{"_id":"69ff756bea7c82bbed09a432","slug":"along-with-her-duty-she-is-also-performing-her-motherly-duties-very-well-gonda-news-c-100-1-gon1001-157951-2026-05-09","type":"story","status":"publish","title_hn":"Gonda News: ड्यूटी संग मां का फर्ज भी बखूबी निभा रहीं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Gonda News: ड्यूटी संग मां का फर्ज भी बखूबी निभा रहीं
Sat, 09 May 2026 11:26 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Sat, 09 May 2026 11:26 PM IST
विज्ञापन
बेटी को दुलरातीं अपर आयुक्त मीनू राणा, बेटी के साथ जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव अंकिता स
गोंडा। आज मदर्स डे है। सुबह बच्चों को स्कूल के लिए तैयार करना, उनके टिफिन और पढ़ाई का ध्यान रखना, फिर समय पर दफ्तर पहुंचकर अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करना... आधुनिक दौर की कामकाजी महिलाओं की जिंदगी हर दिन कई मोर्चों पर परीक्षा लेती है। इसके बावजूद वे न सिर्फ परिवार की मजबूत आधारशिला बनी हुई हैं, बल्कि अपने कार्यक्षेत्र में भी सफलता के मानक स्थापित कर रही हैं।
मदर्स डे पर ऐसी महिलाओं की कहानियां सामने आई हैं, जो मां की ममता और जिम्मेदार अधिकारी की भूमिका को एक साथ निभाते हुए समाज के लिए प्रेरणा बन रही हैं। घर और कॅरिअर के बीच संतुलन बनाना आसान नहीं होता लेकिन आत्मविश्वास, अनुशासन और समर्पण से ये महिलाएं हर चुनौती को अवसर में बदल रही हैं। पेश है एक रिपोर्ट :
ड्यूटी भी, बच्चों की परवरिश भी...
देवीपाटन मंडल की अपर आयुक्त मीनू राणा के पति नीरज कुमार झांसी में असिस्टेंट कमिश्नर स्टेट जीएसटी के पद पर तैनात हैं। ऐसे में बच्चों की पढ़ाई और दिनचर्या की अधिकतर जिम्मेदारी मीनू के कंधों पर रहती है। बेटा सम्यक कक्षा छह और बेटी अन्विति कक्षा एक में पढ़ती है। व्यस्त प्रशासनिक जिम्मेदारियों के बावजूद वह हर सुबह बच्चों के साथ योग करती हैं। बच्चों के लिए हेल्दी टिफिन अपनी निगरानी में तैयार कराती हैं और दिनभर की व्यस्तता के बाद शाम को पूरा परिवार साथ बैठकर समय बिताता है। मीनू कहती हैं कि बच्चों को समय देना ही मां का सबसे बड़ा उपहार है। उनके अनुसार मां सिर्फ देखभाल करने वाली नहीं, बल्कि बच्चों की पहली गुरु और सबसे बड़ी प्रेरणा भी होती है।
विज्ञापन
पहले मां का फर्ज, फिर मरीजों की सेवा
मेडिकल कॉलेज की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. सुवर्णा कुमार की बेटी ऋतिशा श्रीवास्तव कक्षा छह में पढ़ती है। पति पुनीत कुमार भी चिकित्सक हैं। डॉ. सुवर्णा रोज सुबह जल्दी उठकर बेटी को स्कूल के लिए तैयार करती हैं। नाश्ता बनाती हैं और फिर अस्पताल की ड्यूटी के लिए निकलती हैं। अस्पताल में दिनभर मरीजों की सेवा करने के बाद भी वह घर लौटकर बेटी के साथ समय बिताना नहीं भूलतीं। उनका मानना है कि बच्चों के साथ बातचीत और समय बिताना रिश्तों को मजबूत बनाता है। व्यस्त जीवन के बावजूद परिवार के लिए समय निकालना हर मां की सबसे बड़ी ताकत होती है।
पदीय दायित्व के साथ निभा रहीं जिम्मेदार मां की भूमिका
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव एवं न्यायिक मजिस्ट्रेट अंकिता सिंह भी उन महिलाओं में शामिल हैं, जो पेशेवर जिम्मेदारियों के साथ मातृत्व का दायित्व मजबूती से निभा रही हैं। पति अंशु सिंह लखीमपुर में कारोबार कर ते हैं। अंकिता बताती हैं कि न्यायिक कार्यों की व्यस्तता के बीच आठ महीने के बेटे अर्जुन की देखभाल करना आसान नहीं होता लेकिन यही जिम्मेदारी उन्हें और अधिक मजबूत बनाती है। कई बार उन्हें बेटे को घर में छोड़कर बाहर जाना पड़ता है लेकिन मां होने का एहसास उन्हें हर परिस्थिति में संतुलन बनाए रखने की प्रेरणा देता है। उनका कहना है कि एक मां के रूप में संवेदनशीलता और धैर्य उनके कार्यक्षेत्र में भी मददगार साबित होता है।
विज्ञापन
मदर्स डे पर ऐसी महिलाओं की कहानियां सामने आई हैं, जो मां की ममता और जिम्मेदार अधिकारी की भूमिका को एक साथ निभाते हुए समाज के लिए प्रेरणा बन रही हैं। घर और कॅरिअर के बीच संतुलन बनाना आसान नहीं होता लेकिन आत्मविश्वास, अनुशासन और समर्पण से ये महिलाएं हर चुनौती को अवसर में बदल रही हैं। पेश है एक रिपोर्ट :
विज्ञापन
ड्यूटी भी, बच्चों की परवरिश भी...
