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सेना के जवान की मौत होने से कोहराम
गोंडा/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 29 Dec 2015 11:42 PM IST
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बभनान कस्बा के रहने वाले सेना के एक जवान की कोलकाता के पानागढ़ में सड़क हादसे में दो दिन पहले मौत हो गई। मंगलवार को जब उसका शव उसके घर लाया गया तो यहां कोहराम मच गया। परिवार के लोगों के साथ ही रिश्तेदार व संबंधियों को यहां तांता लगा रहा।
बभनान कस्बा निवासी विजय कुमार मौर्य वर्ष 2008 में सेना में भर्ती हुए थे। सेना के नायब सूबेदार यशवंत सिंह ने बताया कि विजय कोलकाता के पानागढ़ में सेना के 642 इंजीनियरिंग कोर में तैनात थे।
27 दिसंबर की शाम विजय ड्यूटी समाप्त होने के बाद बाइक से पानागढ़ बाजार जा रहे थे। तभी एक वाहन कीचपेट में आने से वह गंभीर रूप से घायल हो गए।
उसे सैनिक अस्पताल पानागढ़ ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। मंगलवार को दोपहर सेना के नायब सूबेदार यशवंत सिंह व जवान अंकित कुमार विजय के शव को लेकर उसके घर पहुंचे तो वहां कोहराम मच गया।
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विजय कुमार मौर्य के बड़े भाई बद्री मौर्य ने बताया कि तीन भाइयों में विजय सबसे छोटा था। बचपन से उसका सेना के प्रति गहरा लगाव था।
विजय की मां इंद्रपता बेटे के मौत के गम में गुमसुम हो गई हैं। वहीं विजय की पत्नी किरन की मांग का सिंदूर उजड़ जाने से उसका रो-रोकर बुरा हाल है।
विजय के पांच साल के मासूम बेटे दीपराज को तो ये भी नहीं मालूम कि उसके सिर से पिता का साया उठ चुका है। वह बार-बार पापा से बात करने की जिद कर रहा है।
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बभनान कस्बा निवासी विजय कुमार मौर्य वर्ष 2008 में सेना में भर्ती हुए थे। सेना के नायब सूबेदार यशवंत सिंह ने बताया कि विजय कोलकाता के पानागढ़ में सेना के 642 इंजीनियरिंग कोर में तैनात थे।
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27 दिसंबर की शाम विजय ड्यूटी समाप्त होने के बाद बाइक से पानागढ़ बाजार जा रहे थे। तभी एक वाहन कीचपेट में आने से वह गंभीर रूप से घायल हो गए।
उसे सैनिक अस्पताल पानागढ़ ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। मंगलवार को दोपहर सेना के नायब सूबेदार यशवंत सिंह व जवान अंकित कुमार विजय के शव को लेकर उसके घर पहुंचे तो वहां कोहराम मच गया।
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विजय कुमार मौर्य के बड़े भाई बद्री मौर्य ने बताया कि तीन भाइयों में विजय सबसे छोटा था। बचपन से उसका सेना के प्रति गहरा लगाव था।
विजय की मां इंद्रपता बेटे के मौत के गम में गुमसुम हो गई हैं। वहीं विजय की पत्नी किरन की मांग का सिंदूर उजड़ जाने से उसका रो-रोकर बुरा हाल है।
विजय के पांच साल के मासूम बेटे दीपराज को तो ये भी नहीं मालूम कि उसके सिर से पिता का साया उठ चुका है। वह बार-बार पापा से बात करने की जिद कर रहा है।