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गन्ने में घुली कड़वाहट: अब किसानों को दे रही पीड़ा, दो अरब बकाया

Thu, 26 Aug 2021 10:32 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Thu, 26 Aug 2021 10:32 PM IST
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Farmers upset for payment of two billion arrears
गोंडा में लगी गन्ने की फसल। - फोटो : GONDA
गोंडा। नकदी फसल कही जाने वाली गन्ने की खेती अब उधारी की खेती हो गई है। बीते दस साल से पीड़ा दे रही बजाज चीनी मिल पर न अधिकारियों की चलती है न सरकार की। पूरा सीजन बीत जाने के बाद भुगतान करने वाली बजाज चीनी मिल पर इस बार भी 80 प्रतिशत भुगतान की बकाएदारी है।
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मिल ने केवल 65 करोड़ का ही भुगतान किया है, जबकि दो अरब से अधिक की देनदारी है। गन्ना विभाग के अधिकारी भी अब मिल के साथ मिलकर बकाएदारी प्रदर्शित न करने में हाथ बंटा रहे हैं।
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इससे जिले में पांच प्रतिशत गन्ने का रकबा भी कम हो गया है। वहीं दूसरी तरफ केंद्र सरकार ने पांच रुपये प्रति क्विंटल गन्ने का मूल्य बढ़ाकर किसानों के जले पर नमक डालने का काम किया है।
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देवीपाटन मंडल गन्ना किसानों का गढ़ है। यहां करीब ढाई लाख हेक्टेयर में नकदी फसल गन्ने की खेती जमकर की जाती है। किसानों को गन्ने की फसल बोआई से लेकर आपूर्ति तक सरकार पारदर्शिता बरतते हुए सर्वे, भुगतान पर काम कर रही है।
लेकिन प्रशासन के अधिकारी किसानों के दर्द पर मरहम नहीं लगा पा रहे हैं। गोंडा जिले में ही चार चीनी मिलों को यहां के करीब 70 हजार किसान गन्ने की आपूर्ति करते हैं।
जिले में 60 हजार से 70 हजार हेकटेयर में गन्ने की खेती होती है और इसकी आपूर्ति बलरामपुर यूनिट की दतौली मनकापुर, बभनान, मैजापुर तथा कुंदरखी बजाज चीनी मिल को की जाती है।
पेराई सत्र 2020-21 में किसानों ने जिले में करीब सवा तीन लाख क्विंटल गन्ने की आपूर्ति चीनी मिलों को कर दिया। बीसीएम ग्रुप की चीनी मिलों ने शत-प्रतिशत भुगतान कर दिया, जबकि बजाज ने हर साल की तरह इस बार भी दो अरब की बकाएदारी कर दी।
गन्ना मूल्य न बढ़ने तथा समय से भुगतान न होने की दशा में किसानों का खेती से मोह भंग होता जा रहा है। बीते वर्ष करीब 65 हजार हेक्टेयर में गन्ने का रकबा था जो इस बार पांच प्रतिशत घट गया है।
नवाबगंज, गोंडा, मनकापुर, करनैलगंज तथा बहराइच गन्ना सहकारी समिति क्षेत्र से बजाज चीनी मिल ने गन्ना आपूर्ति की थी। कुल 83.11 लाख क्विंटल गन्ने की आपूर्ति की जिसके एवज में 26777 लाख रुपए का भुगतान किसानों को करना था। इसमें से अभी तक 6462 लाख रुपए का ही भुगतान हो सका है।
बकाया गन्ना मूल्य न भुगतान न किए जाने से किसानों की परेशानी बढ़ गई है। किसान शेषराम कहते हैं बकाया गन्ना मूल्य भुगतान न होने के कारण उन्हें आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ रहा है। लॉकडाउन में अन्य आय के साधन ठप होने से गन्ना के दाम पर गृहस्थी निर्भर है।
किसान बसंत पांडेय ने बताया कि गन्ना नकदी फसल है। इसकी खेती का मतलब कि गन्ना किसानों को समय से दाम मिल जाए। इनके घर का खर्च, पढ़ाई व शादी ब्याह गन्ना के दाम पर ही निर्भर करता है।

किसान विनोद बताते हैं कि उन्होने पिछले सत्र में गन्ना बजाज चीनी मिल को बेचा था जिसका भुगतान अभी तक नहीं हो सका। किसान आशाराम मिश्र कहते हैं कि अब गन्ने की खेती से मन ऊब गया है। पूरे साल फसल को तैयार करने में अपना पसीना बहाने के बावजूद समय से गन्ना मूल्य नहीं मिल पा रहा है। जिससे आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ रहा है।
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