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फर्जीवाडे़ में बर्खास्त शिक्षकों पर एफआईआर न कराने में फंसे बीईओ
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गोंडा। बेसिक शिक्षा के परिषदीय स्कूलों में फर्जी अभिलेखों व दूसरे के नाम के अभिलेख लगाकर सहायक अध्यापक बने 52 से अधिक शिक्षकों की सेवाएं समाप्त की गई हैं। दो वर्षों में सेवा से बर्खास्त किए गए शिक्षकों के विरुद्व मुकदमा दर्ज कराने के आदेश खंड शिक्षा अधिकारियों को दिए गए थे। जिले के 11 ब्लॉकों के खंड शिक्षा अधिकारियों ने धोखाधड़ी कर नौकरी हथियाने वाले शिक्षकों पर मुकदमा ही दर्ज नहीं कराया है। बीएसए मनिराम सिंह ने 11 खंड शिक्षा अधिकारियों को नोटिस जारी किया है। उन्होंने वेतन रोकने का आदेश दिया है और एफआईआर दर्ज कराकर रिपोर्ट मांगी है।
बीते वर्ष 2018, 2019 में शिक्षकों के अभिलेखों की जांच कराई गई थी। इसके अलावा एसआईटी से हो रही आगरा यूनीवर्सिटी के बीएड डिग्री की जांच में कई शिक्षक फंसे थे। दो सालों मेें 62 शिक्षकों की सेवाएं समाप्त की गई थीं। जिसमें 10 से 12 शिक्षक लंबे समय से स्कूल न आने के कारण सेवा से बर्खास्त हुए थे और करीब 52 शिक्षकों को धोखाधड़ी करके सहायक अध्यापक की नौकरी हथियाने के मामले में बर्खास्त किया गया था। दो सालों में सेवा से हटाए गए शिक्षकों के विरुद्व मुकदमा दर्ज कराने के लिए बीएसए ने आदेश दिया था। जिस ब्लॉक में शिक्षकों ने नियुक्ति पाई थी, उसी क्षेत्र के थाने में खंड शिक्षा अधिकारियों को मुकदमा दर्ज कराना था।
आदेश के कई माह बीतने के बाद भी 11 ब्लॉकों के खंड शिक्षा अधिकारियों ने मुकदमा दर्ज नहीं कराया है। बीएसए ने समीक्षा की तो पता चला कि नवाबगंज, तरबगंज, वजीरगंज समेत 5 ब्लॉकों के खंड शिक्षा अधिकारियों ने ही बर्खास्त किए गए शिक्षकों के विरुद्व मुकदमा दर्ज कराया है। इसके अलावा 11 ब्लॉकों के खंड शिक्षा अधिकारी मामले को दबाए बैठे हैं। माना जा रहा है कि एफआईआर दर्ज कराए जाने की रिपोर्ट न आने से विभाग की शासन में भी किरकिरी हो रही है। बीईओ की लापरवाही से खफा बीएसए ने खंड शिक्षा अधिकारियों के विरुद्व कार्रवाई शुरू कर दी है। चेतावानी देने के साथ ही वेतन रोक दिया है। कहा कि एफआईआर दर्ज होने की रिपोर्ट मिलने के बाद ही वेतन बहाल किए जाएंगे।
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शासन स्तर से फर्जी शिक्षकों के विरुद्व की गई कार्रवाई का ब्योरा मांगा जा रहा है। शिक्षकों की बर्खास्तगी तो बीएसए को करनी थी, उन्होंने सुनवाई की और नोटिस जारी करने के बाद बर्खास्त कर दिया। अब एफआईआर की सूचना नहीं मिल रही है। ब्लॉकों के खंड शिक्षा अधिकारी मुकदमा दर्ज कराकर मुकदमा नहीं लड़ना चाहते हैं, इसलिए एफआईआर कराने से कन्नी काट रहे हैं।
बीएसए मनिराम सिंह ने बताया कि फर्जीवाडे़ के दायरे में आए शिक्षकों के विरुद्ध सेवा समाप्त की कार्रवाई की गई थी और एफआईआर कराने के निर्देश बीईओ को दिए थे। कई बीईओ ने मुकदमा दर्ज कराने की सूचना नहीं दी है। उनके वेतन रोेकने की कार्रवाई की जा रही है।
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बीते वर्ष 2018, 2019 में शिक्षकों के अभिलेखों की जांच कराई गई थी। इसके अलावा एसआईटी से हो रही आगरा यूनीवर्सिटी के बीएड डिग्री की जांच में कई शिक्षक फंसे थे। दो सालों मेें 62 शिक्षकों की सेवाएं समाप्त की गई थीं। जिसमें 10 से 12 शिक्षक लंबे समय से स्कूल न आने के कारण सेवा से बर्खास्त हुए थे और करीब 52 शिक्षकों को धोखाधड़ी करके सहायक अध्यापक की नौकरी हथियाने के मामले में बर्खास्त किया गया था। दो सालों में सेवा से हटाए गए शिक्षकों के विरुद्व मुकदमा दर्ज कराने के लिए बीएसए ने आदेश दिया था। जिस ब्लॉक में शिक्षकों ने नियुक्ति पाई थी, उसी क्षेत्र के थाने में खंड शिक्षा अधिकारियों को मुकदमा दर्ज कराना था।
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आदेश के कई माह बीतने के बाद भी 11 ब्लॉकों के खंड शिक्षा अधिकारियों ने मुकदमा दर्ज नहीं कराया है। बीएसए ने समीक्षा की तो पता चला कि नवाबगंज, तरबगंज, वजीरगंज समेत 5 ब्लॉकों के खंड शिक्षा अधिकारियों ने ही बर्खास्त किए गए शिक्षकों के विरुद्व मुकदमा दर्ज कराया है। इसके अलावा 11 ब्लॉकों के खंड शिक्षा अधिकारी मामले को दबाए बैठे हैं। माना जा रहा है कि एफआईआर दर्ज कराए जाने की रिपोर्ट न आने से विभाग की शासन में भी किरकिरी हो रही है। बीईओ की लापरवाही से खफा बीएसए ने खंड शिक्षा अधिकारियों के विरुद्व कार्रवाई शुरू कर दी है। चेतावानी देने के साथ ही वेतन रोक दिया है। कहा कि एफआईआर दर्ज होने की रिपोर्ट मिलने के बाद ही वेतन बहाल किए जाएंगे।
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शासन स्तर से फर्जी शिक्षकों के विरुद्व की गई कार्रवाई का ब्योरा मांगा जा रहा है। शिक्षकों की बर्खास्तगी तो बीएसए को करनी थी, उन्होंने सुनवाई की और नोटिस जारी करने के बाद बर्खास्त कर दिया। अब एफआईआर की सूचना नहीं मिल रही है। ब्लॉकों के खंड शिक्षा अधिकारी मुकदमा दर्ज कराकर मुकदमा नहीं लड़ना चाहते हैं, इसलिए एफआईआर कराने से कन्नी काट रहे हैं।
बीएसए मनिराम सिंह ने बताया कि फर्जीवाडे़ के दायरे में आए शिक्षकों के विरुद्ध सेवा समाप्त की कार्रवाई की गई थी और एफआईआर कराने के निर्देश बीईओ को दिए थे। कई बीईओ ने मुकदमा दर्ज कराने की सूचना नहीं दी है। उनके वेतन रोेकने की कार्रवाई की जा रही है।