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8.64 करोड़ की बकाया मजदूरी ने बढ़ाया श्रमिकों का संकटं
Updated Sat, 29 Jul 2017 11:03 PM IST
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8.64 करोड़ की बकाया मजदूरी ने बढ़ाया श्रमिकों का संकट
मनरेगा ठप, रोजगार न मिलने से पलायन कर रहे श्रमिक
जिले के नौ सौ गांवों में मनरेगा के कार्य ठप
अमर उजाला ब्यूरो
गोंडा। ग्रामीण मजदूरों को उनके गांव में ही सौ दिन का रोजगार उपलब्ध कराने के लिए संचालित की जा रही मनरेगा जिले के 900 ग्राम पंचायतों में ठप हो गई है। बरसात के कारण गांवों में काम नहीं हो रहे है और मजदूरों को रोजगार नहीं मिल रहा है। इसके अलावा करीब 8.64 करोड़ रुपये की बकाया मजदूरी ने भी करीब 1.50 लाख मजदूरों के सामने रोजी का संकट खड़ा कर दिया है। इस संकट से निपटने के लिए श्रमिक गांव छोड़कर शहरों की तरफ पलायन कर रहे हैं।
गांवों के मजदूरों को उनके गांव में ही रोजगार उपलब्ध कराने के लिए महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गांरटी योजना का संचालन किया जा रहा है। इस योजना के अतंर्गत पंजीकृत जाबकार्ड धारकों को उनके गांव में ही सौ दिन का रोजगार उपलब्ध कराया जाता है। वर्तमान समय मे पूरे जिले में 1.50 मजदूर सक्रिय रुप से इस योजना के तहत काम कर अपना जीवन यापन कर रहे हैं लेकिन बरसात के सीजन ने इनकी रोजी छीन ली है। बारिस के चलते करीब 900 गांवों में मनरेगा ठप हो गई है जिससे इन श्रमिकों को रोजगार नहीं मिल रहा है। भुगतान के मामले में भी अफसरों की लापरवाही इन मजदूरों पर भारी पड़ रही है। चालू वित्तीय वर्ष में करीब 5.81 करोड़ की मजदूरी बकाया हो चुकी है और अफसर जानबूझकर इनका समय से भुगतान नही करा रहे हैं। इसके अलावा पिछले वित्तीय वर्ष की 2.83 करोड़ रुपये की मजदूरी का भुगतान भी अभी नही हो सका है। ऐसे में इन मजदूरों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है और रोजगार की तलाश में मनरेगा श्रमिक शहरों की तरफ पलायन करने कर रहे हैं।
इनसेट
93 गांवों सें मनरेगा गायब
जिले की 1054 ग्राम पंचायतों में से 93 ग्राम पंचायते ऐसी है जहां इस वित्तीय वर्ष में अब तक एक भी काम नही कराये गए हैं। इन गांवो से मनरेगा पूरी तरह से गायब हो गई है और मनरेगा योजना के तहत काम कराने का खाता ही नही खुल सका है। इसमें से अकेले कटरा ब्लाक की 41 ग्राम पंचायतें शामिल है। मुख्य विकास अधिकारी लक्षित मानव दिवस के सापेक्ष इन गांवों में कम से कम एक काम शुरु कराने के लिए ब्लाक के बीडीओ को निर्देशित कर चुकी है लेकिन गांवों के प्रधान काम कराने को तैयार नही है। इस स्थिति से निपटने के लिए अब इन गांवों के रोजगार सेवकों पर कार्रवाई की तैयारी है।
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इनसेट
तीन ब्लॉकों में 50 फीसदी से भी कम हुआ काम
मनरेगा योजना के अंतर्गत कटरा बाजार,बभनजोत व परसपुर समेत तीन ब्लाक सबसे पीछे हैं। इन ब्लाकों में लक्षित मानव दिवसों के सापेक्ष 50 फीसदी काम भी नही कराये गए हैें। समीक्षा में इसका खुलासा होने पर सीडीओ ने इस पर नाराजगी जताते हुए कटरा बाजार,बभनजोत व परसपुर के खंड विकास अधिकारियों को लक्ष्य के सापेक्ष काम कराये जाने का निर्देश दिया है।
इनसेट
मनरेगा श्रमिकों की शत प्रतिशत अवशेष बकाया मजदूरी के भुगतान के लिए अफसरों को निर्देशित किया गया है। इसमें लापरवाही बरतने वाले अफसरों के खिलाफ कार्रवाई की जायेगी। इसके अलावा जिन गांवो में मनरेगा बंद है वहां इसे फिर से चालू कराने का प्रयास किया जा रहा है।
