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अस्पताल में हर रोज दम तोड़तीं संवेदनाएं

Wed, 02 Nov 2016 11:46 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/गोंडा
अमर उजाला ब्यूरो/गोंडा Updated Wed, 02 Nov 2016 11:46 PM IST
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Breaks own condolences to the hospital every day
समाजवादी अस्पताल में हर रोज दम तोड़तीं संवेदनाएं - फोटो : अमर उजाला
जनप्रतिनिधि व अधिकारी कुछ भी दावा करें लेकिन समाजवादी जिला अस्पताल में हर रोज संवेदनाएं दम तोड़ रही हैं। बुधवार को आधे घंटे के अंतराल पर घटी दो घटनाओं ने यहां सारे दावों का आपरेशन कर दिया। भदुआ तरहर गांव के पुरैनिया निवासी कृष्णकुमार यादव की 75 वर्षीया दादी कलावती की तबियत बिगड़ी तो उसने एंबुलेंस को काल किया लेकिन एंबुलेस देर तक नहीं आई।
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मरता क्या न करता, मजबूरन पड़ोस से ठेला मांगा और दादी को लादकर जिला अस्पताल पहुंचा, लेकिन यहां के संवेदनहीन डॉक्टर नहीं पसीजे और बिना देखे दूसरी जगह ले जाने की सलाह दे दी। थक हार कर फिर उसने प्राइवेट नर्सिंग होम की राह पकड़ ली।
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इसके अलावा इमरजेंसी वार्ड से निकले मरीज का पैर काम नहीं कर रहा था। उसने स्ट्रेचर की मदद मांगी लेकिन उसे भी निराशा ही हाथ लगी, फिर तीमारदार का कंधा ही उसके काम आया। ये दोनों घटनाएं इस बात की गवाही दे रही थी कि समाजवादी सरकार के अस्पताल में मरीज का ऑपरेशन भले ही न हो लेकिन लोगों की संवेदनाओं का ऑपरेशन रोज होता है। (छाया-पवन मिश्र)  
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