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Gonda News: बाढ़ के दर्द से कराह रहा ब्योंदा माझा गांव
Wed, 30 Apr 2025 10:59 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Wed, 30 Apr 2025 10:59 PM IST
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विश्नोहरपुर (गोंडा)। नवाबगंज क्षेत्र के अंतर्गत ब्योंदा माझा गांव बाढ़ की पीड़ा से अबतक नहीं उबर पाया है। यही हाल प्रत्येक वर्ष रहता है। नवाबगंज में बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित रहने वाले आधा दर्जन गावों में यह भी शामिल है। हर वर्ष यह गांव करीब दो से ढाई महीने तक बाढ़ की चपेट में रहता है।
बाढ़ के चलते गांव में प्रवेश की मुख्य सड़क जो ब्योंदा बाजार से जाती है, कई जगह से कट व टूट चुकी है। साथ इस पर निर्मित दो पुलिया भी कट गई है। गांव में 16 मजरे हैं, सभी मजरों के मार्ग ध्वस्त हो चुके हैं। बाढ़ में गांव अफसर दौरा करते हैं। बाढ़ समाप्त होते ही गांव की स्थिति सुधारने का वादा भी करते हैं लेकिन, कोई अब हाल पूछने वाला नहीं है। बाढ़ से प्रभावित गांव की दुर्दशा ज्यों की त्यों बनी हुई है।
पीड़ितों की नहीं ली सुध
मनरेगा से बने खड़ंजे कट चुके हैं। मजरों को जाने वाले रास्ते पैदल चलने लायक नहीं बचे। गांव की सड़कों पर यदि पुलिया बन जाए तो बाढ़ में आवागमन भी होगा और सड़क के कटान में भी कमी आएगी। बाढ़ में आए अधिकारियों ने आश्वासन दिया था लेकिन, बाद में सुधि लेने कोई नहीं आया।
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-केशवराम यादव, ग्राम प्रधान - ब्योंदा माझा
सोलर लाइट का कराएं इंतजाम
बाढ़ में गांव की बिजली दो महीने तक बंद रहती है। रात में अंधेरे में ही रहने को विवश होना पड़ता है। यदि गांव में सौर ऊर्जा का प्रबंध शासन द्वारा करा दिया जाए तो इस बाढ़ में रात में होने वाली दिक्कतों से बचा जा सकता है।
-दीनानाथ, ग्रामीण
आवासीय व्यवस्था कराने की जरूरत
बाढ़ के समय गांव पूरी तरह पानी की चपेट में आ जाता है। लोगों को मवेशियों के साथ पलायन करना पड़ता है। शासन प्रशासन रहने के लिए कोई व्यवस्था नहीं करता। सड़क पर ही गुजारा करना पड़ता है। यदि बंधे के पास कोई अस्थायी आवासीय व्यवस्था हो जाए तो लोगों का सुरक्षित गुजारा हो जाएगा।
- जयनाथ, ग्रामीण
बाधित होती है पढ़ाई
बाढ़ में गांव पूरी तरह पानी से घिर जाता है। पढ़ाई पूरी तरह बाधित हो जाती है। गांव में ऊंची सड़क हो तो बाहर निकलकर स्कूल चले जाएं, लेकिन दो से ढाई माह तक स्कूल नहीं जाने को मिलता। अधिकारी आए थे। बहुत कुछ ठीक करने को कहा था लेकिन, बाढ़ के बाद दोबारा कोई नहीं आया।
- भारत लाल, छात्र
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बाढ़ के चलते गांव में प्रवेश की मुख्य सड़क जो ब्योंदा बाजार से जाती है, कई जगह से कट व टूट चुकी है। साथ इस पर निर्मित दो पुलिया भी कट गई है। गांव में 16 मजरे हैं, सभी मजरों के मार्ग ध्वस्त हो चुके हैं। बाढ़ में गांव अफसर दौरा करते हैं। बाढ़ समाप्त होते ही गांव की स्थिति सुधारने का वादा भी करते हैं लेकिन, कोई अब हाल पूछने वाला नहीं है। बाढ़ से प्रभावित गांव की दुर्दशा ज्यों की त्यों बनी हुई है।
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पीड़ितों की नहीं ली सुध
मनरेगा से बने खड़ंजे कट चुके हैं। मजरों को जाने वाले रास्ते पैदल चलने लायक नहीं बचे। गांव की सड़कों पर यदि पुलिया बन जाए तो बाढ़ में आवागमन भी होगा और सड़क के कटान में भी कमी आएगी। बाढ़ में आए अधिकारियों ने आश्वासन दिया था लेकिन, बाद में सुधि लेने कोई नहीं आया।
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-केशवराम यादव, ग्राम प्रधान - ब्योंदा माझा
सोलर लाइट का कराएं इंतजाम
बाढ़ में गांव की बिजली दो महीने तक बंद रहती है। रात में अंधेरे में ही रहने को विवश होना पड़ता है। यदि गांव में सौर ऊर्जा का प्रबंध शासन द्वारा करा दिया जाए तो इस बाढ़ में रात में होने वाली दिक्कतों से बचा जा सकता है।
-दीनानाथ, ग्रामीण
आवासीय व्यवस्था कराने की जरूरत
बाढ़ के समय गांव पूरी तरह पानी की चपेट में आ जाता है। लोगों को मवेशियों के साथ पलायन करना पड़ता है। शासन प्रशासन रहने के लिए कोई व्यवस्था नहीं करता। सड़क पर ही गुजारा करना पड़ता है। यदि बंधे के पास कोई अस्थायी आवासीय व्यवस्था हो जाए तो लोगों का सुरक्षित गुजारा हो जाएगा।
- जयनाथ, ग्रामीण
बाधित होती है पढ़ाई
बाढ़ में गांव पूरी तरह पानी से घिर जाता है। पढ़ाई पूरी तरह बाधित हो जाती है। गांव में ऊंची सड़क हो तो बाहर निकलकर स्कूल चले जाएं, लेकिन दो से ढाई माह तक स्कूल नहीं जाने को मिलता। अधिकारी आए थे। बहुत कुछ ठीक करने को कहा था लेकिन, बाढ़ के बाद दोबारा कोई नहीं आया।
- भारत लाल, छात्र