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दुराचार के दो आरोपियों को 20 साल की कैद
amar ujala
Updated Wed, 31 May 2017 10:44 PM IST
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त्वरित सत्र न्यायाधीश प्रथम ने दुराचार के दो आरोपियों को 20-20 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। न्यायाधीश ने एक अन्य आरोपी को छेड़खानी का दोषी मानते हुए तीन साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है।
थाना ललिया के एक गांव की निवासिनी के प्रार्थना पत्र पर जेएम प्रथम द्वारा मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया गया था। थाना ललिया की पुलिस ने कोर्ट के आदेश पर छेेदीराम पुत्र रक्षा राम निवासी राम दयालडिहवा, सियाराम पुत्र रामनाथ ग्राम पटवा पर दुराचार तथा जगराम पुत्र पीतांबर निवासी राम दयालडिहवा पर छेड़खानी का मुकदमा दर्ज किया।
पीड़िता का आरोप था कि 13 नवंबर 2014 को नित्य क्रिया के लिए गई थी। जहां पर छेेदीराम व सियाराम ने दुराचार किया। पीड़िता घटना की शिकायत करने गई तो जगराम ने उसके साथ छेड़खानी करते हुए भगा दिया। विवेचना के बाद पुलिस ने तीनों लोगों के विरुद्ध आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया।
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सत्र परीक्षण के दौरान सरकारी अधिवक्ता रवींद्र यादव ने सात गवाहों को न्यायालय में प्रस्तुत किया। दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने व पत्रावली का अवलोकन करने के बाद एफटीसी प्रथम अशोक कुमार सिंह छेेदीराम व सियाराम को सामूहिक दुराचार का दोषी मानते हुए 20-20 वर्ष के सश्रम कारावास व 10-10 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई।
अर्थदंड अदा न करने पर आरोपियों को छह-छह माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना पड़ेेगा। न्यायाधीश ने जगराम को छेड़खानी करने का दोषी मानते हुए तीन वर्ष के सश्रम कारावास व तीन हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड अदा न करने पर आरोपी को तीन माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना पड़ेगा।
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थाना ललिया के एक गांव की निवासिनी के प्रार्थना पत्र पर जेएम प्रथम द्वारा मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया गया था। थाना ललिया की पुलिस ने कोर्ट के आदेश पर छेेदीराम पुत्र रक्षा राम निवासी राम दयालडिहवा, सियाराम पुत्र रामनाथ ग्राम पटवा पर दुराचार तथा जगराम पुत्र पीतांबर निवासी राम दयालडिहवा पर छेड़खानी का मुकदमा दर्ज किया।
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पीड़िता का आरोप था कि 13 नवंबर 2014 को नित्य क्रिया के लिए गई थी। जहां पर छेेदीराम व सियाराम ने दुराचार किया। पीड़िता घटना की शिकायत करने गई तो जगराम ने उसके साथ छेड़खानी करते हुए भगा दिया। विवेचना के बाद पुलिस ने तीनों लोगों के विरुद्ध आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया।
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सत्र परीक्षण के दौरान सरकारी अधिवक्ता रवींद्र यादव ने सात गवाहों को न्यायालय में प्रस्तुत किया। दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने व पत्रावली का अवलोकन करने के बाद एफटीसी प्रथम अशोक कुमार सिंह छेेदीराम व सियाराम को सामूहिक दुराचार का दोषी मानते हुए 20-20 वर्ष के सश्रम कारावास व 10-10 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई।
अर्थदंड अदा न करने पर आरोपियों को छह-छह माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना पड़ेेगा। न्यायाधीश ने जगराम को छेड़खानी करने का दोषी मानते हुए तीन वर्ष के सश्रम कारावास व तीन हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड अदा न करने पर आरोपी को तीन माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना पड़ेगा।