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पंचायत के आरक्षण से कईयों को लगा झटका

Wed, 03 Mar 2021 10:37 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Wed, 03 Mar 2021 10:37 PM IST
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Equations deteriorate due to Panchayat reservation
गोंडा। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के लिए पंचायतों के आरक्षण से सीटों की स्थिति साफ हो गई है। कई दिग्गजों के ग्राम पंचायतों के प्रधान पदों के आरक्षित वर्ग के कोटे में जाने से झटका लगा है। वहीं जिला पंचायत सीटों के आरक्षित होने से भी लोगों के सामने मुश्किलें बढ़ गई हैं।
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जिन सीटों के अनारक्षित होने से अध्यक्ष की कुर्सी आसान होती दिख रही थी वह सीटें आरक्षित हो गईं हैं। वहीं एक विधायक की निगाहें उनके क्षेत्र की सीटों पर थीं, जो आरक्षित होती तो वह फिर दांव अजमाते। उनकी पत्नी जिला पंचायत अध्यक्ष रह चुकी हैं। इस बार सीट सामान्य होने से उनके सामने संकट खड़ा हो गया है।
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इस बार जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पर कैसरगंज सांसद बृजभूषण शरण सिंह के परिवार की दावेदारी पक्की मानी जा रही है। उनके नवाबगंज क्षेत्र के चार सीटों में एक अनारक्षित और एक महिला है।
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जहां उनके परिवार के चुनाव लड़ने की उम्मीद है। लेकिन अन्य दो सीटें आरक्षित हो गई हैं। इसी तरह झंझरी की सभी पांचों सीटों में चार सीटें अनारक्षित हो गई हैं और एक सीट महिला है।
इस ब्लाक के किसी सीट से बलरामपुर के विधायक पल्टूराम अपनी पत्नी पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष ज्ञानमती के लिए दावेदारी कर सकते हैं। वैसे एक सीट अनूसूचित वर्ग की होती तो उनके लिए राह आसान होती है। अभी भी उनकी स्थिति तो मजबूत है, लेकिन अब स्थानीय समीकरण से उनके सामने संकट है।
ऐसे ही करनैलगंज में भी सिर्फ एक सीट महिला की हुई है, बाकी सीटें आरक्षित वर्ग के कोटे में चली गई हैं। इससे यहां पर भाजपा विधायक अजय प्रताप सिंह उर्फ लल्ला भैय्या के परिवार से कोई प्रत्याशी होता है तो पूर्व मंत्री योगेश प्रताप सिंह के परिवार की चुनौती मिल सकती है।
फिलहाल अभी लोग सीटों का परीक्षण कर रहे हैं। कटरा बाजार की चारों सीटों में तीन अनारक्षित और एक महिला सीटें होने से वहां के पंचायत के नेताओं के लिए पर्याप्त अवसर है। इसी तरह मनकापुर तहसील में भी सीटों की स्थिति को लेकर बड़ों में ऊहापोह की स्थिति है।
अब सभी यही करते दिख रहे हैं कि इस बार जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में रोचकता कम है। एक तरफा चुनाव जाते दिख रहा है, ऐसे में सदस्य का चुनाव बहुत अहम नही है।
पंचायत के प्रधान पदों के चुनाव में आरक्षण से कई फेरबदल हुए हैं। करनैलगंज में भंभुवा पंचायत अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित हो गई है। ऐसे में पूर्व मंत्री योगेश प्रताप सिंह को झटका मिला है।

इसी तरह कैसरगंज सांसद बृजभूषण शरण सिंह के पैतृक गांव विश्वनोहरपुर भी अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित हो गई हैं। वहीं पूर्व मंत्री विनोद कुुमार सिंह उर्फ पंडित सिंह के परिवार से जुड़ी पंचायतें भी आरक्षित वर्ग के खाते में चली गई हैं। इसी तरह पूरे जिले में 200 से अधिक पंचायतों में बड़े बदलाव हुए हैं। जिससे कई बार से पंचायतों में हनक कायम रखने वालों की मुश्किलें बढ़ी हैं।
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