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Gonda News: पानी घटने से कटान तेज, 300 बीघे खेत नदी में समाए
Fri, 17 Jul 2026 01:22 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Fri, 17 Jul 2026 01:22 AM IST
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लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात करते भाजपा जिलाध्यक्ष अकबाल बहादुर तिवारी।
करनैलगंज/ विश्नोहरपुर। सरयू नदी का जलस्तर बृहस्पतिवार को स्थिर बना रहा। एल्गिन ब्रिज पर नदी का जलस्तर खतरे के निशान से 65 सेंटीमीटर नीचे दर्ज किया गया। जलस्तर में मामूली गिरावट से तटवर्ती गांवों के लोगों ने राहत की सांस ली है। कटान तेज होने से खेत नदी में समा गए हैं। सिंचाई एवं बाढ़ खंड ने शुक्रवार से जलस्तर दोबारा बढ़ने की आशंका जताई है।
बाढ़ नियंत्रण विभाग के अनुसार, बृहस्पतिवार सुबह आठ बजे एल्गिन ब्रिज पर सरयू का जलस्तर 105.420 मीटर दर्ज किया गया, जबकि खतरे का निशान 106.070 मीटर है। बुधवार रात आठ बजे जलस्तर 105.550 मीटर था। इस तरह 12 घंटे में 13 सेंटीमीटर की कमी दर्ज की गई।
जलस्तर घटने के साथ नदी का कटान तेज हो गया है। बहुवन मदार माझा और माझा रायपुर के सामने तटबंध के भीतर करीब छह किलोमीटर लंबाई और लगभग तीन मीटर चौड़ाई में कटान हुआ है। इससे 300 बीघे से अधिक कृषि भूमि नदी में समा गई है। फसल और जमीन को लेकर किसानों की चिंता बढ़ गई है।
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नदी में कुल डिस्चार्ज भी कम हुआ है। बुधवार रात 1,04,706 क्यूसेक के मुकाबले बृहस्पतिवार सुबह यह घटकर 93,974 क्यूसेक रह गया। इसमें गिरिजा बैराज से 69,995 क्यूसेक, शारदा बैराज से 17,155 क्यूसेक तथा सरयू बैराज से 6,824 क्यूसेक पानी छोड़ा गया।
बाढ़ खंड के सहायक अभियंता पंकज कुमार आर्य ने बताया कि ऊपरी क्षेत्रों से छोड़े गए पानी के शुक्रवार सुबह तक पहुंचने की संभावना है। इससे जलस्तर में फिर बढ़ोतरी हो सकती है। फिलहाल सभी तटबंधों की निगरानी की जा रही है और पूरी टीम अलर्ट मोड पर है।
माझा क्षेत्रों में जलभराव का खतरा बढ़ा
नवाबगंज क्षेत्र के माझा इलाकों में सरयू का पानी धीरे-धीरे फैलने लगा है। साकीपुर के चहलावा समेत कई गांवों में लोग संभावित पलायन को देखते हुए सड़क किनारे अस्थायी आशियाने बनाने की तैयारी में जुट गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि रिंग रोड निर्माण के दौरान व्योंदा माझा, दत्तनगर, तुलसीपुर, गोकुला, साकीपुर, माझाराठ और जैतपुर क्षेत्र में बड़े पैमाने पर मिट्टी और बालू का खनन किया गया था।
इससे जगह-जगह गहरे गड्ढे बन गए हैं। दत्तनगर निवासी सरयू विश्वकर्मा ने बताया कि बरसात शुरू होने के बाद खनन तो बंद हो गया, लेकिन बदली हुई भौगोलिक स्थिति इस बार बाढ़ की विभीषिका को और गंभीर बना सकती है। प्रशासन से समय रहते सुरक्षा और राहत के इंतजाम करने की मांग की गई है।
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बाढ़ नियंत्रण विभाग के अनुसार, बृहस्पतिवार सुबह आठ बजे एल्गिन ब्रिज पर सरयू का जलस्तर 105.420 मीटर दर्ज किया गया, जबकि खतरे का निशान 106.070 मीटर है। बुधवार रात आठ बजे जलस्तर 105.550 मीटर था। इस तरह 12 घंटे में 13 सेंटीमीटर की कमी दर्ज की गई।
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जलस्तर घटने के साथ नदी का कटान तेज हो गया है। बहुवन मदार माझा और माझा रायपुर के सामने तटबंध के भीतर करीब छह किलोमीटर लंबाई और लगभग तीन मीटर चौड़ाई में कटान हुआ है। इससे 300 बीघे से अधिक कृषि भूमि नदी में समा गई है। फसल और जमीन को लेकर किसानों की चिंता बढ़ गई है।
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नदी में कुल डिस्चार्ज भी कम हुआ है। बुधवार रात 1,04,706 क्यूसेक के मुकाबले बृहस्पतिवार सुबह यह घटकर 93,974 क्यूसेक रह गया। इसमें गिरिजा बैराज से 69,995 क्यूसेक, शारदा बैराज से 17,155 क्यूसेक तथा सरयू बैराज से 6,824 क्यूसेक पानी छोड़ा गया।
बाढ़ खंड के सहायक अभियंता पंकज कुमार आर्य ने बताया कि ऊपरी क्षेत्रों से छोड़े गए पानी के शुक्रवार सुबह तक पहुंचने की संभावना है। इससे जलस्तर में फिर बढ़ोतरी हो सकती है। फिलहाल सभी तटबंधों की निगरानी की जा रही है और पूरी टीम अलर्ट मोड पर है।
माझा क्षेत्रों में जलभराव का खतरा बढ़ा
नवाबगंज क्षेत्र के माझा इलाकों में सरयू का पानी धीरे-धीरे फैलने लगा है। साकीपुर के चहलावा समेत कई गांवों में लोग संभावित पलायन को देखते हुए सड़क किनारे अस्थायी आशियाने बनाने की तैयारी में जुट गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि रिंग रोड निर्माण के दौरान व्योंदा माझा, दत्तनगर, तुलसीपुर, गोकुला, साकीपुर, माझाराठ और जैतपुर क्षेत्र में बड़े पैमाने पर मिट्टी और बालू का खनन किया गया था।
इससे जगह-जगह गहरे गड्ढे बन गए हैं। दत्तनगर निवासी सरयू विश्वकर्मा ने बताया कि बरसात शुरू होने के बाद खनन तो बंद हो गया, लेकिन बदली हुई भौगोलिक स्थिति इस बार बाढ़ की विभीषिका को और गंभीर बना सकती है। प्रशासन से समय रहते सुरक्षा और राहत के इंतजाम करने की मांग की गई है।