दिव्या मित्तल, मुख्य विकास अधिकारी
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मनरेगा ठप, रोजगार न मिलने से पलायन कर रहे श्रमिक
जिले के नौ सौ गांवों में मनरेगा के कार्य ठप
अमर उजाला ब्यूरो
गोंडा। ग्रामीण मजदूरों को उनके गांव में ही सौ दिन का रोजगार उपलब्ध कराने के लिए संचालित की जा रही मनरेगा जिले के 900 ग्राम पंचायतों में ठप हो गई है। बरसात के कारण गांवों में काम नहीं हो रहे है और मजदूरों को रोजगार नहीं मिल रहा है। इसके अलावा करीब 8.64 करोड़ रुपये की बकाया मजदूरी ने भी करीब 1.50 लाख मजदूरों के सामने रोजी का संकट खड़ा कर दिया है। इस संकट से निपटने के लिए श्रमिक गांव छोड़कर शहरों की तरफ पलायन कर रहे हैं।
गांवों के मजदूरों को उनके गांव में ही रोजगार उपलब्ध कराने के लिए महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गांरटी योजना का संचालन किया जा रहा है। इस योजना के अतंर्गत पंजीकृत जाबकार्ड धारकों को उनके गांव में ही सौ दिन का रोजगार उपलब्ध कराया जाता है। वर्तमान समय मे पूरे जिले में 1.50 मजदूर सक्रिय रुप से इस योजना के तहत काम कर अपना जीवन यापन कर रहे हैं लेकिन बरसात के सीजन ने इनकी रोजी छीन ली है। बारिस के चलते करीब 900 गांवों में मनरेगा ठप हो गई है जिससे इन श्रमिकों को रोजगार नहीं मिल रहा है। भुगतान के मामले में भी अफसरों की लापरवाही इन मजदूरों पर भारी पड़ रही है। चालू वित्तीय वर्ष में करीब 5.81 करोड़ की मजदूरी बकाया हो चुकी है और अफसर जानबूझकर इनका समय से भुगतान नही करा रहे हैं। इसके अलावा पिछले वित्तीय वर्ष की 2.83 करोड़ रुपये की मजदूरी का भुगतान भी अभी नही हो सका है। ऐसे में इन मजदूरों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है और रोजगार की तलाश में मनरेगा श्रमिक शहरों की तरफ पलायन करने कर रहे हैं।
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93 गांवों सें मनरेगा गायब
जिले की 1054 ग्राम पंचायतों में से 93 ग्राम पंचायते ऐसी है जहां इस वित्तीय वर्ष में अब तक एक भी काम नही कराये गए हैं। इन गांवो से मनरेगा पूरी तरह से गायब हो गई है और मनरेगा योजना के तहत काम कराने का खाता ही नही खुल सका है। इसमें से अकेले कटरा ब्लाक की 41 ग्राम पंचायतें शामिल है। मुख्य विकास अधिकारी लक्षित मानव दिवस के सापेक्ष इन गांवों में कम से कम एक काम शुरु कराने के लिए ब्लाक के बीडीओ को निर्देशित कर चुकी है लेकिन गांवों के प्रधान काम कराने को तैयार नही है। इस स्थिति से निपटने के लिए अब इन गांवों के रोजगार सेवकों पर कार्रवाई की तैयारी है।
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तीन ब्लॉकों में 50 फीसदी से भी कम हुआ काम
मनरेगा योजना के अंतर्गत कटरा बाजार,बभनजोत व परसपुर समेत तीन ब्लाक सबसे पीछे हैं। इन ब्लाकों में लक्षित मानव दिवसों के सापेक्ष 50 फीसदी काम भी नही कराये गए हैें। समीक्षा में इसका खुलासा होने पर सीडीओ ने इस पर नाराजगी जताते हुए कटरा बाजार,बभनजोत व परसपुर के खंड विकास अधिकारियों को लक्ष्य के सापेक्ष काम कराये जाने का निर्देश दिया है।
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मनरेगा श्रमिकों की शत प्रतिशत अवशेष बकाया मजदूरी के भुगतान के लिए अफसरों को निर्देशित किया गया है। इसमें लापरवाही बरतने वाले अफसरों के खिलाफ कार्रवाई की जायेगी। इसके अलावा जिन गांवो में मनरेगा बंद है वहां इसे फिर से चालू कराने का प्रयास किया जा रहा है।
दिव्या मित्तल, मुख्य विकास अधिकारी