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Gonda News: फार्मर रजिस्ट्री हुई न बिक रहा धान
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परसपुर के गोगिया क्रय केंद्र पर धान विक्री के लिए सत्यापन करते प्रभारी। -संवाद
गोंडा। जिले के 37 गांवों के 21 हजार किसानों को चकबंदी की दोहरी मार झेलनी पड़ रही है। इन गांवों की खतौनी अभी तक राजस्व विभाग की वेबसाइट पर उपलब्ध नहीं हो सकी है। जिससे न तो उनकी फार्मर रजिस्ट्री हो पा रही है, न ही सरकारी केंद्रों पर धान बेच पा रहे हैं। कृषि विभाग की कई योजनाओं का लाभ भी किसान नहीं ले पा रहे हैं।
कृषि विभाग की योजनाओं का लाभ लेने के लिए फार्मर रजिस्ट्री जरूरी है और फार्मर रजिस्ट्री के लिए खतौनी का ऑनलाइन होना आवश्यक है। वहीं, धान बेचने के लिए पंजीकरण कराने वाले किसानों को भी खतौनी का सत्यापन कराना पड़ता है। लेकिन जिले के 37 गांवों में चकबंदी की प्रक्रिया चल रही है। इन गांवों की खतौनी पोर्टल पर ऑनलाइन उपलब्ध नहीं है बल्कि चकबंदी के लेखपाल के पास मैनुअल रहती है।
बोले किसान- ऑनलाइन कराएं खतौनी
परसपुर के गोगिया निवासी विमल सिंह को 45 क्विंटल धान बेचना है। पंजीकरण कराया लेकिन खतौनी का सत्यापन न होने से खरीद नहीं हो सकी। किसान रामतीरथ का 10 क्विंटल धान भी चकबंदी के चलते नहीं बिक सका। हड़ियागाड़ा के राजकरन ने बताया न उनकी फार्मर रजिस्ट्री हो पाई है, न ही सरकारी क्रय केंद्र पर धान बिक रहा है। इसी प्रकार जिले के 21 हजार किसानों को चकबंदी का दर्द झेलना पड़ रहा है। किसानों ने मांग की कि चकबंदी गांवों की खतौनी जल्द से जल्द पोर्टल पर अपलोड कराई जाए, ताकि रजिस्ट्री, धान खरीद और योजनाओं का लाभ सुचारू रूप से मिल सके।
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21 हजार किसानों की नहीं मिल रही ऑनलाइन खतौनी
जिले के 21 हजार किसानों की ऑनलाइन खतौनी न मिलने के कारण फार्मर रजिस्ट्री की प्रक्रिया पूरी नहीं कराई जा सकती है। इसकी सूचना शासन को भेजकर लक्ष्य को कम करने का अनुरोध किया गया है। खतौनी ऑनलाइन होने के बाद ही फार्मर रजिस्ट्री हो पाएगी।
प्रेमकुमार ठाकुर, उपनिदेशक कृषि
विभाग से मैनुअल मिलती है खतौनी
-जिले के 37 गांवों में चकबंदी की प्रक्रिया चल रही है। इन गांवों की खतौनी चकबंदी लेखपाल मैनुअल तरीके से जारी करते हैं। प्रक्रिया पूरी होने के बाद खतौनी ऑनलाइन होगी।
देवेंद्र सिंह, बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी
सत्यापन के लिए एडीएम ने लिखा पत्र
चकबंदी वाले गांव के किसानों की समस्या को देखते हुए एडीएम ने चकबंदी अधिकारी को पत्र लिखा है। ऐसे गांवों के सत्यापन की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। मैनुअल तरीके से सत्यापित करवाकर धान की खरीद की जाएगी।
एनके पाठक, डिप्टी आरएमओ
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कृषि विभाग की योजनाओं का लाभ लेने के लिए फार्मर रजिस्ट्री जरूरी है और फार्मर रजिस्ट्री के लिए खतौनी का ऑनलाइन होना आवश्यक है। वहीं, धान बेचने के लिए पंजीकरण कराने वाले किसानों को भी खतौनी का सत्यापन कराना पड़ता है। लेकिन जिले के 37 गांवों में चकबंदी की प्रक्रिया चल रही है। इन गांवों की खतौनी पोर्टल पर ऑनलाइन उपलब्ध नहीं है बल्कि चकबंदी के लेखपाल के पास मैनुअल रहती है।
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बोले किसान- ऑनलाइन कराएं खतौनी
परसपुर के गोगिया निवासी विमल सिंह को 45 क्विंटल धान बेचना है। पंजीकरण कराया लेकिन खतौनी का सत्यापन न होने से खरीद नहीं हो सकी। किसान रामतीरथ का 10 क्विंटल धान भी चकबंदी के चलते नहीं बिक सका। हड़ियागाड़ा के राजकरन ने बताया न उनकी फार्मर रजिस्ट्री हो पाई है, न ही सरकारी क्रय केंद्र पर धान बिक रहा है। इसी प्रकार जिले के 21 हजार किसानों को चकबंदी का दर्द झेलना पड़ रहा है। किसानों ने मांग की कि चकबंदी गांवों की खतौनी जल्द से जल्द पोर्टल पर अपलोड कराई जाए, ताकि रजिस्ट्री, धान खरीद और योजनाओं का लाभ सुचारू रूप से मिल सके।
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21 हजार किसानों की नहीं मिल रही ऑनलाइन खतौनी
जिले के 21 हजार किसानों की ऑनलाइन खतौनी न मिलने के कारण फार्मर रजिस्ट्री की प्रक्रिया पूरी नहीं कराई जा सकती है। इसकी सूचना शासन को भेजकर लक्ष्य को कम करने का अनुरोध किया गया है। खतौनी ऑनलाइन होने के बाद ही फार्मर रजिस्ट्री हो पाएगी।
प्रेमकुमार ठाकुर, उपनिदेशक कृषि
विभाग से मैनुअल मिलती है खतौनी
-जिले के 37 गांवों में चकबंदी की प्रक्रिया चल रही है। इन गांवों की खतौनी चकबंदी लेखपाल मैनुअल तरीके से जारी करते हैं। प्रक्रिया पूरी होने के बाद खतौनी ऑनलाइन होगी।
देवेंद्र सिंह, बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी
सत्यापन के लिए एडीएम ने लिखा पत्र
चकबंदी वाले गांव के किसानों की समस्या को देखते हुए एडीएम ने चकबंदी अधिकारी को पत्र लिखा है। ऐसे गांवों के सत्यापन की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। मैनुअल तरीके से सत्यापित करवाकर धान की खरीद की जाएगी।
एनके पाठक, डिप्टी आरएमओ