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पूजा-अर्चना को उमड़े भक्त
बलरामपुर/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 19 Oct 2015 11:44 PM IST
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नवरात्र षष्ठमी पर सोमवारा को ब्रजमंडल की अधिष्ठात्री देवी कात्यायनी की पूजा-अर्चना की गई। इसके लिए देवी मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ जुटी। भक्तों ने कतारबद्घ होकर मां कत्यायनी की पूजा-अर्चना कर परिवार की सुख-समृद्घि का आशीर्वाद मांगा। शक्तिपीठ देवीपाटन एवं सिद्घपीठ बिजलेश्वरी देवी मंदिर में मुंडन, जनेऊ एवं कर्ण छेदन आदि संस्कार कराने वालों का भी पूरे दिन तांता लगा रहा।
देवी भगवती की छठवीं शक्ति का नाम कात्यायनी है। नवरात्र षष्ठमी के दिन माता के इसी स्वरुप की पूजा-अर्चना की जाती है। धर्म ग्रंथों के अनुसार कात्यायन ऋषि ने कठिन तप करके माता से वरदान मांगा कि वह उनके घर पुत्री रुप में जन्म लें।
वरदान स्वरुप माता जगदंबा ने अपना अजन्मा स्वरुप त्याग कर ऋषि कात्यायन के कुल में जन्म लिया। ऋषि कात्यायन के कुल में जन्म लेने के कारण ही देवी को कात्यायनी कहा जाता है।
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ऐसी मान्यता है कि नवरात्र षष्ठमी के दिन जागरण करके माता के इस स्वरुप का जप करने से भक्तों को मां की कृपा का फल अवश्य मिलता है। देवी भक्तों के सभी मनोरथ पूर्ण करती हैं।
नवरात्र के षष्ठी के दिन देवी मंदिरों में माता के इसी स्वरुप की पूजा-अर्चना के लिए भक्तों की भारी भीड़ जुटी। शक्तिपीठ देवीपाटन मंदिर, सिद्घपीठ बिजलेश्वरी देवी मंदिर, तुलसीपुर स्थित नई देवी मंदिर, पचपेड़वा स्थित रहिया देवी मंदिर, उतरौला स्थित ज्वाला देवी मंदिर, नगर स्थित झारखंडी मंदिर, संतोषी माता मंदिर, कालीथान, सम्मय माता मंदिर व बड़िकी बहिनी मंदिर में दर्शन व पूजन के लिए सुबह से देर रात तक भक्तों की भीड़ जुटी रही।
नवरात्र षष्ठमी के दिन सोमवार को शक्तिपीठ देवीपाटन मंदिर एवं सिद्घपीठ बिजलेश्वरी देवी मंदिर में मुंडन, जनेऊ एवं कर्ण छेदन संस्कार के लिए भारी भीड़ जुटी। लोगों ने बच्चों का मुंडन व कर्ण छेदन संस्कार कराकर देवी का आशीर्वाद लिया।
नवरात्र के छठवें दिन रविवार की रात रोटरी मेडिकल सेंटर धुसाह में देवी जागरण का आयोजन किया गया। जागरण में इनर व्हील क्लब की महिला सदस्यों द्वारा प्रस्तुत देवी गीतों को सुनकर लोग झूम उठे। जागरण के अंत में मां जगदंबा की आरती की गई। आरती के बाद रोटरी क्लब के सदस्यों द्वारा प्रसाद वितरण किया गया।
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देवी भगवती की छठवीं शक्ति का नाम कात्यायनी है। नवरात्र षष्ठमी के दिन माता के इसी स्वरुप की पूजा-अर्चना की जाती है। धर्म ग्रंथों के अनुसार कात्यायन ऋषि ने कठिन तप करके माता से वरदान मांगा कि वह उनके घर पुत्री रुप में जन्म लें।
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वरदान स्वरुप माता जगदंबा ने अपना अजन्मा स्वरुप त्याग कर ऋषि कात्यायन के कुल में जन्म लिया। ऋषि कात्यायन के कुल में जन्म लेने के कारण ही देवी को कात्यायनी कहा जाता है।
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ऐसी मान्यता है कि नवरात्र षष्ठमी के दिन जागरण करके माता के इस स्वरुप का जप करने से भक्तों को मां की कृपा का फल अवश्य मिलता है। देवी भक्तों के सभी मनोरथ पूर्ण करती हैं।
नवरात्र के षष्ठी के दिन देवी मंदिरों में माता के इसी स्वरुप की पूजा-अर्चना के लिए भक्तों की भारी भीड़ जुटी। शक्तिपीठ देवीपाटन मंदिर, सिद्घपीठ बिजलेश्वरी देवी मंदिर, तुलसीपुर स्थित नई देवी मंदिर, पचपेड़वा स्थित रहिया देवी मंदिर, उतरौला स्थित ज्वाला देवी मंदिर, नगर स्थित झारखंडी मंदिर, संतोषी माता मंदिर, कालीथान, सम्मय माता मंदिर व बड़िकी बहिनी मंदिर में दर्शन व पूजन के लिए सुबह से देर रात तक भक्तों की भीड़ जुटी रही।
नवरात्र षष्ठमी के दिन सोमवार को शक्तिपीठ देवीपाटन मंदिर एवं सिद्घपीठ बिजलेश्वरी देवी मंदिर में मुंडन, जनेऊ एवं कर्ण छेदन संस्कार के लिए भारी भीड़ जुटी। लोगों ने बच्चों का मुंडन व कर्ण छेदन संस्कार कराकर देवी का आशीर्वाद लिया।
नवरात्र के छठवें दिन रविवार की रात रोटरी मेडिकल सेंटर धुसाह में देवी जागरण का आयोजन किया गया। जागरण में इनर व्हील क्लब की महिला सदस्यों द्वारा प्रस्तुत देवी गीतों को सुनकर लोग झूम उठे। जागरण के अंत में मां जगदंबा की आरती की गई। आरती के बाद रोटरी क्लब के सदस्यों द्वारा प्रसाद वितरण किया गया।