UP News: जन आरोग्य मेले की सच्चाई ने उड़ाए होश, डॉक्टर व फार्मासिस्ट नदारद... सुरक्षा गार्ड ने बांटी दवाएं
यूपी के गोंडा में जन आरोग्य मेले की सच्चाई होश उड़ाने वाली है। यहां डॉक्टर व फार्मासिस्ट नदारद रहे। आशा बहू धूप सेकती रहीं। सुरक्षा गार्ड ने दवा काउंटर में रोगियों को दवाएं बांटी।
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उत्तर प्रदेश में मरीजों को स्थानीय स्तर पर विशेषज्ञ से उपचार, जांच व दवाओं की सुविधा मुहैया कराने के लिए मुख्यमंत्री जन आरोग्य मेला आयोजित किया जाता है। गोंडा जिले में यह आरोग्य मेला महज खानापूर्ति तक सीमित रहते दिख रहा है। सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल आरोग्य मेले में डॉक्टर व फार्मासिस्ट नहीं, बल्कि सुरक्षा गार्ड लाल-पीली गोली बांटकर मरीजों की सेहत से खिलवाड़ कर रहे हैं। रविवार को गोंडा के 52 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर मेले के आयोजन का दावा किया गया। लेकिन, जमीनी हकीकत दावे से इतर निकली।
सीएचसी काजीदेवर क्षेत्र के पीएचसी पंतनगर में अव्यवस्थाएं नजर आईं। आशा बहू बिंदू शुक्ला, ऊषा यादव व किरण शुक्ला बाहर बैठी धूप सेक रही थीं। दवा वितरण काउंटर पर गार्ड बरकत अली बैठे थे। उन्होंने बताया कि सर्दी, जुकाम व बुखार के मरीजों को दवा दे दी है। मेले में एलटी नेहा व वार्ड सहायक उपमा यादव मौजूद रहीं। गार्ड ने बताया कि डॉक्टर पाटला पांडेय व फार्मासिस्ट दीपेश वर्मा थोड़ी देर में आएंगे।
मेले की खानापूर्ति कर दी गई
वहीं सीएचसी छपिया के मसकनवा पीएचसी पर विशेषज्ञ नहीं बल्कि आयुष चिकित्सक ने एलोपैथ उपचार कर मेले की खानापूर्ति कर दी। दोपहर तक 20 मरीज उपचार कराने पहुंचे। इनमें सर्दी, जुकाम, बुखार व पेट दर्द से संबंधित रोगी थे। इस दौरान आयुष चिकित्सक डॉ. पवन पटवा, एलए छांगुर प्रसाद व बार्ड बॉय अनूप कुमार मौजूद रहे।सर्दी-जुकाम व बुखार के मरीज पहुंचे
इटियाथोक के पीएचसी तकिया मनोहर में किसी एमबीबीएस या विशेषज्ञ चिकित्सक की ड्यूटी नहीं लगाई गई। यहां राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत आयुष चिकित्सक डॉ. दुर्गविजय ने 30 मरीजों का उपचार किया। इसमें सर्दी-जुकाम व बुखार के मरीज रहे। यहां स्टाफ नर्स रागिनी तिवारी व फार्मासिस्ट प्रदीप राव मौजूद रहे।
आरोग्य मेले में क्या होने चाहिए व्यवस्थाएं
- मेले में एमबीबीएस, आयुष व आरबीएसके के तीन से चार डॉक्टरों की उपस्थिति होनी चाहिए।
- मेडिकल कॉलेज के रेजीडेंट व पैरामेडिकल के प्रशिक्षुओं का सहयोग लिया जाना चाहिए।
- खून की सभी प्रकार की जांचें व आवश्यक दवाओं की उपलब्धता होनी चाहिए।
- आशा, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व एएनएम की ओर से स्टॉल लगाकर विभिन्न स्वास्थ्य योजनाओं में पंजीकरण करना चाहिए।
- नुक्कड़ नाटक के माध्यम से संस्थागत प्रसव, टीकाकरण व स्तनपान के लिए जागरुकता लानी चाहिए।
- सभी पीएचसी पर कम से कम एक महिला चिकित्साधिकारी की उपस्थिति हो।