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Gonda News: अदालत से राहत के बाद सियासत का केंद्र बनेंगे बृजभूषण

Mon, 03 Aug 2026 11:31 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा Updated Mon, 03 Aug 2026 11:31 PM IST
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Brij Bhushan set to become the focal point of politics after court relief
गोंडा। महिला पहलवानों से जुड़े कथित यौन शोषण मामले में दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट से बरी होने के बाद कैसरगंज के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह की राजनीति एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गई है। सियासत में उनकी संभावित भूमिका को लेकर नई बहस भी शुरू हो गई है। देवीपाटन मंडल से लेकर लखनऊ और दिल्ली तक अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या भाजपा बृजभूषण को फिर सक्रिय राजनीतिक भूमिका देगी या उनकी राजनीतिक विरासत फिलहाल उनके पुत्रों के माध्यम से ही आगे बढ़ेगी।
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करीब साढ़े तीन वर्ष पहले महिला पहलवानों के आरोप सामने आने के बाद बृजभूषण शरण सिंह भाजपा के लिए असहज स्थिति का कारण बन गए थे। 2024 के लोकसभा चुनाव में पार्टी ने कैसरगंज से उनका टिकट काटकर बेटे करण भूषण सिंह को उम्मीदवार बनाया। यह फैसला स्पष्ट संकेत था कि पार्टी कानूनी विवाद के बीच कोई राजनीतिक जोखिम नहीं लेना चाहती। हालांकि दूसरी ओर भाजपा ने परिवार का राजनीतिक प्रतिनिधित्व भी बरकरार रखा। करण भूषण सिंह की जीत ने यह भी साबित किया कि क्षेत्र में बृजभूषण का प्रभाव और संगठनात्मक पकड़ कमजोर नहीं हुई थी।
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राजनीतिक जानकारों का कहना है कि टिकट कटने के बाद भी बृजभूषण शरण सिंह ने खुद को राजनीति से अलग नहीं किया। वह लगातार क्षेत्र में सक्रिय रहे। देवीपाटन मंडल के चारों जिलों में उनके कार्यक्रम होते रहे, समर्थकों से संवाद जारी रहा और सामाजिक-धार्मिक आयोजनों में उनकी मौजूदगी बनी रही। वह खुद भी कई बार सार्वजनिक मंचों से यह कह चुके हैं कि मैं एक बार फिर संसद जरूर जाऊंगा। उस समय इसे समर्थकों का मनोबल बनाए रखने वाला बयान माना गया था, लेकिन अब अदालत के फैसले के बाद बयान के राजनीतिक मायने बदल गए हैं।
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फिलहाल राजनीतिक गलियारों में दो संभावनाओं पर सबसे अधिक चर्चा है। पहली, वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव में बृजभूषण शरण सिंह को पूर्वांचल और देवीपाटन मंडल में संगठनात्मक जिम्मेदारी देकर चुनावी अभियान में बड़ी भूमिका दी जा सकती है। दूसरी, यदि राजनीतिक परिस्थितियां अनुकूल रहीं तो वर्ष 2029 के लोकसभा चुनाव में उनकी सक्रिय चुनावी वापसी की संभावनाओं से भी इन्कार नहीं किया जा सकता।

मजबूत है नेटवर्क
राजनीतिक दृष्टि से बृजभूषण शरण सिंह की सबसे बड़ी ताकत उनका क्षेत्रीय नेटवर्क माना जाता है। गोंडा, बलरामपुर, बहराइच और श्रावस्ती में वर्षों से उन्होंने अपना मजबूत संगठनात्मक और व्यक्तिगत आधार तैयार किया है। अदालत के फैसले ने एक लंबा कानूनी अध्याय जरूर समाप्त कर दिया है, लेकिन राजनीतिक अध्याय अभी खुलना बाकी है। अब सबकी निगाहें भाजपा नेतृत्व पर हैं।

प्रकरण एक नजर में
जनवरी 2023 में महिला पहलवानों के आरोपों के बहुचर्चित मामले में आज दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने फैसला सुनाया। 1133 दिन तक चले ट्रायल के दौरान 127 सुनवाई हुईं और 44 में से 32 गवाहों के बयान दर्ज किए गए। बृजभूषण शरण सिंह 20 जुलाई 2023 से नियमित जमानत पर हैं, जबकि 10 मई 2024 को अदालत ने पांच शिकायतों पर आरोप तय कर ट्रायल शुरू किया था। दो जुलाई 2026 को अंतिम बहस पूरी होने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। आज अदालत ने उन्हें बरी कर दिया।
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