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Gonda News: मौसम में बदलाव से सरसों पर कीट का खतरा

Tue, 10 Mar 2026 12:13 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा Updated Tue, 10 Mar 2026 12:13 AM IST
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Change in weather poses threat to mustard pests
मंगुरा में लगी सरसों की फसल। - संवाद 
गोंडा। मार्च माह में मौसम के लगातार बदलते मिजाज ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। सुबह धुंध, नमी और तेज हवा के कारण सरसों की फसल पर माहू कीट के प्रकोप का खतरा मंडराने लगा है। इसी दौरान बारिश के आसार से तैयार खड़ी सरसों की फसल को नुकसान का खतरा भी बढ़ गया है।
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जिले में करीब दो लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में रबी की फसलों की बोआई हुई है। इसमें लगभग 18 हजार हेक्टेयर में राई और सरसों की खेती की गई है। सोमवार सुबह से ही जिले में घना कोहरा और धुंध छाई रही। पूरे दिन धुंध बनी रहने से किसान चिंतित दिखाई दिए। किसानों का कहना है कि इस समय सरसों की फसल लगभग पक चुकी है और जल्द ही इसकी कटाई शुरू होने वाली है। ऐसे में यदि बारिश होती है या अधिक नमी बनी रहती है तो फसल को नुकसान पहुंच सकता है।
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किसान दीनदयाल, बाउर, केदारनाथ, राजेश और दुर्गा प्रसाद ने बताया कि मार्च में सामान्य तौर पर तेज धूप और गर्मी की शुरुआत हो जाती है, लेकिन इस बार धूप की जगह धुंध और नमी बनी हुई है। यदि इस दौरान बारिश हो जाती है तो पकी हुई सरसों की फसल गिर सकती है या खराब हो सकती है। इससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। किसानों ने बताया कि मौसम के इस बदलाव का असर गेहूं की फसल पर भी पड़ने की संभावना है।
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अलग-अलग फसलों पर अलग प्रभाव
लाल बहादुर शास्त्री कृषि विज्ञान केंद्र के प्रसार वैज्ञानिक डॉ. सुधांशु ने बताया कि इस प्रकार के मौसम का रबी फसलों पर अलग-अलग प्रभाव पड़ता है। सरसों की फसल के लिए धुंध और नमी माहू कीट के प्रकोप के लिए अनुकूल परिस्थितियां तैयार करती हैं।

उन्होंने बताया कि माहू कीट पौधों की कोमल पत्तियों और तनों से रस चूसता है, जिससे पौधे कमजोर हो जाते हैं। इससे प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया प्रभावित होती है और फली व दानों के विकास पर प्रतिकूल असर पड़ता है। यदि समय रहते इसका नियंत्रण नहीं किया गया तो उत्पादन में कमी आ सकती है।

हालांकि उन्होंने बताया कि यही मौसम गेहूं की फसल के लिए अपेक्षाकृत लाभकारी हो सकता है। वातावरण में हल्की ठंड और नमी से गेहूं के पौधों की वृद्धि और दानों के भराव की प्रक्रिया बेहतर होती है, जिससे उत्पादन बढ़ने की संभावना रहती है।


कृषि वैज्ञानिक ने किसानों को सलाह दी है कि सरसों की फसल में माहू कीट के लक्षण दिखाई देने पर तुरंत कीट प्रबंधन के उपाय अपनाएं। वहीं, गेहूं की फसल में संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन और समयानुसार सिंचाई करते रहें, ताकि मौसम की अनुकूल परिस्थितियों का लाभ उठाकर बेहतर उत्पादन प्राप्त किया जा सके।
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