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चंदे से हो गया ‘खेल’, अब आया बजट
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गोंडा। बेसिक शिक्षा विभाग में बजट के खेल का दांव-पेच चलता रहता है, अभी भी अजब-गजब खेल का सिलसिला जारी है। बीते साल नवंबर व दिसंबर में ही स्कूल से लेकर जिला स्तरीय खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन हो गया। आयोजन के लिए ब्लॉक क्षेत्रवार शिक्षकों से चंदा लिया गया। चंदा यह कहकर लिया गया कि बजट ही नहीं है। अब जाकर खेल प्रतियोगिताओं के आयोजन के लिए 2.25 लाख रुपये का बजट आया है।
प्राथमिक स्कूलों में खेलों को बढ़ावा देने की मंशा से शासन की ओर से धनराशि आवंटित कर दी गई है। शासन की ओर से खेलकूद व स्कूलों में अन्य शैक्षिक कार्यों के लिए 2.25 लाख रुपये का बजट बुधवार को जारी हुआ है। इस धनराशि का उपयोग स्कूलों में खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन करने के लिए किया जाना था। विभागीय जानकारी के मुताबिक संकुल व ब्लॉक संसाधन केंद्रों के लिए पांच हजार रुपये आवंटित कर दिए गये हैं जबकि ये प्रतियोगिताएं पहले ही हो चुकी हैं। अब बजट जारी करने से विभाग में इसे ठिकाने लगाने की तैयारी शुरू हो गई है। (संवाद)
चौंकाने वाला है तय तिथि के बाद बजट देना
जिले में दो माह पूर्व ही संकुल, ब्लॉक और जिला स्तरीय प्रतियोगिताएं हो गई हैं। सरकारी बजट न होने के बावजूद शिक्षकों के सहयोग से और स्थानीय स्तर के प्रयास से प्रतियोगिताएं आयोजित कराई थीं। शिक्षकों ने व्यक्तिगत रूप से हजारों रुपये का चंदा जुटाकर खेल की तैयारी और प्रतियोगिताओं का आयोजन कराया था। शासन की ओर से धनराशि का आवंटन समय से हो गया होता तो बेहतर तैयारी के साथ खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन हुआ होता। समय से बजट मिला होता तो शिक्षकों को चंदा जुटाने की नौबत भी नहीं आती। विभाग की ओर से देरी के कारण बच्चों की तैयारी भी प्रभावित हुई।
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समय से खेल प्रतियोगिताओं के लिए बजट नहीं दिया गया जिससे शिक्षकों को व्यक्तिगत सहयोग करना पड़ा। हर ब्लॉक से 20-20 हजार रुपये एकत्र हुए थे। इसके बाद प्रतियोगिताओं के आयोजन हो सके। अब बजट देने का क्या मतलब है।
आनंद कुमार त्रिपाठी, जिलाध्यक्ष, प्राथमिक शिक्षक संघ
बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन कराया गया। कई स्तर पर आयोजन हुए हैं, बजट अब मिला है। बजट का सदुपयोग किया जाएगा। राम प्रताप सिंह, बीएसए
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प्राथमिक स्कूलों में खेलों को बढ़ावा देने की मंशा से शासन की ओर से धनराशि आवंटित कर दी गई है। शासन की ओर से खेलकूद व स्कूलों में अन्य शैक्षिक कार्यों के लिए 2.25 लाख रुपये का बजट बुधवार को जारी हुआ है। इस धनराशि का उपयोग स्कूलों में खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन करने के लिए किया जाना था। विभागीय जानकारी के मुताबिक संकुल व ब्लॉक संसाधन केंद्रों के लिए पांच हजार रुपये आवंटित कर दिए गये हैं जबकि ये प्रतियोगिताएं पहले ही हो चुकी हैं। अब बजट जारी करने से विभाग में इसे ठिकाने लगाने की तैयारी शुरू हो गई है। (संवाद)
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चौंकाने वाला है तय तिथि के बाद बजट देना
जिले में दो माह पूर्व ही संकुल, ब्लॉक और जिला स्तरीय प्रतियोगिताएं हो गई हैं। सरकारी बजट न होने के बावजूद शिक्षकों के सहयोग से और स्थानीय स्तर के प्रयास से प्रतियोगिताएं आयोजित कराई थीं। शिक्षकों ने व्यक्तिगत रूप से हजारों रुपये का चंदा जुटाकर खेल की तैयारी और प्रतियोगिताओं का आयोजन कराया था। शासन की ओर से धनराशि का आवंटन समय से हो गया होता तो बेहतर तैयारी के साथ खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन हुआ होता। समय से बजट मिला होता तो शिक्षकों को चंदा जुटाने की नौबत भी नहीं आती। विभाग की ओर से देरी के कारण बच्चों की तैयारी भी प्रभावित हुई।
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समय से खेल प्रतियोगिताओं के लिए बजट नहीं दिया गया जिससे शिक्षकों को व्यक्तिगत सहयोग करना पड़ा। हर ब्लॉक से 20-20 हजार रुपये एकत्र हुए थे। इसके बाद प्रतियोगिताओं के आयोजन हो सके। अब बजट देने का क्या मतलब है।
आनंद कुमार त्रिपाठी, जिलाध्यक्ष, प्राथमिक शिक्षक संघ
बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन कराया गया। कई स्तर पर आयोजन हुए हैं, बजट अब मिला है। बजट का सदुपयोग किया जाएगा। राम प्रताप सिंह, बीएसए