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Gonda News: गोशाला, अस्तबल और अखाड़े में नजर आए बृजभूषण
Fri, 28 Apr 2023 11:05 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Fri, 28 Apr 2023 11:05 PM IST
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विश्नोहरपुर स्थित आवास पर गायों को चारा खिलाते सांसद बृजभूषण शरण सिंह। - संवाद
गोंडा। यौन शोषण के आरोपों से घिरे भारतीय कुश्ती महासंघ के निवर्तमान अध्यक्ष (कार्यकाल पूरा) और भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने शुक्रवार को गोशाला जाकर गायों को गुड़ खिलाया। फिर अस्तबल में विदेशी नस्ल के घोड़ों को चना खिलाया। शाम को नंदिनीनगर के अखाड़े में रेसलिंग मैट पर प्रैक्टिस कर रहे पहलवानों से हालचाल भी लिया। इसके अलावा सोशल मीडिया पर भी छाए रहे।
सुप्रीम कोर्ट में बृहस्पतिवार को अंतरराष्ट्रीय पहलवानों की अपील पर सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस ने एफआईआर दर्ज करने संबंधी हलफनामा दिया है। इसके बाद दिल्ली के साथ ही जिले में शोर मचने लगा। सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने एक के बाद एक कई वीडियो सोशल मीडिया पर जारी किए। इसमें वह अपने नाती और नातिन समेत परिवार के कई बच्चों के साथ खेल के बारे में जानकारी करते और मस्ती करते नजर आए।
दूसरे वीडियो में अपने आवास पर वाहन से उतरकर अस्तबल में पहुंचे और घोड़े को चना खिलाते नजर आए। इसके साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि वह कहीं नहीं गए हैं, अपने घर पर हैं। उन्होंने साफ किया कि न्याय पालिका पर उन्हें तो भरोसा है लेकिन पहलवानों को भी भरोसा करना होगा। फिलहाल वह अपने आपको खुद ही संभालते नजर आए। वीडियो में वह गाय को गुड़ खिलाते भी दिखे। फिर देर शाम नंदिनीनगर महाविद्यालय कैंपस के बगल कुश्ती प्रशिक्षण केंद्र भी पहुंचे। प्रकरण को लेकर गोंडा में लोग चर्चा तो करते रहे मगर सांसद के बारे में टिप्पणी करने से बचते दिखे।
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कैसरगंज सांसद बृजभूषण शरण सिंह की मुश्किलें बढ़ती दिख रही हैं। इस पर वह अपने बचाव में उतर आए हैं। यौन उत्पीड़न के आरोपों पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश से बेचैनी तो बढ़ी है मगर वह माथे का पसीना साफ करते हुए न्यायपालिका के निर्णय को आत्मसात कर रहे हैं। ‘अमर उजाला’ से बातचीत में उन्होंने कहा कि कानून जंतर-मंतर पर धरने से नहीं, साक्ष्य एवं सच्चाई से चलता है। कैसे क्या हुआ? इसके पीछे न जाते हुए उन्होंने साफ-साफ कहा कि धरने के बजाय पहलवानों को पहले ही पुलिस स्टेशन जाना चाहिए था। तो अब तक एफआईआर दर्ज हो जाती और दूध का दूध पानी का पानी हो जाता।
हरियाणा के मुद्दे पर बृजभूषण बोले- वहां के वास्तविक पहलवान विरोध में नहीं हैं। एक परिवार के ही पहलवान विरोध कर रहे हैं। इसके पीछे क्या साजिश है यह दुनिया जानती है, मुझे कुछ नहीं कहना। जनवरी के पहले ये सारे पहलवान हमसे मिलते थे। खिलाड़ियों को शिष्य की तरह डांटना-फटकारना व फिर पुचकारना हर गुरु का फर्ज होता है।
बृजभूषण बोले- मुझे अध्यक्ष बनने में अब कोई रुचि नहीं है। मेरा खेल का शौक था। अपने कार्यकाल में कुश्ती को ऊंचाइयों तक पहुंचाया। अब हमारा कार्यकाल खत्म हो गया है, मैं चुनाव होने तक कामकाज देख रहा हूं। फिर जो नया अध्यक्ष आएगा आगे संभालेगा।
सांसद बृजभूषण शरण सिंह दो दिन से विचलित थे। उन्होंने एक कविता के माध्यम से अपना दर्द बयां किया था। बृहस्पतिवार को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद उनकी कविता चर्चा में आ गई। उन्होंने सोशल मीडिया में कविता के माध्यम से कहा कि- जिस दिन जीवन के हानि-लाभ पर उतरूंगा, जिस दिन संघर्षों में जाली लग जाएगी। जिस दिन जीवन की लाचारी मुझ पर तरस दिखाएगी, उस दिन जीवन से मृत्यु कहीं बढ़ जाएगी। इस तरह पहली बार उनकी ओर से मौत तक जाने की बात सामने आई। उन्होंने अपने संदेश में स्पष्ट भी किया कि जिस दिन मैं अपने जीवन की समीक्षा करूंगा, क्या खोया क्या पाया। जिस दिन मैं महसूस करूंगा कि मेरे संघर्ष करने की क्षमता अब समाप्त हो गई है। जिस दिन मैं महसूस करूंगा कि मैं लाचार हूं, बेचारा हूं। उस दिन मैं जीना पसंद नहीं करूंगा। इसके भी निहितार्थ खंगाले जा रहे हैं।
