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Gonda News: शासनादेश के विपरीत अफसरों ने खर्च कर डाले एक करोड़ रुपये
Tue, 17 Jun 2025 11:30 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Tue, 17 Jun 2025 11:30 PM IST
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गोंडा। जिला पंचायत के अफसरों ने शासनादेश के विपरीत अनियमित तरीके से एक करोड़ दो लाख 21 हजार रुपये खर्च कर दिए। विभागों को आवंटित भवनों, दुकान का किराया वसूलने, भवनों से कर, मोबाइल टावरों से लाइसेंस शुल्क, भट्ठा मालिकों से संपत्ति व विभव कर की वसूली सहित अन्य में कोताही का मामला आया है। इससे जिला पंचायत 40 लाख 74 हजार 296 रुपये की क्षति पहुंचाई गई। ऑडिट टीम ने इसके लिए जिला पंचायत के तत्कालीन अपर मुख्य अधिकारी राजेश कुमार चौधरी, अभियंता अभय सिंह व कर अधिकारी को जिम्मेदार ठहराया है।
जिला लेखा परीक्षा विभाग की ओर से ऑडिट टीम ने वित्तीय वर्ष 2021-22 में जिला पंचायत के आय व्यय व विकास कार्यों पर खर्च धनराशि की जांच की। जांच में सामने आया कि जिला पंचायत के अफसरों ने नियमों को ताक पर रखकर छह छोटी-छोटी सड़कों का निर्माण व मरम्मत कार्य कराया। इस पर एक करोड़ दो लाख 21 हजार रुपये का अनियमित भुगतान किया। जबकि नियमानुसार सरकार से मिले अनुदानों से एक से अधिक ग्राम पंचायतों को लाभान्वित करने वाले कार्यों को ही जिला पंचायत संपादित करा सकती है। यहां शासनादेश के दिशा-निर्देशों को दरकिनार कर मनमाने तरीके से ऐसे छह संपर्क मार्गों का निर्माण कराया गया, जो ग्राम पंचायतों की परिधि में आते हैं। मामले में जिला लेखा परीक्षा अधिकारी ने उपनिदेशक जिला पंचायत प्रकोष्ठ लखनऊ और देवीपाटन मंडल के आयुक्त को पत्र भेजकर तीन माह के अंदर अनुपालन आख्या मांगी है।
ये भी हुआ खुलासा
जांच में पता चला कि वित्तीय वर्ष 2021-22 में ही दो करोड़ 85 लाख 66 हजार रुपये की लागत से स्वीकृत नाला निर्माण की दो परियोजनाएं समय से पूर्ण नहीं हुईं। नियमानुसार ठेकेदार से विलंब प्रतिकर के रूप में दो लाख 86 हजार 660 रुपये वसूलने थे, लेकिन अफसरों ने मात्र पांच हजार पांच सौ रुपये ही वसूले। जिले में चल रहे 83 मोबाइल टावरों से 25 हजार की दर से लाइसेंस शुल्क की वसूली न होने से जिला पंचायत को 20 लाख 75 हजार रुपये की क्षति हुई। 16 ब्लाॅक क्षेत्रों में संचालित 293 में से 284 ईंट भट्ठों के मालिकों से संपत्ति एवं विभव कर की वसूली नहीं की गई, जिससे 16 लाख 48 हजार रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ। जिला पंचायत की दुकानों से किराया वसूली न होने से 45 हजार 396 रुपये और विभागों को आवंटित भवनों का किराया 25 हजार 740 रुपये की वसूली न होने से भी नुकसान हुआ है।
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देवीपाटन मंडल के संयुक्त विकास आयुक्त राकेश कुमार पांडेय ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2021-22 के ऑडिट में जिला पंचायत में वित्तीय अनियमितता की जानकारी मिली है। जिला पंचायत के अधिकारियों से आपत्तियों का निस्तारण कराया जाएगा।
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जिला लेखा परीक्षा विभाग की ओर से ऑडिट टीम ने वित्तीय वर्ष 2021-22 में जिला पंचायत के आय व्यय व विकास कार्यों पर खर्च धनराशि की जांच की। जांच में सामने आया कि जिला पंचायत के अफसरों ने नियमों को ताक पर रखकर छह छोटी-छोटी सड़कों का निर्माण व मरम्मत कार्य कराया। इस पर एक करोड़ दो लाख 21 हजार रुपये का अनियमित भुगतान किया। जबकि नियमानुसार सरकार से मिले अनुदानों से एक से अधिक ग्राम पंचायतों को लाभान्वित करने वाले कार्यों को ही जिला पंचायत संपादित करा सकती है। यहां शासनादेश के दिशा-निर्देशों को दरकिनार कर मनमाने तरीके से ऐसे छह संपर्क मार्गों का निर्माण कराया गया, जो ग्राम पंचायतों की परिधि में आते हैं। मामले में जिला लेखा परीक्षा अधिकारी ने उपनिदेशक जिला पंचायत प्रकोष्ठ लखनऊ और देवीपाटन मंडल के आयुक्त को पत्र भेजकर तीन माह के अंदर अनुपालन आख्या मांगी है।
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ये भी हुआ खुलासा
जांच में पता चला कि वित्तीय वर्ष 2021-22 में ही दो करोड़ 85 लाख 66 हजार रुपये की लागत से स्वीकृत नाला निर्माण की दो परियोजनाएं समय से पूर्ण नहीं हुईं। नियमानुसार ठेकेदार से विलंब प्रतिकर के रूप में दो लाख 86 हजार 660 रुपये वसूलने थे, लेकिन अफसरों ने मात्र पांच हजार पांच सौ रुपये ही वसूले। जिले में चल रहे 83 मोबाइल टावरों से 25 हजार की दर से लाइसेंस शुल्क की वसूली न होने से जिला पंचायत को 20 लाख 75 हजार रुपये की क्षति हुई। 16 ब्लाॅक क्षेत्रों में संचालित 293 में से 284 ईंट भट्ठों के मालिकों से संपत्ति एवं विभव कर की वसूली नहीं की गई, जिससे 16 लाख 48 हजार रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ। जिला पंचायत की दुकानों से किराया वसूली न होने से 45 हजार 396 रुपये और विभागों को आवंटित भवनों का किराया 25 हजार 740 रुपये की वसूली न होने से भी नुकसान हुआ है।
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देवीपाटन मंडल के संयुक्त विकास आयुक्त राकेश कुमार पांडेय ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2021-22 के ऑडिट में जिला पंचायत में वित्तीय अनियमितता की जानकारी मिली है। जिला पंचायत के अधिकारियों से आपत्तियों का निस्तारण कराया जाएगा।