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Gonda News: ऋण लेकर खरीदी 10 सिलाई मशीन, बैग बनाकर बनीं आत्मनिर्भर

Wed, 30 Jul 2025 11:48 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा Updated Wed, 30 Jul 2025 11:48 PM IST
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Bought 10 sewing machines by taking loan, became self-reliant by making bags
सिलाई करतीं महिलाएं।
गोंडा। राष्ट्रीय आजीविका मिशन से तहत स्वयं सहायता समूह बनाकर जिले में महिलाएं स्वरोजगार शुरू कर महिला सशक्तिकरण की मिसाल पेश कर रही हैं। विपरीत हालात को चुनौती देकर उजाला स्वयं सहायता समूह की मीरा शुक्ला खुद आत्मनिर्भर बनकर 14 के रोजगार का जरिया बन गईं। बैंक से ऋण लेकर बैग बनाने का कारोबार शुरू किया और अब हर महीने लाखों रुपये का कारोबार कर रही हैं।
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लिलोई कला निवासी मीरा ने बताया कि कोरोना संक्रमण के दौरान उनके पति अवनीत शुक्ला का कारोबार ठप पड़ गया। परिवार आर्थिक तंगी से जूझने लगा था। परिवार व पति के आर्थिक सहयोग के लिए कुछ कारोबार करने की ठानी। इसी बीच नोयडा में बैग बनाने का काम कर रही गांव की योग्यता मिश्रा भी बेरोजगार होकर गांव आ गई थी।
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मीरा व योग्यता ने मिलकर 19 मार्च 2022 को स्वयं सहायता समूह बनाकर बैंक से एक लाख 10 हजार रुपये का ऋण लिया और उससे 10 सिलाई मशीन व किट खरीदी। गांव की 14 महिलाओं को सिलाई का प्रशिक्षण देकर बैग बनाना शुरू कर दिया। पहले तो बाजार में कम बिक्री होती थी, लेकिन वर्ष 2023 के बाद कारोबार ने रफ्तार पकड़ ली। कपड़े का मजबूत बैग, बाजार के ब्रांडेड बैग से कम पैसे में मिलने के कारण गोंडा, अयोध्या व बलरामपुर से बैग के आर्डर आने लगे। व्यापारी समूह के गोदाम से ही माल उठाकर नकद या चेक से भुगतान कर दे रहे हैं।
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छह प्रकार के तैयार हो रहे बैग, कीमत में सबसे कम
समूह की महिलाओं की ओर से छह प्रकार के बैग तैयार किए जा रहे हैं। इसमें पिट्ठू बैग, ट्रेवल बैग, स्कूल बैग, हैंड बैग छोटा व हैंडबैग बड़ा, ट्राॅली बैग तैयार किया जाता है। मीरा ने बताया कि उनके बैग की गुणवत्ता व पैकिंग अच्छी रहती है और बाजार में बिक रहे ब्रांडेड बैग से कम कीमत में मिल जा रही है। बैग की कीमत 150 रुपये से शुरू होती है। प्रति महीने करीब दो हजार बैग की बिक्री से स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को काफी फायदा हो रहा है।
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