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Gonda News: मात्र तीन डॉक्टरों के भरोसे संचालित हो रहा करनैलगंज सीएचसी
Tue, 31 Dec 2024 11:00 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Tue, 31 Dec 2024 11:00 PM IST
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करनैलगंज (गोंडा)। फर्स्ट रेफरल यूनिट (एफआरयू) का दर्जा होने के बाद भी करनैलगंज सीएचसी मौजूदा समय सिर्फ रेफर सेंटर बनकर रह गया है। सीएचसी में चिकित्सकों के 14 पद होने के बावजूद सिर्फ तीन विशेषज्ञ डॉक्टरों की ही तैनाती है। ऐसे में यहां आने वाले अधिकांश मरीजों को प्राथमिक इलाज के बाद रेफर कर दिया जाता है। इससे मरीजों व तीमारदारों को लखनऊ या गोंडा मेडिकल कॉलेज तक की दौड़ लगानी पड़ती है।
तहसील मुख्यालय स्थित सीएचसी को गंभीर मरीजों के इलाज, सामान्य व सिजेरियन प्रसव की सुविधा देने के उद्देश्य से एफआरयू का दर्जा प्राप्त है। इसके बावजूद यहां चिकित्सकों के 14 पदों के सापेक्ष मात्र तीन विशेषज्ञ चिकित्सकों की ही तैनाती है। डॉक्टरों की तैनाती न होने से यहां आने वाले मरीजों को केवल प्राथमिक उपचार ही मिल पा रहा है। हाईवे के करीब होने के कारण यहां सड़क हादसों में घायल लोग अधिक संख्या में आते हैं, लेकिन आर्थो सर्जन न होने के कारण उन्हें मजबूरी में गोंडा मेडिकल कॉलेज अथवा लखनऊ के ट्रॉमा सेंटर रेफर करना पड़ता है।
ओपीडी में भी नहीं मिल रहा इलाज
चिकित्सकों की कमी के कारण ही प्रतिदिन ओपीडी में आने वाले करीब 500 मरीजों को भी इलाज के लिए भटकना पड़ता है। सीएचसी में वर्तमान में अधीक्षक डॉ. अनुज कुमार के साथ ही डॉ. मोहम्मद मुदस्सिर, डॉ. इमरान मोइद व डॉ. सौम्या श्रीवास्तव की तैनाती है। इनमें से डॉ. सौम्या को धनावा पीएचसी से संबद्ध कर दिया गया है।
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सर्जन न होने से ओटी पर लटका ताला
सीएचसी में हड्डी रोग विशेषज्ञ, जनरल सर्जन, स्त्री रोग विशेषज्ञ, ईएनटी, एनेस्थीएन, नेत्ररोग विशेषज्ञ के पद रिक्त हैं। सर्जन न होने से ऑपरेशन थियेटर में डेढ़ साल से ताला बंद है। इस सीएचसी के अंतर्गत चार प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बरगदी, धनावा, चकरौत व कंजेमऊ भी आते हैं। जिसमें धनावा को छोड़कर सभी में फार्मासिस्ट के सहारे मरीजों का इलाज चल रहा है।
डॉक्टरों की कमी दूर कराने को भेजा पत्र
सीएचसी अधीक्षक डॉ. अनुज कुमार ने बताया कि चार पीएचसी व एक सीएचसी की जिम्मेदारी मात्र चार चिकित्सकों पर है। चिकित्सकों व अन्य स्टाफ के रिक्त पदों पर तैनाती के लिए कई बार पत्राचार किया जा चुका है। इसी कारण पर्याप्त दवाएं व संसाधन होने के बाद भी मरीजों को इलाज की पर्याप्त सुविधाएं नहीं मिल पाती हैं।
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तहसील मुख्यालय स्थित सीएचसी को गंभीर मरीजों के इलाज, सामान्य व सिजेरियन प्रसव की सुविधा देने के उद्देश्य से एफआरयू का दर्जा प्राप्त है। इसके बावजूद यहां चिकित्सकों के 14 पदों के सापेक्ष मात्र तीन विशेषज्ञ चिकित्सकों की ही तैनाती है। डॉक्टरों की तैनाती न होने से यहां आने वाले मरीजों को केवल प्राथमिक उपचार ही मिल पा रहा है। हाईवे के करीब होने के कारण यहां सड़क हादसों में घायल लोग अधिक संख्या में आते हैं, लेकिन आर्थो सर्जन न होने के कारण उन्हें मजबूरी में गोंडा मेडिकल कॉलेज अथवा लखनऊ के ट्रॉमा सेंटर रेफर करना पड़ता है।
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ओपीडी में भी नहीं मिल रहा इलाज
चिकित्सकों की कमी के कारण ही प्रतिदिन ओपीडी में आने वाले करीब 500 मरीजों को भी इलाज के लिए भटकना पड़ता है। सीएचसी में वर्तमान में अधीक्षक डॉ. अनुज कुमार के साथ ही डॉ. मोहम्मद मुदस्सिर, डॉ. इमरान मोइद व डॉ. सौम्या श्रीवास्तव की तैनाती है। इनमें से डॉ. सौम्या को धनावा पीएचसी से संबद्ध कर दिया गया है।
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सर्जन न होने से ओटी पर लटका ताला
सीएचसी में हड्डी रोग विशेषज्ञ, जनरल सर्जन, स्त्री रोग विशेषज्ञ, ईएनटी, एनेस्थीएन, नेत्ररोग विशेषज्ञ के पद रिक्त हैं। सर्जन न होने से ऑपरेशन थियेटर में डेढ़ साल से ताला बंद है। इस सीएचसी के अंतर्गत चार प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बरगदी, धनावा, चकरौत व कंजेमऊ भी आते हैं। जिसमें धनावा को छोड़कर सभी में फार्मासिस्ट के सहारे मरीजों का इलाज चल रहा है।
डॉक्टरों की कमी दूर कराने को भेजा पत्र
सीएचसी अधीक्षक डॉ. अनुज कुमार ने बताया कि चार पीएचसी व एक सीएचसी की जिम्मेदारी मात्र चार चिकित्सकों पर है। चिकित्सकों व अन्य स्टाफ के रिक्त पदों पर तैनाती के लिए कई बार पत्राचार किया जा चुका है। इसी कारण पर्याप्त दवाएं व संसाधन होने के बाद भी मरीजों को इलाज की पर्याप्त सुविधाएं नहीं मिल पाती हैं।