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सुप्रीम कोर्ट में बृहस्पतिवार को अंतरराष्ट्रीय पहलवानों की अपील पर सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस ने एफआईआर दर्ज करने संबंधी हलफनामा दिया है। इसके बाद दिल्ली के साथ ही जिले में शोर मचने लगा। सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने एक के बाद एक कई वीडियो सोशल मीडिया पर जारी किए। इसमें वह अपने नाती और नातिन समेत परिवार के कई बच्चों के साथ खेल के बारे में जानकारी करते और मस्ती करते नजर आए।
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दूसरे वीडियो में अपने आवास पर वाहन से उतरकर अस्तबल में पहुंचे और घोड़े को चना खिलाते नजर आए। इसके साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि वह कहीं नहीं गए हैं, अपने घर पर हैं। उन्होंने साफ किया कि न्याय पालिका पर उन्हें तो भरोसा है लेकिन पहलवानों को भी भरोसा करना होगा। फिलहाल वह अपने आपको खुद ही संभालते नजर आए। वीडियो में वह गाय को गुड़ खिलाते भी दिखे। फिर देर शाम नंदिनीनगर महाविद्यालय कैंपस के बगल कुश्ती प्रशिक्षण केंद्र भी पहुंचे। प्रकरण को लेकर गोंडा में लोग चर्चा तो करते रहे मगर सांसद के बारे में टिप्पणी करने से बचते दिखे।
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कैसरगंज सांसद बृजभूषण शरण सिंह की मुश्किलें बढ़ती दिख रही हैं। इस पर वह अपने बचाव में उतर आए हैं। यौन उत्पीड़न के आरोपों पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश से बेचैनी तो बढ़ी है मगर वह माथे का पसीना साफ करते हुए न्यायपालिका के निर्णय को आत्मसात कर रहे हैं। ‘अमर उजाला’ से बातचीत में उन्होंने कहा कि कानून जंतर-मंतर पर धरने से नहीं, साक्ष्य एवं सच्चाई से चलता है। कैसे क्या हुआ? इसके पीछे न जाते हुए उन्होंने साफ-साफ कहा कि धरने के बजाय पहलवानों को पहले ही पुलिस स्टेशन जाना चाहिए था। तो अब तक एफआईआर दर्ज हो जाती और दूध का दूध पानी का पानी हो जाता।
हरियाणा के मुद्दे पर बृजभूषण बोले- वहां के वास्तविक पहलवान विरोध में नहीं हैं। एक परिवार के ही पहलवान विरोध कर रहे हैं। इसके पीछे क्या साजिश है यह दुनिया जानती है, मुझे कुछ नहीं कहना। जनवरी के पहले ये सारे पहलवान हमसे मिलते थे। खिलाड़ियों को शिष्य की तरह डांटना-फटकारना व फिर पुचकारना हर गुरु का फर्ज होता है।
बृजभूषण बोले- मुझे अध्यक्ष बनने में अब कोई रुचि नहीं है। मेरा खेल का शौक था। अपने कार्यकाल में कुश्ती को ऊंचाइयों तक पहुंचाया। अब हमारा कार्यकाल खत्म हो गया है, मैं चुनाव होने तक कामकाज देख रहा हूं। फिर जो नया अध्यक्ष आएगा आगे संभालेगा।
सांसद बृजभूषण शरण सिंह दो दिन से विचलित थे। उन्होंने एक कविता के माध्यम से अपना दर्द बयां किया था। बृहस्पतिवार को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद उनकी कविता चर्चा में आ गई। उन्होंने सोशल मीडिया में कविता के माध्यम से कहा कि- जिस दिन जीवन के हानि-लाभ पर उतरूंगा, जिस दिन संघर्षों में जाली लग जाएगी। जिस दिन जीवन की लाचारी मुझ पर तरस दिखाएगी, उस दिन जीवन से मृत्यु कहीं बढ़ जाएगी। इस तरह पहली बार उनकी ओर से मौत तक जाने की बात सामने आई। उन्होंने अपने संदेश में स्पष्ट भी किया कि जिस दिन मैं अपने जीवन की समीक्षा करूंगा, क्या खोया क्या पाया। जिस दिन मैं महसूस करूंगा कि मेरे संघर्ष करने की क्षमता अब समाप्त हो गई है। जिस दिन मैं महसूस करूंगा कि मैं लाचार हूं, बेचारा हूं। उस दिन मैं जीना पसंद नहीं करूंगा। इसके भी निहितार्थ खंगाले जा रहे हैं।