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गोंडा : रहस्यमयी बुखार से जिले में हाहाकार, हर रोज आ रहे तीन हजार मरीज
Fri, 03 Sep 2021 11:41 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, गोंडा
अमर उजाला नेटवर्क, गोंडा
Published by: लखनऊ ब्यूरो
Updated Fri, 03 Sep 2021 11:41 AM IST
सार
पूरे जिले में वायरल बुखार से सबसे अधिक प्रभावित बच्चे हैं। अगस्त में निमोनिया व डायरिया से ग्रसित सात बच्चों की मौत भी हो चुकी है। प्रदेश के अन्य शहरों से भी इसी प्रकार की खबरें आ रही हैं।
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गोंडा में जिला अस्पताल के मेडिकल वार्ड में भर्ती मरीज।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
प्रदेश भर में फैले रहस्यमयी बुखार के कहर अब जिले में भी हाहाकार मचने लगा है। गांव से लेकर शहरों तक वायरल बुुखार व निमोनिया के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। जिला अस्पताल से लेकर निजी अस्पतालों में बुखार के मरीजों की लंबी लाइन लगी रहती है। गुरुवार को जिला अस्पताल में 975 मरीजों का ओपीडी हुआ। इसमें सात सौ से अधिक मरीज वायरल बुखार, निमोनिया तथा डायरिया से पीड़ित थे। जिला अस्पताल में अगस्त माह में 138 बच्चे भर्ती कराए गए हैं। एक सप्ताह में बुखार से पीड़ित सात बच्चों की मौत हुई है। जिला अस्पताल में सफाई पर बिल्कुल ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
वायरल बुखार से सबसे अधिक प्रभावित बच्चे हैं। अगस्त में निमोनिया व डायरिया से ग्रसित सात बच्चों की मौत भी हो चुकी है। बुखार से पीड़ित लोग सरकारी अस्पताल से लेकर निजी अस्पतालों में करीब तीन हजार मरीज अपना इलाज कराने आ रहे है। डॉक्टरों की माने तो यह बुखार सामान्य बुखार से थोड़ा अलग है। सामान्य बुखार पांच से सात दिनों मे ठीक हो जाता है लेकिन वायरल बुखार का प्रभाव 10-12 दिनों तक रहता है। स्वास्थ्य विभाग भी जिला अस्पताल सहित सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर मलेरिया और डेंगू की जांच करा रहा है, लेकिन इन दोनों जांचों के साथ बीमार लोगों को कोविड की जांच करानी पड़ रही है।
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जिला अस्पताल में औसतन 700 मरीज रोज आते थे, जोकि बढ़कर एक हजार हो गए हैं। बुखार से पीड़ित 40 से 50 मरीज ओपीडी में देखे जा रहे हैं। सीएचसी व पीएचसी पर भी मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। बुखार व सर्दी खांसी के मरीज आ रहे हैं। मलेरिया, डेंगू की जांच जिला अस्पताल के अलावा सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर भी कराई जा रही है।
गांवों में तेजी से बढ़ रहा बुखार का प्रकोप
ग्रामीण क्षेत्रों में वायरल बुखार का प्रकोप तेजी से फैल रहा है। हर घर में कोई न कोई व्यक्ति बुखार से पीड़ित है। जिला अस्पताल के फिजीशियन डॉ समीर गुप्ता ने बताया है कि ओपीडी में वायरल बुखार के मरीजों की संख्या बढ़ी है। वहीं अधिकांश बीमार घरों पर रहकर या झोलाछाप डाक्टरों के सहारे अपना इलाज करवा रहे हैं। डॉक्टर समीर गुप्ता का कहना है कि इस बुखार के बारे मे कोई प्रमाणिक जानकारी तो नही है लेकिन इस बुखार के वायरल बुखार का प्रकोप 10-12 तक रहता है जबकि आम बुखार 5-6 दिनों में ही ठीक हो जाता है।
