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डीएम ने अफसरों को भेजा कोतवाली तो निकली 17 हजार बोरी खाद
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गोंडा। किसानों को समितियों से उर्वरक नहीं मिल पा रही थी। शोर था कि खाद की कमी है, सोमवार को अचानक जिलाधिकारी मार्कंडेय शाही के तेवर सख्त हो गए। उन्होंने खाद की उपलब्धता की पड़ताल की तो पता चला कि खाद है।
समितियों को भेजी नहीं जा रही है। इससे खफा डीएम ने किसानों से जुड़े दो अधिकारियों को बुलाया और कोतवाली भेज दिया। इसके बाद अधिकारियों में खलबली मच गई। अचानक 17 हजार बोरी खाद मिल गई और वितरण भी शुुरू हो गया। बाद में दोनों अधिकारियों को कोतवाली से छोड़ दिया गया।
जिले में बीते दिनों किसानों के आंदोलन को समाप्त कराने में प्रशासन को रात दिन एक करना पड़ा। इस दौरान जिलाधिकारी बार- बार अन्य अफसरों को हिदायत दे रहे थे कि कोई और समस्या न होने पाए।
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बीते दिनों बारिश होने के बाद किसानों में उर्वरक की मांग बढ़ गई। वहीं समितियों को खाद ही नहीं मिला। जिससे किसानों में आक्रोश बढ़ रहा था। सोमवार को डीएम की इसकी जानकारी हुई तो वह भड़क गए।
उन्होंने पीसीएफ और इफको के अधिकारियों को बुलाकर जानकारी की। बताया जा रहा है कि दोनों अधिकारी डीएम को संतुष्ट नहीं कर सके। जिस पर वह खफा हो गए। डीएम ने कहा कि खाद जब है तो किसानों को क्यों नहीं मिल रही है। इसका जवाब देने में हिचकने पर उनका पारा गरम हो गया।
डीएम ने कोतवाल को बुलाकर दोनों अधिकारियों को कोतवाली भिजवा दिया। चेतावनी दिया कि खाद किसानों तक न पहुंची तो एफआईआर होगी। इसके बाद आनन-फानन में 17 हजार बोरी खाद गोदामों से निकली और आवंटन शुरू हो गया। इसके बाद दोनों अधिकारियों को चेतावनी देकर आवंटन की कार्रवाई पूरी कराने के लिए भेज दिया गया। बताया जा रहा है कि अधिकारियों की लापरवाही से विपरीत स्थिति बनती है और इसके लिए प्रशासन को तनाव लेना पड़ता है।
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समितियों को भेजी नहीं जा रही है। इससे खफा डीएम ने किसानों से जुड़े दो अधिकारियों को बुलाया और कोतवाली भेज दिया। इसके बाद अधिकारियों में खलबली मच गई। अचानक 17 हजार बोरी खाद मिल गई और वितरण भी शुुरू हो गया। बाद में दोनों अधिकारियों को कोतवाली से छोड़ दिया गया।
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जिले में बीते दिनों किसानों के आंदोलन को समाप्त कराने में प्रशासन को रात दिन एक करना पड़ा। इस दौरान जिलाधिकारी बार- बार अन्य अफसरों को हिदायत दे रहे थे कि कोई और समस्या न होने पाए।
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बीते दिनों बारिश होने के बाद किसानों में उर्वरक की मांग बढ़ गई। वहीं समितियों को खाद ही नहीं मिला। जिससे किसानों में आक्रोश बढ़ रहा था। सोमवार को डीएम की इसकी जानकारी हुई तो वह भड़क गए।
उन्होंने पीसीएफ और इफको के अधिकारियों को बुलाकर जानकारी की। बताया जा रहा है कि दोनों अधिकारी डीएम को संतुष्ट नहीं कर सके। जिस पर वह खफा हो गए। डीएम ने कहा कि खाद जब है तो किसानों को क्यों नहीं मिल रही है। इसका जवाब देने में हिचकने पर उनका पारा गरम हो गया।
डीएम ने कोतवाल को बुलाकर दोनों अधिकारियों को कोतवाली भिजवा दिया। चेतावनी दिया कि खाद किसानों तक न पहुंची तो एफआईआर होगी। इसके बाद आनन-फानन में 17 हजार बोरी खाद गोदामों से निकली और आवंटन शुरू हो गया। इसके बाद दोनों अधिकारियों को चेतावनी देकर आवंटन की कार्रवाई पूरी कराने के लिए भेज दिया गया। बताया जा रहा है कि अधिकारियों की लापरवाही से विपरीत स्थिति बनती है और इसके लिए प्रशासन को तनाव लेना पड़ता है।