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भाजपा की किरकिरी
गोंडा/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 01 Jan 2016 11:29 PM IST
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पिछले चार जिला पंचायत अध्यक्ष पदों पर अपनों को जीत दिलाने वाले भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने कृषि मंत्री विनोद कुमार उर्फ पंडित सिंह को वाकओवर दे दिया, जिससे पंडित सिंह की बहू जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर निर्विरोध निर्वाचित हो गईं। इस वाकओवर से भाजपा की किरकिरी हुई है।
इससे भाजपा के समर्थन से जीत हासिल करने वाले जिला पंचायत सदस्य भी हतप्रभ हैं और संगठन कुछ ठोस बोलने को तैयार नहीं है।
सात जनवरी को वोट डालने की 51 जिला पंचायत सदस्यों की हसरत धरी की धरी रह गई। वजीरगंज दक्षिणी सीट से कृषि मंत्री विनोद कुमार उर्फ पंडित सिंह की पुत्र वधू को चुनाव लड़ाने के लिए नामांकन किया गया था।
इस सीट पर बृजभूषण शरण सिंह ने भी अपने एक करीबी को मैदान में उतारा था। यहां भी पंडित सिंह का मैनेजमेंट चला और बृजभूषण शरण सिंह को अपने नंदिनीनगर महाविद्यालय के प्रशासक रामकृपाल सिंह की पुत्र वधू ज्योति सिंह का नामांकन वापस कराना पड़ा था।
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इसमें पंडित सिंह की बहू श्रद्धा सिंह पत्नी सूरज सिंह निर्विरोध निर्वाचित हुई थीं और अब नए मैनेजमेंट से जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी भी निर्विरोध हथिया ली। इससे 51 जिला पंचायत सदस्य देखते रह गए। उन्हें वोट डालने की नौबत ही नहीं आई।
सपा की अग्रिम पंक्ति में शामिल एवं मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के खास माने जाने वाले करनैलगंज के विधायक योगेश प्रताप सिंह को पहले मंत्री पद से बर्खास्त किया गया।
योगेश प्रताप सिंह को मैनेज करने के लिए हाल ही में जिले में आए शिवपाल सिंह यादव ने योगेश प्रताप सिंह की पत्नी विजय लक्ष्मी सिंह को सपा से जिला पंचायत अध्यक्ष का प्रत्याशी बनाया था।
योगेश मंत्री पद जाने का दुख भूलकर जिला पंचायत अध्यक्ष की तैयारी कर रहे थे कि इतने में पंडित सिंह ने पांसा पलट दिया और योगेश प्रताप सिंह की पत्नी का टिकट भी कटवा दिया।
वर्ष 2010 में हुए जिला पंचायत अध्यक्ष पद के चुनाव में भी निर्विरोध निर्वाचन हुआ था। 2010 में बृजभूषण शरण सिंह सपा में थे। पंडित सिंह व योगेश प्रताप सिंह भी सपा में थे।
इस चुनाव में बसपा से पूर्व विधायक रामपाल सिंह की पुत्र वधू प्रतिभा सिंह मैदान में थीं। भाजपा से कोई प्रत्याशी नहीं था। सपा से योगेश प्रताप सिंह की पत्नी विजय लक्ष्मी सिंह चुनाव मैदान में थीं।
दोनों प्रत्याशियों ने नामांकन कर दिया था, लेकिन बृजभूषण शरण सिंह के मैनेजमेंट ने प्रतिभा सिंह को मैदान से ही बाहर कर दिया। ऐन वक्त पर प्रतिभा सिंह ने विजय लक्ष्मी सिंह को वाकओवर दे दिया था और विजय लक्ष्मी सिंह चुनाव जीत गई थीं।
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इससे भाजपा के समर्थन से जीत हासिल करने वाले जिला पंचायत सदस्य भी हतप्रभ हैं और संगठन कुछ ठोस बोलने को तैयार नहीं है।
सात जनवरी को वोट डालने की 51 जिला पंचायत सदस्यों की हसरत धरी की धरी रह गई। वजीरगंज दक्षिणी सीट से कृषि मंत्री विनोद कुमार उर्फ पंडित सिंह की पुत्र वधू को चुनाव लड़ाने के लिए नामांकन किया गया था।
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इस सीट पर बृजभूषण शरण सिंह ने भी अपने एक करीबी को मैदान में उतारा था। यहां भी पंडित सिंह का मैनेजमेंट चला और बृजभूषण शरण सिंह को अपने नंदिनीनगर महाविद्यालय के प्रशासक रामकृपाल सिंह की पुत्र वधू ज्योति सिंह का नामांकन वापस कराना पड़ा था।
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इसमें पंडित सिंह की बहू श्रद्धा सिंह पत्नी सूरज सिंह निर्विरोध निर्वाचित हुई थीं और अब नए मैनेजमेंट से जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी भी निर्विरोध हथिया ली। इससे 51 जिला पंचायत सदस्य देखते रह गए। उन्हें वोट डालने की नौबत ही नहीं आई।
सपा की अग्रिम पंक्ति में शामिल एवं मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के खास माने जाने वाले करनैलगंज के विधायक योगेश प्रताप सिंह को पहले मंत्री पद से बर्खास्त किया गया।
योगेश प्रताप सिंह को मैनेज करने के लिए हाल ही में जिले में आए शिवपाल सिंह यादव ने योगेश प्रताप सिंह की पत्नी विजय लक्ष्मी सिंह को सपा से जिला पंचायत अध्यक्ष का प्रत्याशी बनाया था।
योगेश मंत्री पद जाने का दुख भूलकर जिला पंचायत अध्यक्ष की तैयारी कर रहे थे कि इतने में पंडित सिंह ने पांसा पलट दिया और योगेश प्रताप सिंह की पत्नी का टिकट भी कटवा दिया।
वर्ष 2010 में हुए जिला पंचायत अध्यक्ष पद के चुनाव में भी निर्विरोध निर्वाचन हुआ था। 2010 में बृजभूषण शरण सिंह सपा में थे। पंडित सिंह व योगेश प्रताप सिंह भी सपा में थे।
इस चुनाव में बसपा से पूर्व विधायक रामपाल सिंह की पुत्र वधू प्रतिभा सिंह मैदान में थीं। भाजपा से कोई प्रत्याशी नहीं था। सपा से योगेश प्रताप सिंह की पत्नी विजय लक्ष्मी सिंह चुनाव मैदान में थीं।
दोनों प्रत्याशियों ने नामांकन कर दिया था, लेकिन बृजभूषण शरण सिंह के मैनेजमेंट ने प्रतिभा सिंह को मैदान से ही बाहर कर दिया। ऐन वक्त पर प्रतिभा सिंह ने विजय लक्ष्मी सिंह को वाकओवर दे दिया था और विजय लक्ष्मी सिंह चुनाव जीत गई थीं।