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Gonda News: 2.50 करोड़ से होगा देवीपाटन तीर्थ विकास बोर्ड का गठन
Thu, 29 Feb 2024 11:53 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Thu, 29 Feb 2024 11:53 PM IST
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बलरामपुर। अयोध्या के पड़ोसी और नेपाल राष्ट्र के सीमावर्ती देवीपाटन मंडल में आध्यात्मिक व पौराणिक स्थलों से जुड़ी विकास योजनाओं को जल्द ही रफ्तार मिलेगी।
प्रदेश सरकार ने इसके लिए देवीपाटन तीर्थ विकास परिषद (बोर्ड) का गठन किया है। इसके माध्यम से मंडल के चारों जिलों के धार्मिक स्थलों का पुनरोद्धार होगा।
इसके लिए बोर्ड के स्तर से सर्वे कराकर एक कार्य योजना तैयार कराई जाएगी। बोर्ड गठन के लिए शासन ने फिलहाल 2.50 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया है।
काशी, मथुरा, अयोध्या व विंध्याचल की तर्ज पर ही देवीपाटन तीर्थ विकास बोर्ड का गठन करने के लिए बजट में भी विशेष प्रावधान किया गया है। बोर्ड का मुख्यालय बलरामपुर जिले में बनेगा।
मंडल के आयुक्त बोर्ड के पदेन अध्यक्ष होंगे। इसके अलावा पर्यटन, धर्मार्थ कार्य समेत विभिन्न विभागों के अधिकारी भी बोर्ड के नामित सदस्य होंगे।
शासन ने बोर्ड के कार्यालय व भवन निर्माण का प्रस्ताव जिला प्रशासन से जुड़े अफसरों से मांगा है। इसके बाद से ही प्रशासन ने तुलसीपुर में बोर्ड का कार्यालय स्थापित किए जाने की कवायद भी शुरू कर दी है।
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इसके लिए मां पाटेश्वरी कॉरिडोर में ही स्थान मुहैय्या कराया जाएगा। जल्दी बोर्ड कार्यालय के शुभारंभ की भी तैयारी है। ताकि नए वित्तीय वर्ष के लिए बोर्ड स्तर से योजनाओं को तैयार किए जाने का कार्य किया जा सके। संवाद
पर्यटन व धार्मिक स्थलों के विकास की बनेगी रणनीति
गठित तीर्थ विकास बोर्ड पर्यटन व धार्मिक स्थलों के विकास का खाका पूरे देवीपाटन मंडल में खींचेगा। इसमें बलरामपुर जिले के मां पाटेश्वरी देवी धाम के साथ ही 15 अन्य मंदिरों को शामिल किया जाएगा। इसके साथ ही गोंडा जिले के छपिया स्वामी नारायण मंदिर, श्रवण पाकड़, झालीधाम, मां बाराही देवी मंदिर, पतंजलि आश्रम कोड़र, पराशर ऋषि आश्रम, बराह भगवान मंदिर, तिर्रेमनोराम मंदिर के साथ ही अन्य पौराणिक स्थलों के विकास के साथ ही बहराइच व श्रावस्ती जिले के धार्मिक स्थलों के कायाकल्प का काम भी होगा।
जिलाधिकारी अरविंद सिंह के अनुसार तीर्थ विकास बोर्ड का मुख्यालय जिले में ही तय किया गया है। इससे धार्मिक स्थलों के विकास के साथ ही पर्यटन स्थलों को एक नया मुकाम मिलेगा। जल्द ही बोर्ड के गठन की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी।
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प्रदेश सरकार ने इसके लिए देवीपाटन तीर्थ विकास परिषद (बोर्ड) का गठन किया है। इसके माध्यम से मंडल के चारों जिलों के धार्मिक स्थलों का पुनरोद्धार होगा।
इसके लिए बोर्ड के स्तर से सर्वे कराकर एक कार्य योजना तैयार कराई जाएगी। बोर्ड गठन के लिए शासन ने फिलहाल 2.50 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया है।
काशी, मथुरा, अयोध्या व विंध्याचल की तर्ज पर ही देवीपाटन तीर्थ विकास बोर्ड का गठन करने के लिए बजट में भी विशेष प्रावधान किया गया है। बोर्ड का मुख्यालय बलरामपुर जिले में बनेगा।
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मंडल के आयुक्त बोर्ड के पदेन अध्यक्ष होंगे। इसके अलावा पर्यटन, धर्मार्थ कार्य समेत विभिन्न विभागों के अधिकारी भी बोर्ड के नामित सदस्य होंगे।
शासन ने बोर्ड के कार्यालय व भवन निर्माण का प्रस्ताव जिला प्रशासन से जुड़े अफसरों से मांगा है। इसके बाद से ही प्रशासन ने तुलसीपुर में बोर्ड का कार्यालय स्थापित किए जाने की कवायद भी शुरू कर दी है।
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इसके लिए मां पाटेश्वरी कॉरिडोर में ही स्थान मुहैय्या कराया जाएगा। जल्दी बोर्ड कार्यालय के शुभारंभ की भी तैयारी है। ताकि नए वित्तीय वर्ष के लिए बोर्ड स्तर से योजनाओं को तैयार किए जाने का कार्य किया जा सके। संवाद
पर्यटन व धार्मिक स्थलों के विकास की बनेगी रणनीति
गठित तीर्थ विकास बोर्ड पर्यटन व धार्मिक स्थलों के विकास का खाका पूरे देवीपाटन मंडल में खींचेगा। इसमें बलरामपुर जिले के मां पाटेश्वरी देवी धाम के साथ ही 15 अन्य मंदिरों को शामिल किया जाएगा। इसके साथ ही गोंडा जिले के छपिया स्वामी नारायण मंदिर, श्रवण पाकड़, झालीधाम, मां बाराही देवी मंदिर, पतंजलि आश्रम कोड़र, पराशर ऋषि आश्रम, बराह भगवान मंदिर, तिर्रेमनोराम मंदिर के साथ ही अन्य पौराणिक स्थलों के विकास के साथ ही बहराइच व श्रावस्ती जिले के धार्मिक स्थलों के कायाकल्प का काम भी होगा।
जिलाधिकारी अरविंद सिंह के अनुसार तीर्थ विकास बोर्ड का मुख्यालय जिले में ही तय किया गया है। इससे धार्मिक स्थलों के विकास के साथ ही पर्यटन स्थलों को एक नया मुकाम मिलेगा। जल्द ही बोर्ड के गठन की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी।