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नदी की कटान से बढ़ी ग्रामीणों की मुश्किलें

Sat, 21 Sep 2019 10:27 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sat, 21 Sep 2019 10:27 PM IST
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Difficulties of the villagers increased due to Ghaghra logging
गोंडा के नकहरा में बाढ़ के पानी से घिरे घर, बाहर निकलते लोग। - फोटो : GONDA
करनैलगंज (गोंडा)। ऊफनाई घाघरा दो दिनों से शांत है। पानी भी बहुत तेजी से घटने लगा है। बीते दो दिन पहले जहां घाघरा का जलस्तर खतरे के निशान को पार करते हुए इससे ऊपर 42 सेमी तक पहुंच गया था। तो वहीं अब यह तेजी के साथ घटने लगा है।
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शनिवार को घाघरा का जलस्तर खतरे के निशान से मात्र 8 सेमी ऊपर रह गया है। घाघरा के तेवर में आयी कमी से सिंचाई विभाग ने तो राहत की सांस ली है। मगर घटता पानी लगातार कुछ इलाकों में तेजी से कटान कर रहा है। जिससे किसानों की फसल खेत समेत तबाह होती जा रही है। पानी के जमाव से लोगों के घर गिरने शुरू हो चुके हैं। यहां के लोगों का कहना है कि बाढ़ का पानी तो लौटने लगा, जो राहत की बात है। लेकिन लोगों के लिए मुसीबत छोड़ कर जा रहा है।
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एक ओर जहां करोड़ों रुपये की फसल बर्बाद हो गयी। वहीं दूसरी ओर बाढ़ के जमे पानी में फसलों के सड़ने का सिलसिला शुरू हो गया है। गांव के गली व गढ्ढों में जमा पानी बीमारी को आमंत्रण देने को तैयार है। केन्द्रीय जल आयोग एल्गिन ब्रिज घाघरा घाट से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार शनिवार को घाघरा के जलस्तर में व्यापक कमी आयी। खतरे के निशान से 42 सेमी ऊपर बह रही नदी घट कर अब खतरे के निशान से मात्र 8 सेमी रह गयी है। तो वहीं नदी में बैराजों से होने वाले डिस्चार्ज में भी बड़ी कमी दर्ज की गयी है। अब नदी में जल का डिस्चार्ज मात्र 77 हजार 331 क्यूसेक रह गया है।
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बाढ़ पीड़ितों के लिए यह राहत भरी खबर हो सकती है। उसके बावजूद बाढ़ पीड़ितों की मुश्किलें अभी कम नहीं होने वाली हैं। लगातार पहाड़ी नालों का पानी बैराजों के जरिये घाघरा में छोड़ा जा रहा है। जिससे बरसात के कारण घाघरा के उफान से राहत की उम्मीद नहीं है। बांध पर मौजूद सहायक अभियंता अमरेश सिंह व अवर अभियंता एमके सिंह का कहना है कि पानी लगातार घट रहा है। कटान नहीं है। बांध सुरक्षित है।
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