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अंतिम चरण की बोआई में डीएपी का पड़ा अकाल, भटक रहे किसान

Sun, 05 Dec 2021 10:36 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sun, 05 Dec 2021 10:36 PM IST
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DAP faced famine in soi, farmers wandering
गोंडा में सहकारी गोदाम वीरपुर कटरा। - फोटो : GONDA
गोंडा। रबी सीजन की बोआई अपने अंतिम चरण में है। किसानों को उर्वरक में डीएपी की बहुत ही जरूरत है। 50 प्रतिशत किसान अभी गेहूं की बोआई नहीं कर सके हैं। इसके लिए किसानों को फास्फोरस खाद की जरूरत है, परंतु जिले में डीएपी का अकाल पड़ गया है। किसान दर-दर भटक रहे हैं।
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जिले के स्टाक में डीएपी खाद का भंडारण नहीं बचा है। जिले में रबी सीजन में करीब डेढ़ लाख हेक्टेयर में गेहूं की बोआई होती है। इसके साथ सरसों, आलू, मटर, चना, मसूर सहित अन्य फसलें लगाई जाती हैं। नवंबर माह में किसान शीत कालीन गन्ने की बोआई भी करते हैं।
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गन्ने की बोआई में यहां के किसान डीएपी, यूरिया का जमकर प्रयोग करते हैं। जिले में अब तक इस सीजन में केवल 6800 मीट्रिक टन डीएपी की आपूर्ति हो सकी है। यह उर्वरक किसानों ने गन्ने की बोआई में ही खर्च कर दिए।
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अब जब गेहूं बोआई की सीजन चल रहा है तो जिले में डीएपी का कोटा खाली गया है। यहां तक बफर में रखा डीएपी भी खर्च हो गया लेकिन किसानों को पर्याप्त खाद नहीं मिल पाई। हालांकि यूरिया की उपलब्धता भी बहुत कम है।
जिले में 50 मीट्रिक टन डीएपी व यूरिया सहित अन्य उर्वरकों की जरूरत होती है। लेकिन इस बार जिले में उर्वरक का स्टाक बहुत कम रहा। केवल 15000 मीट्रिक टन यूरिया की आपूर्ति हो सकी है।
जिन किसानों ने नवंबर में गेहूं की बोआई कर चुके हैं उन्हें अब टाप ड्रेसिंग के लिए यूरिया की जरूरत है। खास कर परसपुर, बेलसर, तरबगंज व नवाबगंज ब्लाक क्षेत्र में जरूरत है, लेकिन यूरिया की आपूर्ति नहीं हो पा रही है।
निजी क्षेत्र के अलावा सहकारिता क्षेत्र में इफको के माध्यम से सहकारी समितियों के माध्यम से किसानों को खाद उपलब्ध करायी जाती है। इस बार इफको में खाद नहीं आई। इफको के पास केवल एनपीके है जो किसान बहुत कम प्रयोग करते हें।

इस बार डीएपी व यूरिया की कमी से सहकारी समितियों पर स्टाक शून्य हो गया है। बताया जा रहा है कि दक्षिण में चक्रवात के कारण रैक लगने में देर हुई है। आशा है कि जल्द ही उर्वरक की आपूर्ति हो जाएगी।
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