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छप्पर में रह रहे सेनानी के परिवारीजन

Tue, 11 Aug 2015 11:47 PM IST
बलरामपुर/अमर उजाला ब्यूरो
बलरामपुर/अमर उजाला ब्यूरो Updated Tue, 11 Aug 2015 11:47 PM IST
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आजादी के समर में जिन दीवानों ने अपना सब कुछ कुर्बान कर दिया उनके परिवारीजन आज गुमनामी के अंधेरों में रहने को विवश है। लाख यातनाएं झेलने वाले इन रणबांकुरों ने देश को आजादी इसलिए दिलाई थी कि यहां हर कोई आजाद तथा खुशहाल रहे, लेकिन उनके परिवारीजनों की बदहाली से यह प्रतीत होता है कि आज हम उनको भूल रहे है।
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देश को आजादी दिलाने वाले दीवानों के परिवारीजन परिवार मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। ऐसे जनपद के एक सेनानी के परिवारीजन छप्पर के नीचे रहने के विवश है। रेहरा बाजार थाना क्षेत्र के सहजौरा गांव निवासी वीर सपूत अब्दुल रहमान उर्फ जमील की कहानी भी कुछ इस तरह ही है।
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अंग्रेजों के जुल्म के खिलाफ बगावत करने वाले जमील महात्मा गांधी तथा सुुभाषचंद्र बोस के समर्थक थे। छात्र जीवन में ही अंग्रेजों से लोहा लेकर देश को आजादी दिलाने का संकल्प लेकर जमील ने कई बार जेल की यात्रा भी की। लोग बताते है 1942 के भारत छोड़ों आंदोलन से लेकर सत्याग्रह व अन्य आंदोलनों में भी जमील काफी सक्रिय रहे। जमील बहुत कम बोलते थे।
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जमील के परिवार में उनकी एक मात्र वारिस उनकी बेटी रुआबुन्निशा है। परिवार का हाल काफी बेहाल है। रुआबुन्निशा ने बताया कि उसके पास न तो राशन कार्ड और न ही मनरेगा कार्ड है। परिवार में पति-पत्नी के अलावा तीन बच्चे है। सेनानी की बेटी ने बताया कि जब तक पिताजी जिंदा थे तब तक परिवार का गुजर-बसर उनको मिलने वाली पेंशन से होता था।

27 मार्च 2009 को जमील का निधन हो गया। अब परिवार के पास जीविकोपार्जन का एकमात्र सहारा मेहनत मजदूरी है। जमील अपने पीछे मात्र दो बीघा जमीन छोड़ गए है। इस जमीन से परिवार का गुजर-बसर नहीं हो पाता। बेटी ने बताया कि मनरेगा कार्ड न होने के कारण उसके पति को खेतिहर मजदूर के रूप में काम करना पड़ता है।

पूरी मजदूरी भी नहीं मिलती। राशन कार्ड न होने के चलते परिवार को सस्ता राशन व केरोसिन भी नहीं मिलता। पूरा परिवार फूस के छप्पर में जीवन गुजर-बसर कर रहा है। जमील के भतीजों की स्थिति भी दयनीय है। परिवार के लोगों में सरकारी उपेक्षा के चलते बेहद निराशा है।


बेटी ने बताया कि उसने राशन कार्ड व मनरेगा कार्ड बनवाने की बहुत कोशिश की, लेकिन उसे इन मूलभूत सुविधाओं का लाभ नहीं मिल सका। यही नहीं केंद्र व प्रदेश सरकार की ओर से संचालित तमाम आवास योजनाओं का में से किसी योजना का लाभ सेनानी के परिवार को नहीं दिया गया। परिवार ने शासन-प्रशासन से मूलभूत सुविधाएं मुहैया कराने की गुहार लगाई है।
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