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Gonda News: जलाशयों के शैवाल से बढ़ेगी खेतों की उर्वरता
Sun, 06 Sep 2026 11:25 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Sun, 06 Sep 2026 11:25 PM IST
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मऊ के एक प्रयोगशाला में नील हरित शैवाल के बारे में जानकारी लेतीं डॉ. रेखा शर्मा। -स्रोत: महाविद
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गोंडा। जिले के जलाशयों में पाए जाने वाले नील हरित शैवाल (ब्लू ग्रीन एलगी) अब खेती के लिए उपयोगी साबित हो सकते हैं। एलबीएस पीजी कॉलेज के वनस्पति विज्ञान विभाग में चल रहे मेजर प्रोजेक्ट के तहत इन शैवाल की पहचान, पृथक्करण और कल्चर कर उनकी कृषि उपयोगिता का अध्ययन किया जाएगा। परियोजना से जुड़ीं प्रधान शोधकर्ता डॉ. रेखा शर्मा, शोध सहायक अमित दुबे और मायाराम यादव ने कृषि उपयोगी सूक्ष्मजीव ब्यूरो पर मऊ में वैज्ञानिक प्रशिक्षण लिया।
वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. हिलोल चकदार के मार्गदर्शन में उन्होंने शैवाल की पहचान, आइसोलेशन और कल्चर की तकनीक सीखी। परियोजना के तहत जिले के प्रमुख जलाशयों से शैवाल के नमूने एकत्र कर प्रयोगशाला में उनकी प्रजातियों और कृषि उपयोगिता का अध्ययन किया जाएगा। उपयोगी प्रजातियों का कल्चर तैयार कर मिट्टी की उर्वरता और फसल उत्पादन बढ़ाने में उनकी संभावित भूमिका पर शोध होगा। डॉ. रेखा ने बताया कि कॉलेज में जल्द ही ब्लू ग्रीन एलगी लैब तैयार करने की योजना है। उन्होंने कहा कि शोध को प्रयोगशाला तक सीमित न रखकर भविष्य में किसानों तक पहुंचाया जाए। प्रभारी प्राचार्य प्रो. जितेंद्र सिंह ने कहा कि स्थानीय समस्याओं पर वैज्ञानिक शोध और उसके परिणामों को समाज तक पहुंचाना महाविद्यालय की प्राथमिकता है।
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वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. हिलोल चकदार के मार्गदर्शन में उन्होंने शैवाल की पहचान, आइसोलेशन और कल्चर की तकनीक सीखी। परियोजना के तहत जिले के प्रमुख जलाशयों से शैवाल के नमूने एकत्र कर प्रयोगशाला में उनकी प्रजातियों और कृषि उपयोगिता का अध्ययन किया जाएगा। उपयोगी प्रजातियों का कल्चर तैयार कर मिट्टी की उर्वरता और फसल उत्पादन बढ़ाने में उनकी संभावित भूमिका पर शोध होगा। डॉ. रेखा ने बताया कि कॉलेज में जल्द ही ब्लू ग्रीन एलगी लैब तैयार करने की योजना है। उन्होंने कहा कि शोध को प्रयोगशाला तक सीमित न रखकर भविष्य में किसानों तक पहुंचाया जाए। प्रभारी प्राचार्य प्रो. जितेंद्र सिंह ने कहा कि स्थानीय समस्याओं पर वैज्ञानिक शोध और उसके परिणामों को समाज तक पहुंचाना महाविद्यालय की प्राथमिकता है।
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