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काम नहीं करना है तो छोड़ कर चले जाओ अस्पताल

Sat, 08 Oct 2016 11:07 PM IST
अमर उजाला/गोंडा
अमर उजाला/गोंडा Updated Sat, 08 Oct 2016 11:07 PM IST
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do not work, So get left the hospital
अस्पताल का जायजा लेते मिशन निदेशक - फोटो : अमर उजाला
अगर काम ठीक से करना नहीं आता है तो अस्पताल में बैठने की क्या जरूरत है। इसलिए अच्छा यही होगा कि काम छोड़कर चले जाओ। शनिवार को एनआरएचएम के मिशन निदेशक आलोक कुमार ने यह नसीहत जिला व महिला अस्पताल में कार्यरत हर उस व्यक्ति को दी, जो प्रत्यक्ष व परोक्ष रूप से कहीं न कहीं स्वास्थ्य विभाग से जुड़ा है।
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जिला व महिला अस्पताल के निरीक्षण में जहां मिशन निदेशक को जगह-जगह गंदगी पसरी मिली तो वहीं प्रसूता महिलाओं से लेकर नवजात बच्चों के होने वाले टीकाकरण व उनकी देखरेख में तमाम खामियां मिलीं। जिसके लिए मिशन निदेशक ने महिला अस्पताल के सीएमएस को 15 दिनों की मोहलत व्यवस्था सुधार के लिए दी है। अगर इस बीच महिला अस्पताल की व्यवस्थाओं में सुधार नहीं होता है तो इसका खामियाजा सीएमएस को भुगतना पड़ेगा।
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केंद्र सरकार के 10वें कामन रिव्यू मिशन के तहत नवंबर में भारत सरकार की टीम गोंडा आ रही है, जो यहां स्वास्थ्य सेवाओं की जांच करेगी। इसके लिए प्रदेश स्तरीय एनआरएचएम के अधिकारी जिले का दौरा कर रहे हैं।
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इसी को लेकर शनिवार को दौरे पर आए मिशन निदेशक को जिला व महिला अस्पताल की पूरी व्यवस्था ही गड़बड़ नजर आई। जिला व महिला अस्पताल में मिशन निदेशक आलोक कुमार को गंदगी पसरी दिखी तो वहीं महिला अस्पताल में होने वाले टीकाकरण में खामियां मिलीं। जिस पर उन्होंने स्वास्थ्य अधिकारियों व कर्मचारियों को खूब खरी-खोटी सुनाई।

महिला अस्पताल में तैनात डॉक्टरों ने मिशन निदेशक के दौरे में ड्रेस कोड (एप्रन) तक का ध्यान नहीं रखा और सिविल ड्रेस में उनके सामने आ गए। मिशन निदेशक आलोक कुमार ने पहले महिला अस्पताल का दौरा किया तो बाद में जिला अस्पताल का। लेकिन वह अस्पताल की किसी भी सेवा से संतुष्ट नहीं हुए। वहीं, गोंडा पहुंचने से पहले उन्होंने सीएचसी करनैलगंज का भी दौरा किया। जहां एक कमरे का ताला तोड़कर उसमें रखा घरेलू सामान निकलवाया गया। जबकि यहां भी उन्हें पूरे अस्पताल परिसर गंदगी पसरी दिखी। 

मिशन निदेशक आलोक कुमार ने मरीजों की सहूलियत के लिए जल्द ही जिला अस्पताल में 10 बेड का डायलसिस वार्ड बनाए जाने की बात कही है। जबकि एमआरआई जांच की सुविधा भी जिले में मुहैया कराने का आश्वासन दिया।


पत्रकारों से बातचीत के दौरान मिशन निदेशक ने बताया कि जिले में व्यापक पैमाने पर स्वास्थ्य सेवाएं अस्त-व्यस्त मिली हैं। जिसके लिए दोनों अस्पतालों के जिम्मेदारों और यहां तक कि सीएमओ को सख्त हिदायत दी गई है कि वह 15 दिनों में सारी व्यवस्थाओं में सुधार करें। नहीं तो इसके बाद किसी को बख्शा नहीं जाएगा।
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