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769 शिक्षकों के लिए 3.66 करोड़ का बजट मिला
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गोंडा। न्यू पेंशन स्कीम (एनपीएस) में प्राइमरी स्कूलों के शिक्षकों की परेशानी दूर हो गई है। वेतन से हर महीने उनका अंशदान तो कट रहा है, लेकिन सरकार का अंशदान हर महीने नहीं जमा हो रहा है था। अब उनकी समस्या दूर हो गई है और अगस्त से फरवरी माह तक के लिए 3 करोड़ 66 लाख का बजट मिल गया है।
जिले के परिषदीय विद्यालयों में सात हजार शिक्षक कार्यरत हैं। इसमें से चार हजार पहली अप्रैल 2005 के बाद नौकरी में आए हैं। उस समय नई पेशन व्यवस्था (न्यू पेंशन स्कीम) लागू हो गई थी। लेकिन शिक्षक नई पेंशन स्कीम का विरोध कर रहे हैं। जिले के सिर्फ 769 शिक्षकों ने नई पेंशन स्कीम लिया है।
इसके तहत हर महीने शिक्षकों के वेतन का दस प्रतिशत अंशदान काट लिया जाता है। इसी के सापेक्ष सरकार अपनी ओर से 14 फीसदी अंशदान देती है। शिक्षकों का कहना है कि उनके वेतन से हर महीने दस प्रतिशत काटा जा रहा है, लेकिन सरकार अपना 14 फीसदी अंशदान समय से नहीं जमा कर रही है।
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एनपीएस के नियम के मुताबिक जब तक सरकारी अंशदान नहीं जमा होगा, तब तक उनके वेतन से की गई कटौती भी ब्लॉक रहेगी। इस तरह कटौती के बाद भी महीनों तक शिक्षकों का पैसा रुका रहता है और वह एनपीएस में जमा ही हो पता है। वित्त एवं लेखा विभाग की मानें तो जुलाई तक सरकारी अंशदान मिल गया था उसे जमा कर दिया गया है अब फरवरी तक के लिए भी बजट मिल गया है।
एनपीएस के अनुसार उनकी कटौती में सरकारी अंशदान न मिलाए जाने से मार्केट में निवेश नहीं किया जा रहा है। इसका नुकसान शिक्षकों को रिटायरमेंट के समय उठाना पड़ेगा। रिटायरमेंट के समय बाजार आधारित एनपीएस का कोई लाभ नहीं मिलेगा।
शिक्षक एनपीएस से आच्छादित हैं, उनकी कटौती के अनुसार सरकारी अंशदान जमा करने के लिए हर साल में 5 करोड़ रुपये चाहिए। जब तक बजट में इतनी धनराशि की व्यवस्था नहीं होगी। सरकारी अंशदान नहीं जमा हो पाएगा।
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जिले के परिषदीय विद्यालयों में सात हजार शिक्षक कार्यरत हैं। इसमें से चार हजार पहली अप्रैल 2005 के बाद नौकरी में आए हैं। उस समय नई पेशन व्यवस्था (न्यू पेंशन स्कीम) लागू हो गई थी। लेकिन शिक्षक नई पेंशन स्कीम का विरोध कर रहे हैं। जिले के सिर्फ 769 शिक्षकों ने नई पेंशन स्कीम लिया है।
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इसके तहत हर महीने शिक्षकों के वेतन का दस प्रतिशत अंशदान काट लिया जाता है। इसी के सापेक्ष सरकार अपनी ओर से 14 फीसदी अंशदान देती है। शिक्षकों का कहना है कि उनके वेतन से हर महीने दस प्रतिशत काटा जा रहा है, लेकिन सरकार अपना 14 फीसदी अंशदान समय से नहीं जमा कर रही है।
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एनपीएस के नियम के मुताबिक जब तक सरकारी अंशदान नहीं जमा होगा, तब तक उनके वेतन से की गई कटौती भी ब्लॉक रहेगी। इस तरह कटौती के बाद भी महीनों तक शिक्षकों का पैसा रुका रहता है और वह एनपीएस में जमा ही हो पता है। वित्त एवं लेखा विभाग की मानें तो जुलाई तक सरकारी अंशदान मिल गया था उसे जमा कर दिया गया है अब फरवरी तक के लिए भी बजट मिल गया है।
एनपीएस के अनुसार उनकी कटौती में सरकारी अंशदान न मिलाए जाने से मार्केट में निवेश नहीं किया जा रहा है। इसका नुकसान शिक्षकों को रिटायरमेंट के समय उठाना पड़ेगा। रिटायरमेंट के समय बाजार आधारित एनपीएस का कोई लाभ नहीं मिलेगा।
शिक्षक एनपीएस से आच्छादित हैं, उनकी कटौती के अनुसार सरकारी अंशदान जमा करने के लिए हर साल में 5 करोड़ रुपये चाहिए। जब तक बजट में इतनी धनराशि की व्यवस्था नहीं होगी। सरकारी अंशदान नहीं जमा हो पाएगा।