जिला अस्पताल परिसर में भरा गंदा पानी
भले ही डेंगू व मलेरिया के प्रकोप से जिले में हाहाकार मचा हुआ हो लेकिन दूसरों को साफ-सफाई का ज्ञान बांटने वाले जिला अस्पताल में ही गंदगी का अंबार देखा जा सकता है। अस्पताल गेट के सामने ही महीने भर से गंदा पानी भरा है जिसमें मच्छर व अन्य बीमारी जनित कीटाणु मंडराते रहते हैं। मच्छर मरीज को काटकर और ज्यादा बीमार कर देते हैं। वार्डों में गंदगी फैली रहती चद्दर बदलवाने के लिए तीमारदार कर्मचारी से मिन्नते करते रहते हैं।
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वायरल बुखार से सबसे अधिक प्रभावित बच्चे हैं। अगस्त में निमोनिया व डायरिया से ग्रसित सात बच्चों की मौत भी हो चुकी है। बुखार से पीड़ित लोग सरकारी अस्पताल से लेकर निजी अस्पतालों में करीब तीन हजार मरीज अपना इलाज कराने आ रहे है। डॉक्टरों की माने तो यह बुखार सामान्य बुखार से थोड़ा अलग है। सामान्य बुखार पांच से सात दिनों मे ठीक हो जाता है लेकिन वायरल बुखार का प्रभाव 10-12 दिनों तक रहता है। स्वास्थ्य विभाग भी जिला अस्पताल सहित सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर मलेरिया और डेंगू की जांच करा रहा है, लेकिन इन दोनों जांचों के साथ बीमार लोगों को कोविड की जांच करानी पड़ रही है।
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जिला अस्पताल में औसतन 700 मरीज रोज आते थे, जोकि बढ़कर एक हजार हो गए हैं। बुखार से पीड़ित 40 से 50 मरीज ओपीडी में देखे जा रहे हैं। सीएचसी व पीएचसी पर भी मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। बुखार व सर्दी खांसी के मरीज आ रहे हैं। मलेरिया, डेंगू की जांच जिला अस्पताल के अलावा सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर भी कराई जा रही है।
गांवों में तेजी से बढ़ रहा बुखार का प्रकोप
ग्रामीण क्षेत्रों में वायरल बुखार का प्रकोप तेजी से फैल रहा है। हर घर में कोई न कोई व्यक्ति बुखार से पीड़ित है। जिला अस्पताल के फिजीशियन डॉ समीर गुप्ता ने बताया है कि ओपीडी में वायरल बुखार के मरीजों की संख्या बढ़ी है। वहीं अधिकांश बीमार घरों पर रहकर या झोलाछाप डाक्टरों के सहारे अपना इलाज करवा रहे हैं। डॉक्टर समीर गुप्ता का कहना है कि इस बुखार के बारे मे कोई प्रमाणिक जानकारी तो नही है लेकिन इस बुखार के वायरल बुखार का प्रकोप 10-12 तक रहता है जबकि आम बुखार 5-6 दिनों में ही ठीक हो जाता है।
जिला अस्पताल परिसर में भरा गंदा पानी
भले ही डेंगू व मलेरिया के प्रकोप से जिले में हाहाकार मचा हुआ हो लेकिन दूसरों को साफ-सफाई का ज्ञान बांटने वाले जिला अस्पताल में ही गंदगी का अंबार देखा जा सकता है। अस्पताल गेट के सामने ही महीने भर से गंदा पानी भरा है जिसमें मच्छर व अन्य बीमारी जनित कीटाणु मंडराते रहते हैं। मच्छर मरीज को काटकर और ज्यादा बीमार कर देते हैं। वार्डों में गंदगी फैली रहती चद्दर बदलवाने के लिए तीमारदार कर्मचारी से मिन्नते करते रहते हैं।
वायरल बुखार के प्रकोप को देखते हुए जिला अस्पताल सहित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर मलेरिया, डेंगू की जांच कराई जा रही है। इसके साथ ही दोनों जांचों के कराने के साथ आरटीपीसीआर जांच भी बुखार से पीड़ित मरीजों की कराई जा रही है। डॉ घनश्याम सिंह, सीएमएस जिला अस्पताल