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Gonda News: सरयू तट पर स्नान-दान कर पितरों को दी विदाई

Sun, 21 Sep 2025 11:43 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा Updated Sun, 21 Sep 2025 11:43 PM IST
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Farewell to ancestors by bathing and donating on the banks of Saryu
परसपुर के भौरीगंज में सरयू नदी में स्नान-दान कर पितरों को विदा करते लोग। - संवाद 
करनैलगंज/परसपुर/पसका। पितृ विसर्जन पर रविवार को हजारों श्रद्धालुओं ने सरयू नदी में स्नान-दान कर पुण्य लाभ अर्जित किया। करनैलगंज संवाद के अनुसार, सरयू के विभिन्न घाटों पर भोर से ही श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। प्रशासन की ओर से घाट पर कोई विशेष व्यवस्था नहीं की गई थी। परिणामस्वरूप घाट तक जाने वाले मार्ग पर कई घंटे जाम की स्थिति बनी रही।
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कटरा शहबाजपुर, सकरौरा, कचनापुर, यमदुतिया घाट, बसेहिया आदि घाटों पर श्रद्धालुओं का भीड़ रही। नगर पालिका परिषद व ग्राम पंचायतों की ओर से घाट पर साफ-सफाई कराई गई, लेकिन श्रद्धालुओं के वाहनों के लिए पार्किंग की व्यवस्था नहीं की गई। भोर से शुरू हुआ स्नान, ध्यान और तर्पण का सिलसिला दोपहर बाद तक चलता रहा। शाम को बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने पितरों का विसर्जन कर दीपदान किया, जिससे सरयू तट आलोकित हो उठा।
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घाट पर नहीं थे सुरक्षा के पर्याप्त प्रबंध
पितृ विसर्जन पर सुबह से करीब 11 बजे तक गोंडा-लखनऊ राजमार्ग और घाट तक जाने वाले मार्ग पर जाम लगा रहा। सुबह आठ बजे तक दूर-दूर तक कोई पुलिसकर्मी नहीं नजर आया। एसडीएम नेहा मिश्रा ने कहा कि पितृ विसर्जन को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था, साफ-सफाई और नदी में बैरिकेडिंग के निर्देश दिए गए थे।
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परसपुर संवाद के अनुसार, भौरीगंज स्थित सरयू तट, त्रिमुहानी घाट, सूकरखेत पसका, जम्बू तीर्थ और बरुहा सहित विभिन्न घाटों पर सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। श्रद्धालुओं ने मां सरयू की धारा में आस्था की डुबकी लगाकर स्नान-ध्यान और पूजापाठ किया। दान-पुण्य कर अपने पितरों को विदाई दी। कुछ स्थानों पर घाट के आसपास लगे मेले में लोगों ने गृह उपयोगी वस्तुओं की खरीदारी भी की।
पंडित देवनारायण पांडेय ने बताया कि अमावस्या के दिन पवित्र नदियों में स्नान कर तर्पण और जलांजलि देना शास्त्रसम्मत है। पितृपक्ष में तर्पण के उपरांत पावित्री, मोदक, त्रिकुशा और यज्ञोपवीत (जनेऊ) नदी की धारा में प्रवाहित कर पितरों को विदाई दी जाती है।

पसका संवाद के अनुसार, रविवार को भोर से ही हजारों श्रद्धालुओं ने सरयू नदी में स्नान-दान किया। इसके बाद श्रीराम-जानकी मंदिर में दर्शन कर पुण्य लाभ लिया तथा पौराणिक पीपल वृक्ष की परिक्रमा की। घाट पर खिलौने, मिठाई व फलों की दुकानों पर भीड़ रही। अधिक भीड़ के कारण मार्गों पर जाम की स्थिति बनी रही।



बेपरवाही से प्रदूषित हो रही नदी
पितृ विसर्जन पर आस्था तो दिखी, पर पर्यावरण की अनदेखी भी नजर आई। कई श्रद्धालु घरों से पॉलीथिन बैग और प्लास्टिक की थैलियों में हवन सामग्री और पूजा-पाठ का सामान लाकर नदी में प्रवाहित कर रहे थे। इससे नदी प्रदूषित हो रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि श्रद्धालु सामग्री को मिट्टी या जैविक रूप से नष्ट होने वाली थैलियों में लाकर प्रवाहित करें तो आस्था के साथ-साथ नदी की स्वच्छता भी बनी रहेगी।
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