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नदी में डाली जा रही जीओ ट्यूब
गोंडा/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 07 Jul 2015 11:46 PM IST
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पहाड़ों पर लगातार हो रही मूसलाधार बारिश घाघरा नदी में किसी भी वक्त उथल-पुथल मचा सकती है। अगर ऐसा हुआ तो जिस बंधे को बचाने की हरसंभव कोशिश में सिंचाई विभाग जुटा है, उसके सारे मंसूबों पर पानी फिर जाएगा। लेकिन इन सबके बावजूद सिंचाई विभाग और प्रशासनिक अमला लगातार बंधे को बचाने के लिए नित नई योजनाएं तैयार कर उस पर काम कर रहा है।
मंगलवार को इसी क्रम में वह बंधे की पायलिंग का काम छोड़ नदी की उस धारा को बंधे से दूर मोड़ने के प्रयास में जुट गया, जो धारा सीधे बंधे से सटकर बह रही है। साथ ही जीओ ट्यूब डालने का काम भी शुरू कर दिया गया है, ताकि नदी का जलस्तर बढ़ने पर इसका पानी सीधे बंधे की कटान न करने पाए।
घाघरा नदी एक तरफ जहां तबाही मचाने के लिए बेताब है तो वहीं कटान रोकने व बांध बचाने के लिए प्रशासन सारे हथकंडे अपना रहा है। पहाड़ों पर लगातार हो रही मूसलाधार बारिश कभी भी घाघरा में उथल-पुथल मचा सकती है। इससे इलाकाई लोगों को बचाने के लिए बांध पर रोज-रोज नये प्रयोग किए जा रहे हैं। फिर भी क्षेत्र के लोगों में बांध की मजबूती को लेकर शंका बनी हुई है।
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पहले घाघरा नदी बांध से करीब 200 मीटर दूरी पर बह रही थी और कटान का खतरा लगातार बना हुआ था। वही नदी अब सीधे बंधे से सटकर बहने लगी है। बांध को बचाने के लिए बनाए गए स्पर तो नदी की तेज धार में पहले ही समा चुके थे। जिसके लिए अबकी बार सिंचाई विभाग की ओर से बंधे की पायलिंग के अलावा जीओ ट्यूब का स्पर तैयार किया जा रहा है, लेकिन फिर भी कटान रुकने का नाम ही नहीं ले रही।
वहीं इस कटान से इतर सिंचाई विभाग एक और नए रिंग बांध को बनाने में जुटा है। इसका काम भी रविवार की शाम से शुरू है। मंगलवार को बारिश के चलते बंधे पर चलने वाले बांध बचाव के कार्य में कुछ दिक्कतें पैदा हुईं। लेकिन इसकी परवाह न करते हुए बालू भरी बोरियों के साथ ही बंधे के किनारे पायलिंग का काम मंगलवार दोपहर तक जारी रहा।
इसके बाद सिंचाई विभाग के अभियंताओं के निर्देश पर बांध बचाव के कार्य में लगे लोग संवेदनशील हो चुके बंधे के किनारे-किनारे जीओ ट्यूब बिछाने में जुट गए। साथ ही बंधे में छूने वाली घाघरा नदी की जलधारा को मोड़ने के लिए एक ऐसी मशीन भी मंगवाई गई है, जिससे नदी का पानी सीधे बंधे को न छूने पाए।
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मंगलवार को इसी क्रम में वह बंधे की पायलिंग का काम छोड़ नदी की उस धारा को बंधे से दूर मोड़ने के प्रयास में जुट गया, जो धारा सीधे बंधे से सटकर बह रही है। साथ ही जीओ ट्यूब डालने का काम भी शुरू कर दिया गया है, ताकि नदी का जलस्तर बढ़ने पर इसका पानी सीधे बंधे की कटान न करने पाए।
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घाघरा नदी एक तरफ जहां तबाही मचाने के लिए बेताब है तो वहीं कटान रोकने व बांध बचाने के लिए प्रशासन सारे हथकंडे अपना रहा है। पहाड़ों पर लगातार हो रही मूसलाधार बारिश कभी भी घाघरा में उथल-पुथल मचा सकती है। इससे इलाकाई लोगों को बचाने के लिए बांध पर रोज-रोज नये प्रयोग किए जा रहे हैं। फिर भी क्षेत्र के लोगों में बांध की मजबूती को लेकर शंका बनी हुई है।
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पहले घाघरा नदी बांध से करीब 200 मीटर दूरी पर बह रही थी और कटान का खतरा लगातार बना हुआ था। वही नदी अब सीधे बंधे से सटकर बहने लगी है। बांध को बचाने के लिए बनाए गए स्पर तो नदी की तेज धार में पहले ही समा चुके थे। जिसके लिए अबकी बार सिंचाई विभाग की ओर से बंधे की पायलिंग के अलावा जीओ ट्यूब का स्पर तैयार किया जा रहा है, लेकिन फिर भी कटान रुकने का नाम ही नहीं ले रही।
वहीं इस कटान से इतर सिंचाई विभाग एक और नए रिंग बांध को बनाने में जुटा है। इसका काम भी रविवार की शाम से शुरू है। मंगलवार को बारिश के चलते बंधे पर चलने वाले बांध बचाव के कार्य में कुछ दिक्कतें पैदा हुईं। लेकिन इसकी परवाह न करते हुए बालू भरी बोरियों के साथ ही बंधे के किनारे पायलिंग का काम मंगलवार दोपहर तक जारी रहा।
इसके बाद सिंचाई विभाग के अभियंताओं के निर्देश पर बांध बचाव के कार्य में लगे लोग संवेदनशील हो चुके बंधे के किनारे-किनारे जीओ ट्यूब बिछाने में जुट गए। साथ ही बंधे में छूने वाली घाघरा नदी की जलधारा को मोड़ने के लिए एक ऐसी मशीन भी मंगवाई गई है, जिससे नदी का पानी सीधे बंधे को न छूने पाए।