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जल संरक्षण को बेटियों ने संभाली कमान
अमर उजाला/गोंडा
Updated Tue, 10 May 2016 11:12 PM IST
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ग्रामीणों काो समझातीं लड़कियां
- फोटो : अमर उजाला
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बुंदेलखंड के जल संकट को लेकर समाचार पत्रों में छप रहीं खबरों से जिम्मेदार भले ही सबक न ले रहे हों, लेकिन इन खबरों ने जिले की इंटरमीडिएट की एक छात्रा को इस कदर प्रभावित किया कि उसने पानी की बर्बादी रोकने की ठान ली। गांव की यह बेटी पिछले एक माह से गांव-गांव घूमकर लोगों को जल संकट के प्रति जागरूक कर रही है और पानी की बर्बादी रोकने की अपील कर रही है।
जूली को सिर्फ पानी बचाने की ही फिक्र नहीं है, बल्कि इस गर्मी के मौसम में उसे पशु-पक्षियों की भी चिंता है और इसके लिए वह गांव के बाहर पेड़ों पर चढ़कर मटके बांधती है और खुद इन मटकों में पानी भरती है। जूली का यह प्रयास अब परवान चढ़ चुका है। एक छोटे से गांव के दायरे से निकल कर अभियान 22 गांवों तक पहुंच चुका है।
जिले के धानेपुर थाना क्षेत्र के ग्राम पंचायत रूद्रगढ़ नौसी के छोटे से मजरा पंडितपुरवा के रहने वाले दिनेश कुमार पांडेय पेशे से सफाईकर्मी हैं। इनकी बेटी फूलकुमारी उर्फ जूली पांडेय चार भाई बहनों में सबसे बड़ी है।
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राजकीय आश्रम पद्धति आवासीय बालिका विद्यालय विशंभरपुर में पढ़ने वाली फूलकुमारी पढ़ने में तेज है और इसी वर्ष उसने इंटर की परीक्षा दी है। फूलकुमारी ने बताया कि परीक्षा समाप्त होने के बाद जब वह छुट्टियों में घर आई तो उसने समाचार पत्र में बुंदेलखंड के जल संकट के बारे में छपी खबर पढ़ीं। उस खबर में छपी तस्वीरों ने उसे झकझोर कर रख दिया।
फूलकुमारी ने बताया कि उसने देखा कि बुंदेलखंड के लोग जहां पानी के लिए तरस रहे हैं, वहीं अपने यहां लोग पानी की बर्बादी करने में लगे हैं। उसने तय किया कि इस तरह से पानी की बर्बादी रोकने के लिए वह लोगाें को जागरूक करेगी।
अपने इस अभियान के लिए उसने अपने परिवारीजनों से चर्चा की तो बेटी के हौसले को देख घरवालों ने भी सहमति दे दी। इसके बाद यह बेटी जल संरक्षण पर जागरूकता लाने केलिए निकल पड़ी।
फूलकुमारी ने इस अभियान की शुरुआत अपने घर व गांव से की और लोगों को पानी की कमी से होने वाले संकट के प्रति सचेत करना शुरू किया। फूलकुमारी के हौसले को देखकर गांव की अन्य बेटियां भी इस अभियान से जुड़ गईं। इस एक माह में ही फूलकुमारी की टीम में 30 से अधिक बेटियां जुड़ चुकी हैं।
ग्रामीणाें को पानी की कीमत समझाने के लिए बेटियों की यह टीम जल संरक्षण पर स्लोगन लिखी तख्तियों को साइकिल पर बांधकर निकल पड़ती है और गांव-गांव जाकर लोगों से पानी की बर्बादी रोकने की अपील करती है।
फूलकुमारी व उसकी टीम का यह अभियान आसपास के कई गांवों में पहुंच चुका है। हरिहरपुर गांव के गांगाराम वर्मा, पंडितपुरवा के गणेश शंकर पांडेय व रामपुर दुबावल गांव निवासी शिवशंकर पांडेय बताते हैं कि फूलकुमारी की इस मुहिम को पहले तो गांव के लोगों ने हल्के में लिया, लेकिन जब उसने आने वाले दिनों में पानी से होने वाले संकट के बारे में समझाना शुरू किया तो लोग चकित रह गए।
फूलकुमारी के इस अभियान में कीर्ति, रोशनी, रोहिणी, ज्योति, सीमा, संध्या, मंशा, अर्चना, उपासना, मोनू, साक्षी, महिमा, अनुराधा, आंचल, साधना व सुधा समेत 30 से अधिक बेटियां शामिल हो चुकी हैं और कंधे से कंधा मिलाकर जल संरक्षण के इस अभियान को आगे बढ़ा रही हैं।
