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मारपीट करने वाली आशा कर्मियों की सेवा समाप्त
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गोंडा। जिला महिला अस्पताल में कमीशन को लेकर आपस में मारपीट करने वाली आशा कार्यकर्ताओं की सेवा समाप्त कर दी गई है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. आरएस केसरी ने मंगलवार को परसपुर व वजीरगंज के सीएचसी अधीक्षक को संबंधित आशा बहू की सेवा समाप्ति का आदेशपत्र देकर करवाई के निर्देश दिए।
विगत 22 मार्च को कमीशन के बंटवारे को लेकर दो आशा बहुओं में जमकर मारपीट व गाली-गलौज हुआ। मारपीट में शामिल परसपुर की आशा कर्मचारी शशि ओझा और वजीरगंज की पुष्पा शुक्ला पर कार्रवाई करते हुए दोनों की संविदा समाप्त कर दी गई। महिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. सुषमा सिंह ने बताया कि महिला अस्पताल में सिर्फ मरीज के साथ एक आशा कर्मी को प्रवेश दिया जाएगा। इसके लिए गेट पर ही आशा के लिए पास जारी किया जाएगा जो उसी दिन तक वैध होगा। बिना मरीज के अस्पताल परिसर में घूमने वाली आशा कार्यकर्ताओं पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
सोशल मीडिया पर वायरल आशा के कमीशनखोरी का मामला
सिर्फ महिला अस्पताल में ही नहीं बल्कि अस्पताल से बाहर भी आशा कर्मियों के कमीशनखोरी से मरीजों को जेबें ढीली करनी पड़ रही हैं। सोमवार को सोशल मीडिया पर जिलाधिकारी को टैग कर एक यूजर लिखता है कि वह महिला अस्पताल में इलाज कराने गया, जहां उसकी जांच नहीं हो पाई। अस्पताल के सामने पैथालोजी पर गया तो एक अपरिचित आशा ने उसकी जांच पर अपना कमीशन लेकर चलते बनी। सोशल मीडिया पर यूजर ने डीएम से निजी पैथालोजी सेंटरों पर भी जांच के मूल्य निर्धारित करने की मांग की।
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विगत 22 मार्च को कमीशन के बंटवारे को लेकर दो आशा बहुओं में जमकर मारपीट व गाली-गलौज हुआ। मारपीट में शामिल परसपुर की आशा कर्मचारी शशि ओझा और वजीरगंज की पुष्पा शुक्ला पर कार्रवाई करते हुए दोनों की संविदा समाप्त कर दी गई। महिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. सुषमा सिंह ने बताया कि महिला अस्पताल में सिर्फ मरीज के साथ एक आशा कर्मी को प्रवेश दिया जाएगा। इसके लिए गेट पर ही आशा के लिए पास जारी किया जाएगा जो उसी दिन तक वैध होगा। बिना मरीज के अस्पताल परिसर में घूमने वाली आशा कार्यकर्ताओं पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
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सोशल मीडिया पर वायरल आशा के कमीशनखोरी का मामला
सिर्फ महिला अस्पताल में ही नहीं बल्कि अस्पताल से बाहर भी आशा कर्मियों के कमीशनखोरी से मरीजों को जेबें ढीली करनी पड़ रही हैं। सोमवार को सोशल मीडिया पर जिलाधिकारी को टैग कर एक यूजर लिखता है कि वह महिला अस्पताल में इलाज कराने गया, जहां उसकी जांच नहीं हो पाई। अस्पताल के सामने पैथालोजी पर गया तो एक अपरिचित आशा ने उसकी जांच पर अपना कमीशन लेकर चलते बनी। सोशल मीडिया पर यूजर ने डीएम से निजी पैथालोजी सेंटरों पर भी जांच के मूल्य निर्धारित करने की मांग की।
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