देवीपाटन मंडल की अपर आयुक्त मीनू राणा के पति नीरज कुमार झांसी में असिस्टेंट कमिश्नर स्टेट जीएसटी के पद पर तैनात हैं। ऐसे में बच्चों की पढ़ाई और दिनचर्या की अधिकतर जिम्मेदारी मीनू के कंधों पर रहती है। बेटा सम्यक कक्षा छह और बेटी अन्विति कक्षा एक में पढ़ती है। व्यस्त प्रशासनिक जिम्मेदारियों के बावजूद वह हर सुबह बच्चों के साथ योग करती हैं। बच्चों के लिए हेल्दी टिफिन अपनी निगरानी में तैयार कराती हैं और दिनभर की व्यस्तता के बाद शाम को पूरा परिवार साथ बैठकर समय बिताता है। मीनू कहती हैं कि बच्चों को समय देना ही मां का सबसे बड़ा उपहार है। उनके अनुसार मां सिर्फ देखभाल करने वाली नहीं, बल्कि बच्चों की पहली गुरु और सबसे बड़ी प्रेरणा भी होती है।
विज्ञापन
पहले मां का फर्ज, फिर मरीजों की सेवा
मेडिकल कॉलेज की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. सुवर्णा कुमार की बेटी ऋतिशा श्रीवास्तव कक्षा छह में पढ़ती है। पति पुनीत कुमार भी चिकित्सक हैं। डॉ. सुवर्णा रोज सुबह जल्दी उठकर बेटी को स्कूल के लिए तैयार करती हैं। नाश्ता बनाती हैं और फिर अस्पताल की ड्यूटी के लिए निकलती हैं। अस्पताल में दिनभर मरीजों की सेवा करने के बाद भी वह घर लौटकर बेटी के साथ समय बिताना नहीं भूलतीं। उनका मानना है कि बच्चों के साथ बातचीत और समय बिताना रिश्तों को मजबूत बनाता है। व्यस्त जीवन के बावजूद परिवार के लिए समय निकालना हर मां की सबसे बड़ी ताकत होती है।
पदीय दायित्व के साथ निभा रहीं जिम्मेदार मां की भूमिका
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव एवं न्यायिक मजिस्ट्रेट अंकिता सिंह भी उन महिलाओं में शामिल हैं, जो पेशेवर जिम्मेदारियों के साथ मातृत्व का दायित्व मजबूती से निभा रही हैं। पति अंशु सिंह लखीमपुर में कारोबार कर ते हैं। अंकिता बताती हैं कि न्यायिक कार्यों की व्यस्तता के बीच आठ महीने के बेटे अर्जुन की देखभाल करना आसान नहीं होता लेकिन यही जिम्मेदारी उन्हें और अधिक मजबूत बनाती है। कई बार उन्हें बेटे को घर में छोड़कर बाहर जाना पड़ता है लेकिन मां होने का एहसास उन्हें हर परिस्थिति में संतुलन बनाए रखने की प्रेरणा देता है। उनका कहना है कि एक मां के रूप में संवेदनशीलता और धैर्य उनके कार्यक्षेत्र में भी मददगार साबित होता है।

बेटी को दुलरातीं अपर आयुक्त मीनू राणा, बेटी के साथ जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव अंकिता स

बेटी को दुलरातीं अपर आयुक्त मीनू राणा, बेटी के साथ जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव अंकिता स