छात्रा फूलकुमारी अपने इस अभियान की प्रेरणा अमर उजाला समाचार पत्र को मानती है। फूलकुमारी ने बताया कि उसे इसी समाचार पत्र में छपी खबर के माध्यम से बुंदेलखंड के जल संकट के बारे में जानकारी हुई। समाचार पत्र में छपी तस्वीरों ने उसके मन को हिलाकर रख दिया और उसे जल संरक्षण को लेकर अभियान चलाने की ठानी।
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जूली को सिर्फ पानी बचाने की ही फिक्र नहीं है, बल्कि इस गर्मी के मौसम में उसे पशु-पक्षियों की भी चिंता है और इसके लिए वह गांव के बाहर पेड़ों पर चढ़कर मटके बांधती है और खुद इन मटकों में पानी भरती है। जूली का यह प्रयास अब परवान चढ़ चुका है। एक छोटे से गांव के दायरे से निकल कर अभियान 22 गांवों तक पहुंच चुका है।
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जिले के धानेपुर थाना क्षेत्र के ग्राम पंचायत रूद्रगढ़ नौसी के छोटे से मजरा पंडितपुरवा के रहने वाले दिनेश कुमार पांडेय पेशे से सफाईकर्मी हैं। इनकी बेटी फूलकुमारी उर्फ जूली पांडेय चार भाई बहनों में सबसे बड़ी है।
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राजकीय आश्रम पद्धति आवासीय बालिका विद्यालय विशंभरपुर में पढ़ने वाली फूलकुमारी पढ़ने में तेज है और इसी वर्ष उसने इंटर की परीक्षा दी है। फूलकुमारी ने बताया कि परीक्षा समाप्त होने के बाद जब वह छुट्टियों में घर आई तो उसने समाचार पत्र में बुंदेलखंड के जल संकट के बारे में छपी खबर पढ़ीं। उस खबर में छपी तस्वीरों ने उसे झकझोर कर रख दिया।
फूलकुमारी ने बताया कि उसने देखा कि बुंदेलखंड के लोग जहां पानी के लिए तरस रहे हैं, वहीं अपने यहां लोग पानी की बर्बादी करने में लगे हैं। उसने तय किया कि इस तरह से पानी की बर्बादी रोकने के लिए वह लोगाें को जागरूक करेगी।
अपने इस अभियान के लिए उसने अपने परिवारीजनों से चर्चा की तो बेटी के हौसले को देख घरवालों ने भी सहमति दे दी। इसके बाद यह बेटी जल संरक्षण पर जागरूकता लाने केलिए निकल पड़ी।
फूलकुमारी ने इस अभियान की शुरुआत अपने घर व गांव से की और लोगों को पानी की कमी से होने वाले संकट के प्रति सचेत करना शुरू किया। फूलकुमारी के हौसले को देखकर गांव की अन्य बेटियां भी इस अभियान से जुड़ गईं। इस एक माह में ही फूलकुमारी की टीम में 30 से अधिक बेटियां जुड़ चुकी हैं।
ग्रामीणाें को पानी की कीमत समझाने के लिए बेटियों की यह टीम जल संरक्षण पर स्लोगन लिखी तख्तियों को साइकिल पर बांधकर निकल पड़ती है और गांव-गांव जाकर लोगों से पानी की बर्बादी रोकने की अपील करती है।
फूलकुमारी व उसकी टीम का यह अभियान आसपास के कई गांवों में पहुंच चुका है। हरिहरपुर गांव के गांगाराम वर्मा, पंडितपुरवा के गणेश शंकर पांडेय व रामपुर दुबावल गांव निवासी शिवशंकर पांडेय बताते हैं कि फूलकुमारी की इस मुहिम को पहले तो गांव के लोगों ने हल्के में लिया, लेकिन जब उसने आने वाले दिनों में पानी से होने वाले संकट के बारे में समझाना शुरू किया तो लोग चकित रह गए।
फूलकुमारी के इस अभियान में कीर्ति, रोशनी, रोहिणी, ज्योति, सीमा, संध्या, मंशा, अर्चना, उपासना, मोनू, साक्षी, महिमा, अनुराधा, आंचल, साधना व सुधा समेत 30 से अधिक बेटियां शामिल हो चुकी हैं और कंधे से कंधा मिलाकर जल संरक्षण के इस अभियान को आगे बढ़ा रही हैं।
छात्रा फूलकुमारी अपने इस अभियान की प्रेरणा अमर उजाला समाचार पत्र को मानती है। फूलकुमारी ने बताया कि उसे इसी समाचार पत्र में छपी खबर के माध्यम से बुंदेलखंड के जल संकट के बारे में जानकारी हुई। समाचार पत्र में छपी तस्वीरों ने उसके मन को हिलाकर रख दिया और उसे जल संरक्षण को लेकर अभियान चलाने की ठानी।