्ट निर्देश है कि किसानों के गन्ना आपूर्ति के 14 दिन के अंदर भुगतान हो जाए। यदि 14 दिन बाद भुगतान किया जाए तो उसके एवज में ब्याज भी दिया जाए। लेकिन गोंडा में एक-एक साल तक चीनी मिलें भुगतान नहीं करती हैं और ब्याज भी नहीं देती हैं। प्रशासन की ओर से कार्रवाई के बाद भी चीनी मिलें भुगतान नहीं करती हैं।
फैक्ट फाइल
गन्ने का कुल रकबा- 2.5 लाख हेक्टेयर
गन्ना किसान-2.5 लाख
अनुमानित उत्पादन-775 लाख क्विंटल
बजाज हिंदुस्थान कुंदरखी-158 करोड़ बकाएदारी
बजाज हिंदुस्थान इटईमैदा-94 करोड़ बकाएदारी
चिल्हवरिया बहराइच-107 करोड़ बकाएदारी।
20 नवंबर से चलेंगी सभी चीनी मिलें
किसानों का गन्ना समय से बिक जाए इसलिए शासन के निर्देश पर 15 नवंबर की डेट निर्धारित किया गया है। लेकिन दीपावली के कारण लेबर आदि की समस्या हो सकती है इसलिए 20 नवंबर की डेट फाइनल की गई है। 20 नवंबर को सभी चीनी मिलों का संचालन कराया जाएगा। पिछले सत्र का 1985 करोड़ का भुगतान हुआ है और 513 करोड़ अभी बकाया है। इसके लिए चीनी मिलों को नोटिस दिया गया है। -अमर सिंह, उप गन्ना आयुक्त देवीपाटन मंडल गोंडा